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*दिग्विजय सिंह ने गरबा में गौमूत्र पीने की अनिवार्यता पर सवाल उठाए,’क्या बीजेपी नेताओं को भी गरबा में गौमूत्र पीना पड़ता है?’* 

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने गरबा में गौमूत्र पीने की अनिवार्यता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ आम लोगों के लिए क्यों है, क्या बीजेपी नेताओं पर भी ऐसी शर्तें लागू हैं?

एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने न्यूज़ 18 एमपी-सीजी की एक डिबेट की पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. इस डिबेट में गरबा और गौमूत्र को लेकर चल रही सियासत पर चर्चा हो रही थी. दिग्विजय सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि गरबा में गौमूत्र पीने की अनिवार्यता केवल आम लोगों के लिए क्यों है? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बीजेपी नेताओं को भी ऐसी शर्तों का पालन करना पड़ता है? उन्होंने कहा कि ऐसी कोई अनिवार्यता किसी के लिए भी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह देश संविधान से चलता है, दादागिरी से नहीं.

दिग्विजय सिंह ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कुछ उदाहरण दिए. उन्होंने कहा कि जब बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन गरबा में शामिल हुए थे, तो क्या उन्हें गौमूत्र पीने या कलावा बांधने के लिए मजबूर किया गया था? उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा जब राखी जैसे त्योहार मनाता है, तब भी ऐसी कोई शर्त लागू नहीं की जाती. इसी तरह, बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी जब दिवाली मनाते हैं, तो उनका विरोध नहीं होता, और न ही होना चाहिए. दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि अगर बीजेपी नेताओं के लिए ऐसे नियम नहीं हैं, तो फिर आम लोगों पर ऐसी शर्तें क्यों थोपी जा रही हैं?

उनका कहना है कि देश में हर व्यक्ति को अपनी मर्जी से अपने त्योहार मनाने का अधिकार है. किसी पर भी धार्मिक या सांस्कृतिक नियम थोपना गलत है. उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान सभी को समान अधिकार देता है, और किसी भी तरह की जबरदस्ती स्वीकार नहीं की जानी चाहिए. दिग्विजय सिंह के इस बयान ने एक बार फिर सियासी हलकों में बहस छेड़ दी है.

यह मुद्दा सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है. कुछ लोग दिग्विजय सिंह के बयान का समर्थन कर रहे हैं, उनका मानना है कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान होना चाहिए. वहीं, कुछ लोग इसे बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी मान रहे हैं. इस विवाद ने गरबा जैसे सांस्कृतिक आयोजनों में धार्मिक नियमों को लेकर एक नई बहस शुरू कर दी है.

दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में यह भी कहा कि देश का हर नागरिक स्वतंत्र है और उसे अपने तरीके से उत्सव मनाने का हक है. उनका कहना है कि ऐसी अनिवार्यताएं न केवल आम लोगों के अधिकारों का हनन करती हैं, बल्कि समाज में तनाव भी पैदा करती हैं. इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में ऐसी शर्तें लगाना उचित है? इस पर चर्चा और सियासत अभी और गर्म होने की संभावना है.

Ramswaroop Mantri

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