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डीएनए : जौनपुर में मुसलमान अब शुक्ला, दुबे, यादव और सिंह 

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             कुमार चैतन्य 

   शिक्षाजनित समझ ने डीएनए क़ो बल प्रदान किया है. यूपी में जौनपुर जिले के कतिपय गांवों के मुसलमान अपने नाम के साथ शुक्ला , दुबे , तिवारी , यादव सिंह, श्रीवास्तव आदि उपनाम जोड़ने लगे हैं। जिला मुख्यालय से करीब 35 किमी दूर केराकत तहसील के डेहरी गांव में तो इसकी शुरुआत दशकों पहले हो गई थी। 

      अब टीवी चैनलों और मीडिया में संघ और भाजपा नेताओं के प्रचार का परिणाम यह निकला कि जौनपुर के अनेक गांवों के साथ साथ समीपवर्ती जिलों में भी मुस्लिम नाम के साथ पूर्वजों के हिन्दू नाम जोड़ने का चलन शुरू हो गया। डेहरी में बहुत पहले नौशाद अहमद ने अपने नाम के साथ दुबे जोड़ा था। नौशाद को अब गांव वाले दुबे जी कहकर ही बुलाते हैं।    

        उन्होंने कहा : अरब का मज़हब है इस्लाम. तुर्क भारत में व्यापार करने, यहाँ काबिज होने, हमें लूटने आए थे तो अपनी बीबियां नहीं लाये थे. हमारे यहाँ की महिलाओं क़ो पटाये और शादी किये, मज़बूर किये और रखैलें बनाए, उनसे बलात्कार किये. संतान मुस्लिम घोषित हुई. हमारे यहाँ के मर्दो क़ो जबरजस्ती मुसलमान बनाए. आज हम स्वतंत्र हैं, तो यह कलंक क्यों ढोएं. अपना धर्म स्वीकार कर पूर्वजों की आत्मा क़ो शांति क्यों नहीं दें.

    उन्होंने बताया उनके बचपन में ही घरवालों को पता चल गया था कि वे मूलतः ब्राह्मण थे और  शेख , पठान , सैयद आदि टाइटल से उनका कोई नाता नहीं है। ये कास्ट उनपे थोपी हुई हैं।

     नौशाद दुबे के मुताबिक शेख अरबी टाइटल है , मिर्जा तुर्कियों का और खान मंगोलों का  टाइटल है। हमारे पुरखे पांच पीढ़ी पहले दुबे थे अतः अपना नाम बदलकर नौशाद अहमद दुबे कर दिया है। वे ब्राह्मण बताकर अपना परिचय देते हैं। गाय पालते हैं , दूध बेचते नहीं , शाकाहारी हो चुके हैं।

समझ तो आती है पर तब आती है जब कोई खुद समझना चाहे। कानूनन हिन्दू उपनाम जोड़ने वालों को धमकियां भी मिली , फतवे भी जारी हुए , पर कोइ डरा नहीं। यदि नहीं डरा तो अब हिन्दू उपनाम रखने का प्रचलन खासा चल निकला।

    हमारे कुछ शहर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में त्यागी और गौड़ उपनामधारी मुस्लिमों की भरमार है। खैर ! यह बात इन सब की समझ में आ गई है कि डीएनए का अर्थ क्या होता है। 

शुरुआत मोहन भागवत ने की थी और अब तो पाकिस्तान तक में डीएनए की चर्चा होने लगी है।  पाकिस्तान की मशहूर पत्रकार आरजू काजमी ने  चैनल पर साफ साफ बता दिए अपने हिन्दू पुरुखों के नाम। यही नहीं ऑफिस में अपनी सीट के ठीक पीछे उन्होंने बुद्ध की मूर्ति रख ली है। 

   हमारे यहां रुबिया लियाकत बिंदी लगाती हैं ,सभी बड़े हिंदू त्यौहार भी। हम किसी से यह नहीं कहते कि वह धर्म बदल ले। जो जहां रहे खुश रहे पर अपने अतीत को जरूर जाने। 

     100% सच बात है कि भारतीय मुसलमान अतीत के हिन्दू ही हैं।उन्हें इतिहास पढ़ने से पता चलेगा कि उनके हिन्दू दादा बाबा नाना से आक्रांताओं ने किस तरह तलवार की नोक पर अतिक्रमण कराया था।

   तो साहब,इतिहास पढ़िए।जिसने पढ़ा वह सब समझ गया।देखिए न जौनपुर के मुस्लिमों को,उन्हें भी सब समझ आ गया है।

क्यों आपने नाम के साथ पूर्वजों की पहचान जोड़ रहे हैं जौनपुर के इस गांव के मुस्लिम?

यूपी का जौनपुर जिला एक तरफ अटाला मस्जिद-मंदिर विवाद को लेकर देशभर में चर्चाओं में छाया हुआ है। इसमें हिंदू पक्ष की ओर से मस्जिद को देवी मंदिर बताया जा रहा है। तो वहीं, दूसरी ओर एक ऐसी चौंकाने वाली घटना सामने आई है जिसमें केराकत का गांव डेहरी में कुछ मुस्लिमों ने अपने नाम के आगे हिंदू ब्राह्मण टाइटल (UP Muslim Name Hindu Title) दुबे/पांडे/शुक्ला लगाना शुरू कर दिया है।

याद रखना चाहते हैं पुरखो की विरासत 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस गांव के मुसलमानों का कहना है कि उनके पूर्वज हिंदू ब्राह्मण थे और वह उनकी विरासत को याद रखना चाहते हैं। इसलिए वे लोग अपने नाम के आगे अपने पुरखों की जाति को लिख रहे हैं। कुछ अपने नाम के साथ दुबे तो कोई मिश्रा और शुक्ला लगा रहा है।

पूजा भी करते हैं ये मुसलमान

UP Muslim Brahmin

गांव के दो लोगों ने अभी ऐसा किया है, इनमें एक ने अपना नाम मोहम्मद आजम दुबे रख लिया तो वहीं दूसरे ने नौशाद अहमद पांडे रख लिया है। बताया जा रहा है कि अपने नाम के साथ हिंदू टाइटल लगाने वाले ये मुस्लिम भगवान की पूजा भी करते हैं। ये मुस्लिम भगवान राम की पूजा करते हैं। इसके साथ ही गाय को माता मानकर उनकी सेवा करते हैं। हालांकि इन दोनों मुस्लिमों के अलावा गांव के किसी और शख्स ने नाम के आगे हिंदू टाइटल नहीं लगाया है।

परिवार वालों ने जताई सहमति

UP Muslim Name Hindu Title: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अपने नाम के साथ हिंदू टाइटल जोड़ने वाले दोनों लोगों के परिवार वाले भी उनका समर्थन कर रहे हैं. उनके परिवार के लोग भी भगवान की पूजा करते हैं। हालांकि परिवार के किसी और शख्स ने अपने नाम के आगे हिंदू टाइटल नहीं जोड़ा है। लेकिन इनके द्वारा दावा या जा रहा है कि भविष्य में कई लोग अपने नाम के आगे अपने पुरखों का टाइटल लगा सकते हैं।

बीजेपी को खुश करने का जरिया

वहीं, जौनपुर के अन्य मुस्लिम बाहुल गांव के लोग हिंदू टाइटल लगाने वालों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा करने वाले लोग सिर्फ सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को खुश करना चाहते हैं। उनका इरादा सरकार को खुश करने का है, जिससे उन्हें कुछ फायदा मिल सके और वह मीडिया की सुर्खियों में आ सकें।

शादी के कार्ड पर लिखा ब्राह्मण टाइटल

नौशाद अहमद ने शादी के कार्ड पर नौशाद अहमद दुबे (UP Muslim Name Hindu Title) लिखकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उनका कहना है कि उनके पूर्वज पूर्व में हिंदू थे, इसलिए अब वह अपने नाम के साथ अपने गोत्र का नाम भी लिख रहे हैं। इसे लेकर पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग नौशाद के परिवार से मिलने आ रहे हैं।

sलाल बहादुर दुबे से हुए थे लाल मोहम्मद 

वहीं मामले में नौशाद अहमद दुबे ने बताया कि सात पीढ़ी पहले हमारे पूर्वजों में से एक लाल बहादुर दुबे से हमारे लोग हिंदू से मुसलमान में कनवर्ट हुए थे  और वो अपना नाम लाल मोहम्मद लिखने लगे थे। यहां ज्यादातर लोग आजमगढ़ के रानी की सराय से आए थे। वह अपने पूवर्जों के बारे में फिलहाल पता कर रहे हैं, सामने आने पर जल्द ही समाज के सामने लाकर रखेंगे।

नौशाद ने एक दूसरा उदाहरण देते हुए कहा कि आजमगढ़ के मार्टिनगंज तहसील के एक गांव बीसवां है जहां सुभाष मिश्रा के करीबी 14 पीढ़ी पहले मिश्रा से शेख हुए थे। वहां के दोनों परिवार मिश्रा और शेख को लोग जानते हैं कि पूर्व में वो मिश्रा यानी हिन्दू थे इसलिए दोनों परिवार आज भी सौहार्द के माहौल में रह रहे हैं।

Ramswaroop Mantri

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