डॉ. प्रिया ‘मानवी’
शरीर का कोई भी विकार हो,उसे तुरन्त एड्रेस किया जाए और डॉक्टर के सामने खुल कर अपनी समस्या बताई जाए, तो समय रहते निदान सम्भव है। अगर उसे छुपाया जाए, तो न केवल उसका उपचार मुश्किल हो जाता है, बल्कि यह आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक हो सकता है। न सिर्फ आपके लिए, बल्कि आपके पार्टनर के लिए भी।
स्वभाविक है इसका असर रिश्तों पर भी पड़ सकता है। शीघ्रपतन ऐसी ही एक समस्या है। पुरुषों की यह बीमारी महिलाओं को अतृप्तिजनित तनाव देकर खराब रिश्ते का कारण बनती है। आम बोलचाल या शार्ट में इसे ईडी (ED) कहते हैं।
*करोंड़ों में है ईडी इफेक्टेड लोगों की संख्या :*
रिसर्चर आंकड़े के अनुसार साल 1995 मेँ 65 करोड़ लोग इससे पीड़ित थे। अब दस वर्षों बाद संख्या कितनी होगी, अनुमान लगा सकते हैं। यानी कई देशों की आबादी के बराबर दुनिया भर में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से पीड़ित।
NCBI की एक रिपोर्ट कहती है कि 19 से 49 वर्ष के 95 फीसदी पुरुष इरेक्टाइल डिस्फंक्शन से प्रभावित हैं।
*क्या है इरेक्टाइल डिस्फंक्शन?*.
इस समस्या से जूझ रहे पुरुषों का पेनिस सेक्स के अनुकूल नहीं हो पाता। ऐसे में पीड़ित व्यक्ति यौन संबंध बनाने में नाकाम रहता है। जाहिरन, इस वजह से पीड़ित लोगों के दाम्पत्य जीवन या फिर यौन संबंधों में दिक्कतें होती हैं। मुख्य कारण हैण्डप्रैक्टिस, सेक्स-ड्रग्स, नशा और दुराचार है
एशियाई स्तर पर लोकप्रिय मुंबई के वरिष्ठ सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठरी के अनुसार मानासिक तनाव, अजीबोगरीब लाइफस्टाइल और स्त्री पार्टनर का ठंडापन भी वजहें हैं. अब 15 -20 साल के लोग भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। पहले इसकी औसत उम्र 60+ थी लेकिन अब किशोर, युवा भी इसकी ज़द में हैं। पुरुषो का यह रोग स्त्रीजीवन को नर्क बनाता है.

हमारे यौनविद डॉ. विकास मानव के अनुसार पुरुषों के रिप्रोडक्टिव ऑर्गन में ब्लड सप्लाई नहीं होने से, नसों के सूख जाने, फैल जाने से या उनके डेड हो जाने से इरेक्टाइल डिस्फंक्शन होता है।
ईडी के लक्षण :
~इरेक्शन में मुश्किल
~इरेक्शन न बनाए रख पाना
~सेक्स ड्राइव में कमी
~खुद से शर्मिंदा रहना
~मुख, गुदा मैथुन-वृत्ति
1. परफॉर्मेंस प्रेशर से बचें :
कई सर्वे में बहुत सारे लोगों ने ये बात स्वीकारी है कि सेक्स के दौरान परफॉर्मेंस न हो पाने की चिंता उन्हें सताती है। यही चिंता उन्हें इस बीमारी तक पहुंचाती है।
आदर्श स्थिति की कल्पना करके लोगों ने खुद को इस मुकाम तक पहुंचाया है। अगर कोई भी इस समस्या से जूझ रहा है तो सबसे पहले उसे इस डर से पार पाना होगा कि उसकी सेक्स परफॉर्मेंस अच्छी नहीं है। या वो अपने पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पा रहा है।
2. डॉक्टर से परामर्श :
मर्दवादी दम्भ से निकलकर बीमारी स्वीकार कर डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है। बहुत सारे पुरुषों में यह पाया गया है कि वह अगर यह स्वीकार लेंगे कि उनमें सेक्स से जुड़ा कोई डिसऑर्डर है तो इससे उनका कद घट जाएगा।
इस वजह से वे डॉक्टर के पास जाने से भी डरते हैं। डॉक्टर के पास जा कर समुचित इलाज़ लेना ही एकमात्र विकल्प है।
इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का इलाज़ मेडिकल सेक्टर में सम्भव हुआ है। इंजेक्शन, सर्जरी से लेकर दवाईयां भी बाज़ार में उपलब्ध है। लेकिन हां, फ़र्ज़ी हकीम के झांसे में ना आते हुए, अपनी मर्ज़ी नहीं चलाते हुए, जाँच उपरांत मिली सलाह के अनुसार ही दवाईयां लें।
3. प्रोस्टेटिक आर्टरी एम्बोलिजेशन :
प्रोस्टेटिक आर्टरी एम्बोलिजेशन (पीएई) के जरिये भी इसका इलाज हो सकता है। बिना मरीज़ को दर्द हुए इस तकनीक से सर्जरी एक एडवांस प्रक्रिया है। बहुत सारे इरेक्टाइल इंफेक्शन से पीड़ित मरीज़ एडवांस मिनिमली इनवेसिव सर्जरी (एमआईएस) के जरिए अपना रोग निदान करवा रहे हैं।
4. जिनसेंग की मदद :
आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज़ में जिनसेंग नाम का एक पौधा भी कारगर पाया गया है। जिनसेंग बॉडी में रक्त संचार बढाने में मदद करता है जिसकी वजह से पुरुषों के प्राइवेट पार्ट्स में भी मौजूद दिक्कतें दूर होती हैं।
5. मसाज और मेडिटेशन :
मेडिटेटिव मसाजथेरेपी से पेनिस क़ी नसों को जानदार बनाया जाता है. मेडिटेशन से स्पर्म डिस्चार्ज पर कंट्रोलिंग सिखाई जाती है.
कुल मिला कर इरेक्टाइल इंफेक्शन का इलाज पूरी तरह मुमकिन है। बशर्ते,जागरूकता दिखा कर सही डॉक्टर और सही इलाज तक पहुंचा जाए।





