शशिकांत गुप्ते
यकायक सन 1961 में प्रदर्शित फ़िल्म ससुराल का यह गीत याद आ गया। यह गीत लिखा है शैलेंद्रजी ( शंकरदास केसरीलाल) ने।
गीत के बोल है,
एक सवाल मै करूँ,एक सवाल तुम करों
हर सवाल का जवाब ही सवाल हो
फ़िल्म का नाम और गीत के बोल सुनकर मानसिक रूप से असमजंस्यता स्थिति बन गई?
कारण इनदिनों सवाल सिर्फ व्याकरण में सीमित है। व्यवहार में सवाल करना साहस का काम हो गया है? यदि किसी ने सवाल पूछने की हिम्मत दिखाई तो फ़िल्म का नाम याद आ जाता है, ससुराल?
बहरहाल मुद्दा है सवाल?
इतना ही सोच पाया था। उसी समय सीतारामजी का आगमन हुआ।
कहने लगे सवाल वगैराह छोडो।
देश की जनता की सहनशीलता पर गौर करों। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, बिजली की समस्या और अन्य सभी समस्याओं पर जनता सहनशील हो गई है।
महंगे क्रिकेट मैच बदस्तूर आयोजित हो रहें हैं। जनता के मनोरंजन के लिए निर्मित होने वाली फ़िल्मी करोडों की लागत से निर्मित हो रही है। फिल्मों में लगने वाली करोड़ो की लागत को समाचार माध्यम महिमामण्डित कर प्रस्तुत करतें हैं। यह उनके व्यवसाय की परंपरा बन गई है? धार्मिक अयोजन सम्पन्न करवाने के लिए दानवीरों के द्वारा मुक्तहस्त से दान मुहैया दिया जा रहा है। विशाल भंडारों में भोजन प्रसाद के रूप ग्रहण कर लाखों लोग पुण्य कमा रहें हैं।
हास्य क्लबों में लोगों का अट्टहास चल रहा है।सर्वत्र सब कुछ बदस्तूर चल रहा है।
कोविड19 महामारी से बचने के लिए स्लोगन दिया गया था।
महामारी से डरना नहीं लड़ना है।
अब यह स्लोगन सटीक होगा।
समस्याओं पर सवाल नहीं करना है, समस्याओं को सहना है।
कहा जाता है,जब मानव अपनी समस्याओं को हल करने के सारे प्रयास कर थक जाता है, तब वह भगवान को ही याद करता है।
इसी मुद्दे को साकार करने के लिए कुछ लोग हनुमान चालीसा का पाठ कर रहें हैं।
पूर्णरूप से धार्मिक होकर, बाकायदा दमखम के साथ घोषणा करते हुए दूसरों के घर के समक्ष पढ़ने की जिद कर रहें हैं।
मैने कहा यह तो अपनत्व की भावना का इज़हार है।
सीतारामजी ने कहा आप ठीक कह रहें हैं, लेकिन आदतन आलोचक इसे मान-न-मान,मैय तेरा मेहमान वाली कहावत को चरितार्थ करना कह रहें हैं।
मैने कहा आलोचक गलत कह रहें हैं।
मै स्वयं बचपन से हनुमान चालीसा पढ़ रहा हूँ,लेकिन सत्तर सावन देखने के बाद, मुझे सन 2022 में रामनवमी के दिन हनुमान चालीसा का महत्व समझ में आया।
मुझे याद है साठ के दशक में एक हिप्पी नामक जमात का उदय हुआ था। यह हिप्पी लोग मादक पदार्थो का सेवन कर नशे में तल्लीन होकर हरे कृष्ण हरे राम गाते थे।
इन हिप्पियों के कारण अपने देश के लोगों को हरे कृष्ण हरे राम का महत्व पता चला था। ऐसा कुछ व्यंग्यकारों का कहना है।
मेरे वक्तव्य पर सीतारामजी अपनी प्रतिक्रिया देते,इसके पूर्व ही मैने सीतारामजी से कहा कल मै आरहा हूँ। आपके घर के सामने हनुमान चालीसा का पाठ करने।
सीतारामजी ने कहा हाँ आइए। लॉडस्पीकर के साथ आना।
धार्मिक कार्यों के लिए प्रशासन की अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं है।
पवनपुत्र हनुमानजी की जय।
उक्त गीत की कुछ पंक्तिया प्रस्तुत है।
उजियारे में जो परछाई
पीछे पीछे आए
वही अंधेरा होने पर
क्यों साथ छोड़ छुप जाये
सुख मे क्यों घेरे रहते
हैं अपने और पराये
बुरी घड़ी मे क्यों हर
कोई देख के भी कतराये
एक सवाल मैं करूँ
एक सवाल तुम करो
हर सवाल का
*सवाल ही जवाब हो
हैं मालूम की जाना
होगा दुनिया एक सराय
फिर क्यों जाते वक्त
मुसाफ़िर रोये और रुलाये
शशिकांत गुप्ते इंदौर




