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*मत भूलो कि मणिपुर भारत का राज्य है*

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विजय दलाल

*कश्मीर फाइल्स और द केरला स्टोरी के बाद एक नई फिल्म “” मुख्यमंत्री का फटा इस्तीफा “”*

इस बार कोई केंद्र की सत्ता पर कोई अटल बिहारी तो है नहीं जो मुख्यमंत्री को *राजधर्म* पालन करने को कहे। असल में डायरेक्टर और प्रोड्यूसर को इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा तो जनता के वोटों के बाक्स आफिस पर पिछली दो फिल्मों की अपार सफलता से मिली है। पहली 2002 के गुजरात नरसंहार और दूसरी 2008 की कंधमाल उड़ीसा के दंगों पर। 

यह मणिपुर पर फिल्माई गई फिल्म तो 2008 के कंधमाल की Replica प्रतिकृति है।

“हालीवुड” या “बालीवुड” को फिल्म के लिए ऐसे दृश्य फिल्माने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करना पड़ते हैं लेकिन “गालीवुड” को नहीं। वो ऐसे natural दृश्य बगैर धेला खर्च किये तैयार कर लेता है। हां ऐसे दृश्यों के लिए पहले से काफी जमीनी तैयारियां करना पड़ती है। जनता के बीच धर्म का नशा बांटना पड़ता है ताकि उस पागलपन में इंसानियत भूल जाएं। आर्थिक मोर्चे पर    बेरोज़गारी बढ़ानी पड़ती है फिर उन्हें तरह तरह के प्रलोभन देना होते हैं और ऐसे संगठन तैयार करना पड़ते हैं। बरसों की मेहनत लगती है। आंख के अंधे नाम नयनसुख की फौज तैयार करना पड़ती है तभी तो आसाराम बापू और राम-रहीम जैसों पर व्याभिचार के गंभीर आरोपों के बाद भी लाखों करोड़ों अंधभक्त ऐसे तो पैदा नहीं हो सकते।

उन्हीं फार्मूले के प्रयोग आज की राजनीति में इस्तेमाल हो रहे हैं।

हमने अपने घर की सुरक्षा के लिए जिस चौकीदार को लगाया था पता लगा वो ही चोरों और लूटेरों के साथ मिला हुआ है।

यह फिल्म कंधमाल की रिप्लिका क्यों है कहानी कैसी मिलती है।

वहां भी एक हिंदू संत की हत्या के बाद सरकारी आंकड़ों के अनुसार 39 ईसाई मारे गए,3906 ईसाईयों के घर तोड़ दिए गए , 395 से अधिक चर्चों में आग लगाई, 6500 घर लूट लिए गए या आग लगाई गई, 40 के लगभग महिलाओं से बलात्कार किया गया और 60 हजार से 75 हजार लोग बेघरबार कर दिए गए।

2002 और 2008 और 2023 कि फिल्म के दृश्यों में एक भारी फ़र्क है। गुजरात के आदिवासी इलाकों में अल्पसंख्यक समुदाय की दुकानें और शोरूम लूटने के लिए आदिवासियों का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन कंधमाल और मणिपुर में आदिवासी और उनकी जंगल संपदा मुख्य निशाने पर है।

2023 की दुनिया है देशी विदेशी कार्पोरेट का दुनिया के प्राकृतिक साधनों में पानी, हवा और आकाश और इनसे जुड़े हर प्राकृतिक संसाधनों पर तो कब्जा हो गया है।

केवल खुबसूरत पहाड़ और जंगल और प्राकृतिक संपदा के बहुत बड़े हिस्से पर अभी भी जनजातियों का कब्जा है उन्हें कैसे कब्जे में लेना यही इस मणिपुर फिल्म का उद्देश्य है।

कश्मीर और उत्तर पूर्व की खूबसूरत वादियां और जंगल वहां के खनिज,केरल के चाय और मसालों के हरे भरे लहलहाते बागान।

इसलिए पहले “कश्मीर फाइल्स” आई उसके बाद “द केरला स्टोरी”

और अब देश की जनता के सामने ” मुख्यमंत्री का फटा इस्तीफा “!

इस फिल्म के शूट करने और कंधमाल की रिप्लिका में एक बड़ा फर्क है उड़ीसा देश के नक्शे में बिल्कुल बीचों बीच का राज्य था लेकिन मणिपुर सीमावर्ती इलाका है जिसकी सीमा चीन और म्यांमार से लगी हुई है।

अरे आप मेरी तरह इन बातों के लफड़े में मत पड़िए और नई महान धार्मिक और सामाजिक फिल्म का आनंद लीजिए।

अंधभक्त मीडिया ने हमें हारर फिल्म को भी कामेडी फिल्म की तरह देखने की आदत बना दी है।

वोट कबाड़ू राजनीति के द्वय डायरेक्टर और प्रोड्यूसर द्वारा निर्मित देश के रूपहर्ले पर्दे पर अगले चुनावों तक कौन कौन सी नई फिल्में आती है। इंतजार कीजिए।

अभी तो इस *फिल्म* का ट्रेलर देखिए!

विजय दलाल “मेहनतकश”

Ramswaroop Mantri

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