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भविष्य में विश्व का सबसे बड़ा संघर्ष पानी के लिए होगा : डॉ. मुरली मनोहर जोशी

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तरुण भारत संघ के स्वर्ण जयंती वर्ष पर “पानी पंचायत” पुस्तक का भव्य विमोचन

नई दिल्ली, । जल संरक्षण के क्षेत्र में पिछले पाँच दशकों से महत्वपूर्ण कार्य कर रहे तरुण भारत संघ (तभासं) के स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर हिंदू कॉलेज सांगानेरिया सभागार, दिल्ली विश्वविद्यालय में विश्‍व जल दिवस पर “पानी पंचायत” का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास और तरुण भारत संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। इस अवसर पर देशभर के पर्यावरणविदों, जल विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों सहित 500 से अधिक लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने की, जबकि मंच पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, जनजातीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, पर्यावरणविद् राजेंद्र सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन प्रो. रंजन त्रिपाठी, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार, नालंदा प्रकाशन के अध्यक्ष नीरज कुमार और श्याम सहाय मौजूद रहे।

इस मौके पर पर्यावरणविद् राजेंद्र सिंह द्वारा लिखित और नालंदा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित “पानी पंचायत” पुस्तक का विमोचन पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने किया। इसमें पुस्तक तरुण भारत संघ के पाँच दशकों के जल संरक्षण कार्यों को संकलित किया गया है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने पुस्तक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की संस्कृति और सभ्यता जल, प्रकृति और मानवीय मूल्यों पर आधारित रही है। उन्होंने राजेंद्र सिंह के कार्यों की सराहना करते हुए कहा, हमने महामना मालवीयजी को महामना कहा, वैसे ही राजेंद्र सिंह को ‘जल ऋषि’ कहा जाना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, पृथ्वी का अस्तित्व जल से ही है। यदि जल संकट का समाधान नहीं निकाला गया, तो भविष्य में सबसे बड़ा युद्ध जल को लेकर होगा।”

जनजातीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि वैदिक ज्ञान परंपरा हमें प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सदुपयोग का मार्ग दिखाती है, और यही शिक्षा “पानी पंचायत” पुस्तक के माध्यम से दी गई है। उन्होंने तरुण भारत संघ और राजेंद्र सिंह को इस सराहनीय प्रयास के लिए बधाई दी।

प्रसिद्ध  पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह ने “पानी पंचायत” पुस्तक के बारे में बताया हुए कहा कि यह पुस्तक जल संरक्षण, सामुदायिक भागीदारी, पंच परमेश्वर की परंपरा और भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधार बनाकर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कहा ब्रह्मांड की सृष्टि में जल की अहम भूमिका है। यह पुस्तक बताती है कि पानी को कैसे बचाया जाए और इसका न्यायोचित वितरण कैसे किया जाए। इसमें पंच परमेश्वर की पंचायत प्रक्रिया का वर्णन किया गया है, जिसमें समाज स्वयं अपनी जल समस्याओं का समाधान निकाल सकता है।”

उन्होंने बताया कि तरुण भारत संघ ने इस प्रक्रिया को अपनाकर हजारों जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया है, जल अधिकारों की लड़ाई लड़ी है और लाखों लोगों को पानीदार, समझदार और स्वावलंबी बनाया है। “पानी पंचायत” पुस्तक के पाँच अध्यायों में जल संरक्षण का संपूर्ण मॉडल प्रस्‍तुत किया गया है।  इस पुस्तक में पाँच अध्याय हैं, जो जल संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं: पहला अध्याय – पानी पंचायत की अवधारणा, पंच परमेश्वर की भूमिका और जल संरक्षण के भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित है। दूसरा अध्याय – जल संकट, प्रदूषण, अनियंत्रित विकास, विस्थापन और भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से समाधान के प्रयासों पर केंद्रित है। तीसरा अध्याय – गंगा-यमुना नदी सत्याग्रह, जल बिरादरी और सामुदायिक जलाधिकार की लड़ाई की सफलताओं को दर्शाता है। चौथा अध्याय – सरकार और संयुक्त राष्ट्र की नीतियों को जनहितैषी और पर्यावरण अनुकूल बनाने के संघर्षों को विस्तार से प्रस्तुत करता है। पाँचवाँ अध्याय – तरुण भारत संघ के कार्यों को विश्व स्तर पर अपनाने, सुखाड़-बाढ़ आयोग के निष्कर्षों और जल बाजारीकरण के विरुद्ध संघर्ष की चर्चा करता है।

जल संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध लोगों को सम्मानित किया गया

कार्यक्रम के अंतिम सत्र में तरुण भारत संघ के कार्यकर्ताओं, बुंदेलखंड की जल सहेलियों और चंबल, धौलपुर, करौली, नूह-मेवात जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों के जल योद्धाओं को “जल नायक सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर डॉ. इंदिरा खुराना द्वारा लिखित पुस्तक “Climate Resilient Socioeconomic Growth through Water Conservation” का भी विमोचन उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री  भगत सिंह कोश्यारी  ने किया।

इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य व्यक्तियों ने अपने विचार व्यक्त किए। इनमें प्रो. अशोक कुमार, डॉ. जी. अशोक कुमार (आईएएस), डॉ. आर. विश्वास, प्रेमनिवास शर्मा, संजय सिंह, रमेश शर्मा, डॉ. वी.एन. मिश्रा, कृष्ण गांधी, इलांगो, ईश्वरचंद्र, अरविंद कुशवाहा, प्रो. पी.के. सिंह, प्रो. वी.के. विजय, श्रीमती शोभा विजेंद्र, दीपक परवतियार, अनिल साठे, डॉ. हिमांशु सिंह, संजय राणा, मुकेश एंगल, अनिल शर्मा, अजय तिवारी, नेहपाल सिंह, राजा रंजन, राहुल सिंह, रणवीर सिंह, छोटेलाल मीणा और पारस प्रताप सिंह प्रमुख रहे।

यह आयोजन तरुण भारत संघ के 50 वर्षों के ऐतिहासिक योगदान का जश्न मनाने के साथ-साथ जल संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने और नीति-निर्माण में प्रभावी बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। पानी पंचायत” पुस्तक जल संरक्षण की दिशा में व्यवहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है और एक नए जल आंदोलन की प्रेरणा बन सकती है। इस पुस्तक से आम लोग, नीति-निर्माता, जल वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता जल संकट के समाधान के लिए न केवल सीख सकते हैं, बल्कि इसे अपनाकर समाज में सार्थक बदलाव भी ला सकते हैं।

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