ड्रैगन सच में कभी नहीं सुधरेगा. वह भले ही मीठी-मीठी बातें कर ले, मगर उसके दिल में जहर के सिवा कुछ नहीं. कहां तो वह भारत संग बेहतर रिश्ते करने की बात कर रहा था. सीमा विवाद सुलझाने के लिए भारत से हाथ मिलाने की बात कर रहा था, मगर अब उसने अपनी औकात दिखा दी. चीन से भारत का विकास देखा नहीं जा रहा. यही वजह है कि वह तिलमिला उठा है और फिर गीदड़भभकी पर उतर आया है. भारत अपनी सरजमीं पर विकास के काम कर रहा है, मगर मिर्ची चीन को लग रही है. चालबाज चीन ने फिर से भारत की सरजमीं पर अपना हक जताया है. चीन ने जहर उगलते हुए कहा है कि भारत को अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कोई विकास कार्य करने का हक नहीं है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत को उस इलाके में विकास कार्य करने का कोई हक नहीं है, जिसे चीन ‘दक्षिण तिब्बत’ कहता है. चीन का यह बयान रॉयटर्स की उस रिपोर्ट पर आया है, जिसमें भारत के सीमावर्ती राज्य अरुणाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की भारत की योजना का जिक्र है. चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि साउथ तिब्बत चीन का क्षेत्र है
चीनी शोध पोत का मालदीव का दौरा
गौरतलब है कि चीनी शोध पोत जियांग यांग होंग 03 ने मालदीव की यात्रा जनवरी 2024 में की थी। साथ ही बाद में 22 फरवरी को माले में डॉक किया था। यह पोत मालदीव के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के पास था, और बाद में अप्रैल में वापस लौटा। इसको लेकर मालदीव के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि यह पोत स्टॉक की भरपाई और चालक दल के रोटेशन के लिए मालदीव आया था।
मालदीव और चीन के बीच समुद्र संबंधी सहयोग को लेकर एक बड़ी बात सामने आ रही है। जहां शुक्रवार को एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि मालदीव और चीन के बीच हिंद महासागर में मछलियों की गतिविधियों का पता लगाने और समुद्र की रासायनिक और भौतिक जानकारी इकट्ठा करने के लिए समुद्र में मछली एकत्रीकरण उपकरणों (एफएडी) पर उपकरण लगाने को लेकर बातचीत चल रही है। बता दें कि यह चर्चा एक साल से भी ज्यादा समय बाद हो रही है, जब जनवरी 2024 में चीन का शोध पोत, “जियांग यांग होंग 03 मालदीव के जल क्षेत्र में डॉक किया था।

मालदीव के मंत्रालय ने दी जानकारी
मालदीव के मत्स्य पालन और महासागर संसाधन मंत्री अहमद शियाम ने चीन के दूसरे समुद्र विज्ञान संस्थान की एक वरिष्ठ टीम से मुलाकात की थी। बैठक के बाद, मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने पर केंद्रित थी। साथ ही, चीन के अधिकारी मालदीव के पर्यटन और पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के साथ-साथ मौसम विज्ञान विभाग के अधिकारियों से भी मिले थे।
हालांकि, मालदीव सरकार ने इन बैठकों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन एक विश्वसनीय स्रोत ने बताया कि चीन ने मालदीव के जल क्षेत्र में अनुसंधान के लिए उपकरण स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। बताया गया है कि इन उपकरणों का उद्देश्य समुद्र की रासायनिक और भौतिक जानकारी के अलावा मछलियों की गतिविधियों का पता लगाना है।
हालांकि, मालदीव सरकार ने इन बैठकों के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन एक विश्वसनीय स्रोत ने बताया कि चीन ने मालदीव के जल क्षेत्र में अनुसंधान के लिए उपकरण स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। बताया गया है कि इन उपकरणों का उद्देश्य समुद्र की रासायनिक और भौतिक जानकारी के अलावा मछलियों की गतिविधियों का पता लगाना है।
चीनी शोध पोत का मालदीव का दौरा
गौरतलब है कि चीनी शोध पोत जियांग यांग होंग 03 ने मालदीव की यात्रा जनवरी 2024 में की थी। साथ ही बाद में 22 फरवरी को माले में डॉक किया था। यह पोत मालदीव के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के पास था, और बाद में अप्रैल में वापस लौटा। इसको लेकर मालदीव के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि यह पोत स्टॉक की भरपाई और चालक दल के रोटेशन के लिए मालदीव आया था।
चीन कितनी बार झूठ बोलेगा?
झूठ पर झूठ बोलते हुए चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, ‘भारत को वहां विकास कार्य करने का कोई अधिकार नहीं है और चीनी क्षेत्र में भारत जिस अरुणाचल प्रदेश को अपना बताता है, उसकी स्थापना अवैध और अमान्य है.’ रॉयटर्स ने मंगलवार को खबर दी थी कि भारत उत्तर पूर्वी हिमालयी राज्य में 12 जलविद्युत स्टेशनों के निर्माण में तेजी लाने के लिए एक अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रहा है.
भारत का हिस्सा है अरुणाचल
यहां बताना जरूरी है कि यह बात दुनिया जानती है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है, था और हमेशा रहेगा. चीन का कहना है कि यह दक्षिण तिब्बत का हिस्सा है और उसने वहां भारतीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर आपत्ति जताई है. जबकि हकीकत यह है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है. अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन बार-बार जहर उगलता रहता है, ठीक वैसे ही जैसा पाकिस्तान कश्मीर को लेकर उगलता है. भारत ने साफ तौर पर कह चुका है कि चीन की यह कोशिश बेकार है.
पहले मीठी-मीठी बात और अब जहर
यहां समझने की जरूरत है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश को लेकर जहर ऐसे वक्त में उगला है, जह भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से कजाकिस्तान में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने मुलाकात की थी. यहां चीनी विदेश मंत्री ने एस जयशंकर से सीमा पर मुद्दों को सुलझाने के प्रयासों को तेज करने पर सहमति जताई थी. चीन ने वादा किया था कि वह भारत के साथ रिश्ते ठीक रखेगा और सीमा विवाद को सुलझाने में हर संभव कोशिश करेगा, मगर उसका यह ताजा बयान यह दिखाता है कि उसके दांत खाने के कुछ और दिखाने के कुछ और हैं. वह मुंह में राम बगल में छुरी वाली हरकत कर रहा है.




