इंदौर
प्री-मानसून बारिश में ही इस बार शहर में 150 से ज्यादा पेड़ गिर चुके हैं। जबकि पिछले सालों में 30 से 40 पेड़ ही प्री-मानसून में गिरते थे। स्मार्ट सिटी द्वारा शहर में पेड़ों की जियो टैगिंग करवाई गई है। इसके मुताबिक शहर में 4 लाख के लगभग पेड़ हैं। इनमें से 50 फीसदी पेड़ों के आसपास सड़कें बन गई हैं।
तीन कारण पेड़ों के गिरने के
1. एसजीएसआईटीएस के प्रो. संदीप नारुलकर ने बताया सीमेंट सड़कों और पेवर ब्लॉक से पेड़ों का दम घुट रहा है। इससे उनकी जड़ें कमजोर होने लगी हैं।
2. बिजली मेंटेनेंस के दौरान हर साल पेड़ का वही हिस्सा छांटा जाता है, जो बिजली तारों के संपर्क में होता है। इससे दूसरी तरफ पेड़ का झुकाव होने लगता है। तेज हवा और पानी में इसी झुकाव से पेड़ गिर जाते हैं।
3. पर्यावरणविद् सुधींद्र मोहन शर्मा के मुताबिक सीमेंट सड़क बनाने के लिए की गई खुदाई के कारण पेड़ों की जड़ें कमजोर हो जाती हैं। पेड़ों में कीड़े लगने से भी वे कमजोर हो जाते हैं।
1 मीटर के घेरे में सिर्फ मिट्टी और पानी हो
एनजीटी के निर्देश हैं कि जड़ों तक हवा, पानी पहुंचने के लिए एक मीटर के घेरे को खुला रखा जाए, लेकिन इसके उलट पेड़ों के तने पूरी तरह सीमेंट-कांक्रीट से ढंक दिए हैं।
सर्वे कर पेड़ों की जड़ों को सीमेंट, पेवर ब्लॉक से मुक्त कराएंगे
निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने बताया एनजीटी के निर्देशों के अनुसार पेड़ों की जड़ों को सीमेंट और पेवर ब्लॉक से मुक्त करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए सभी जोन स्तर पर सर्वे होगा फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी।





