इंदौर
मौसम में बदलाव का असर दुग्ध उत्पादन पर हुआ है। जून तक यही स्थिति बनी रहेगी। हालत यह है कि पिछले 20 दिन से इंदौर दुग्ध संघ (सांची) को मिलने वाले दूध की मात्रा प्रतिदिन 3.50 लाख लीटर से घटकर करीब 3.20 से 3.25 लाख लीटर रह गई है। अप्रैल से जैसे-जैसे तापमान में इजाफा होगा, दूध के उत्पादन में और कमी आएगी। हरे चारे की कमी के साथ ही गर्मी के कारण गाय-भैंस कम दूध देते हैं।
हर दिन उपभोक्ताओं की पूर्ति के लिए सांची को कुछ दूध (करीब 25 से 30 हजार लीटर) उज्जैन दुग्ध संघ से लेना पड़ रहा है। सांची से फिलहाल करीब 3 लाख लीटर दूध की बिक्री होती है, जबकि करीब 50 हजार लीटर दूध के अन्य उत्पाद (दही, घी, पेड़े, लस्सी आदि) का निर्माण किया जाता है।
- 1700 – समितियां जुड़ी हैं सांची से
- 55 – हजार दूध उत्पादक रजिस्टर्ड
- 3.50 – लाख लीटर दूध प्रतिदिन आता है सांची में सामान्य दिनों में
- 03 – लाख लीटर सिर्फ दूध की डिमांड हर दिन संभाग में
- 50 – हजार लीटर के दूध उत्पाद भी बनते हैं
पशु आहार की बढ़ती कीमतें कर रहीं पशुपालकों को परेशान
इंदौर दुग्ध संघ के अध्यक्ष मोतीसिंह पटेल का कहना है कि मौसम के अलावा पशु आहार की बढ़ती कीमतें भी पशुपालकों को परेशान कर रही हैं। कोरोना के बाद से लगातार कीमतें बढ़ी हैं। महंगाई के चलते भी किसानों ने पशुओं की संख्या कम कर दी है। इससे भी उत्पादन में कमी आई है। फिलहाल करीब 3.20 से 3.25 लाख लीटर दूध आ रहा है। जरूरत के मुताबिक उज्जैन दुग्ध संघ से भी दूध लिया जा रहा है। गर्मी बढ़ने पर उत्पादन में और कमी आएगी।
हर दिन संभाग में 14 लाख लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है
पटेल ने बताया सांची में हर दिन फिलहाल 3.20 लाख लीटर दूध आ रहा है, इससे चार गुना अधिक करीब 14 लाख लीटर दूध का उत्पादन इंदौर संभाग में हर दिन हो रहा है। बाकी दूध खुली बंदी एवं दुकानों से बेचा जाता है।
परेशानी यह… तीन साल में 40 फीसदी महंगा हुआ पशु आहार
कोरोना के बाद से पिछले तीन साल में पशु आहार करीब 40 फीसदी तक महंगा हुआ है। संयुक्त किसान मोर्चा के बबलू यादव ने बताया जो भूसा 2020 में 850 रुपए में 100 किलो मिलता था, वह अब 1200 रुपए के पार पहुंच गया है। खली की बोरी 1800 से बढ़कर 2400 रुपए तक पहुंच गई है। चना चूरी, उड़द चूरी और चापड़ की कीमत भी तीन साल में 25 से 40 फीसदी तक बढ़ी है।





