सुसंस्कृति परिहार
हमारे माननीय साहिब जी का हालांकि दुनिया के प्रायः तमाम देशों से उनकी यात्राओं के दौरान पता चला कि सभी देशों से उनका गहरा करीबी रिश्ता है वह भी, जन्म जन्मांतर से लेकिन सबसे सुपर तो यह सत्य सामने आया है कि राहुल गांधी का कश्मीर से जितना ननिहाली नाता है उससे कहीं अधिक उनका गुजरात के भड़ौच से है जहां से उनके दादा हैं।जो बाद में मुंबई आकर पारसी बस्ती में रहे। गांधी गुजरात का सरनेम महात्मा गांधी के कारण जगजाहिर है संभावित है कि गांधी जी के पूर्वज भी फारस देश से यहां आए हों जैसे राहुल गांधी के दादा जहांगीर फरदून गांधी वगैरह वगैरह। दिलचस्प यह है कि पंजाब के खत्रियों में भी गांधी सरनेम मिलता है।यह भी पड़ताल का विषय है।

बहरहाल पिछले दिनों संसद में पी एम साहिब ने एक नासमझी वाला बयान दिया कि राहुल गांधी’ राहुल नेहरू ‘क्यों नहीं लिखते इस बेतुके सवाल की बड़ी धूम रही और इस बहाने उनके दादा फ़ीरोज़ गांधी जिन्हें फ़ीरोज़ ख़ान वा फ़ीरोज़ घांडी या गंधी बताया जा रहा था उसकी असलियत उजागर हो गई। विदित हो संघी और भाजपाई उन्हें इंदिरा नेहरु से शादी के बाद जहां खान कहकर मुसलमान घोषित करते रहे, वहीं रामदेव उन्हें इत्र बेचने वाला गंधी कहते रहे हैं। यह बताया गया कि वे घांडी थे जो आगे चलकर गांधी हो गया। यह भी समझा जाता रहा कि महात्मा गांधी ने उन्हें इंदिरा नेहरु से विवाह के समय यह सरनेम प्रदान किया था तथा उन्होंने फ़ीरोज़ को दत्तक पुत्र माना था। देश में फ़ीरोज़ गांधी को लेकर तरह तरह की बातें होती रही हैं लेकिन इंदिरा जी ने कभी भी या उनके परिवार ने इसका खंडन नहीं किया इसलिए संघी और भाजपाई उनकी छीछालेदार अभी तक करते रहते हैं। गांधी परिवार का बड़प्पन था कि वे ऐसे ऊल-जलूल सवालात के कुचक्र में नहीं फंसे। वे जात पात से दूर इंसानियत के पक्षधर रहे। पंडित जवाहरलाल नेहरू को इन्होंने कश्मीरी मुसलमान बताने की पुरजोर कोशिश की किंतु उसका खुलासा प्रमाणों के आधार पर हो चुका है कि वे कौल कश्मीरी पंडित थे।
बहरहाल बात राहुल गांधी के सरनेम की है वे भला अपने नाना का सरनेम क्यों लगाएं? यह भारतीय परम्परा नहीं है उन्हें नेहरू लगाने की बात कहने वाला यक़ीनन भारतीय संस्कृति से अनभिज्ञ है क्योंकि वह अपनी माता की अन्त्येष्टि के तत्काल बाद घर में सूतक होने के बावजूद वंदेमातरम ट्रेन को झंडी दिखाता,मुंडन भी नहीं कराता है साथ ही साथ अपने साथ सात फेरे लिए पत्नी को इस मातम में आने भी नहीं देता है।जबकि उसके नाम का उपयोग चुनाव फार्म में करता है।
बहरहाल अच्छा हुआ इस बहाने फ़ीरोज़ गांधी के सरनेम की असलियत उजागर हो गई यह अच्छी बात है और लंबे समय से झूठ बोलने वालों के मुंह पर करारा तमाचा है।तो आईए जानते हैं फ़ीरोज़ गांधी के इस सरनेम के बारे में जाने से पहले यह जान लें कि वे कौन थे वे थे सरकारी व कॉरपोरेट भ्रष्टता के विरूद्ध 50 के दशक में ही युद्ध छेडने वाले, डालमिया को expose करने वाले , टाटा जैसे पहुंच वाले व्यापारिक घराने को पारसी हो कर भी expose करने वाले तथा ताजिंदगी ईमानदार रहे सांसद योद्धा को सम्मानजनक पहचान मिलनी ही चाहिये, क्योंकि जो माननीय सुब्रह्मण्यम स्वामी इन वर्षों में कर रहे हैं।वे इंडियन एक्सप्रेस के संपादक तथा दो बार रायबरेली से सांसद भी रहे। कांग्रेसी होकर भी उन्होंने सदन में जनहितैषी बात कर अपने ससुर नेहरु को भी नहीं छोड़ा। यह काम फीरोज गांधी ने मि. क्लीन सरकार यानि नेहरू की सरकार के विरूद्ध 50 के दशक में किया ,देश के वित्तमंत्री तक को इस्तीफा देना पडा था।
फीरोज गांधी का परिवार कड़क पढा लिखा पारसी खानदान था मूलतः भरूच, गुजरात का , जो बाद में बंबई अब मुंबई बसा, फिर पूरा घर पिता के रहते वापिस पुश्तैनी मकान में भरूच आ गया और फीरोज पिता के मरने के बाद इलाहाबाद रहने गये अपनी अविवाहित सगी मौसी शीरीन कोमीस्सारीयत के पास वे इलाहाबाद की जानी मानी डाक्टर और सभी जिलों की मेडीकल इंचार्ज थीं। यहीं रहकर 1930से उन्हों आज़ादीके संग्राम में हिस्सा लिया और नेहरू परिवार से जुड़े। बताया जाता है कि वे तब सात महीने के थे तभी मौसी ने उन्हें गोद ले लिया ।
फीरोज गांधी कोई अकेले बच्चे नहीं थे खानदान के पांच बच्चों में सबसे छोटे थे, दो बडे भाई और दो बहनों के पूरी तरह पारसी खानदान अभी तक बाकी हैं।उनके दो बडे भाई दोराब और फरीदून तथा दो बड़ी बहने तहमीना केर्शाश्प तथा आलू दस्तूर भी थीं। नाम ही बता रहें हैं कि ये विशुद्ध पारसी धार्मिक खानदान है कोई मुसलमान घराना नहीं..!! पारसी धर्म ईरान का प्राचीन धर्म है। ईरान के बाहर मिथरेज्म के रूप में रोमन साम्राज्य और ब्रिटेन के विशाल क्षेत्रों में इसका प्रचार-प्रसार हुआ। इसे आर्यों की एक शाखा माना जाता है। ईरान पर इस्लामी विजय के पश्चात पारसियों को इस्लाम कबूल करना पड़ा तो कुछ पारसी धर्म के लोगों ने अपना गृहदेश छोड़कर भारत में शरण ली। इसलिए गुजरात और मुम्बई में ये मिलते हैं।फ़ीरोज़ गांधी के सरनेम की ताकीद करने की जिज्ञासा हेतु जब हम पारसी सरनेमों में गांधी की पड़ताल वेबसाइट पर करते हैं तो पाते हैं कि गांधी तो पारसी सरनेमों की सूची में प्रमुखता से मिलता है।फिल्मी अदाकार दीना पाठक पहले दीना गांधी पारसी थीं।उनकी बहिन शांता भी पहले गांधी थी। मुंबई में फ़ीरोज़ गांधी और इंदिरा गांधी का उनके घर आना जाना था। राजीव गांधी की पैदाइश बम्बई की ही है। फील्ड मार्शल मानेकशको कौन नहीं जानता।वे पारसी थे। वर्तमान में स्मृति ईरानी भी पारसी हैं।वे हिन्दू हैं तो फ़ीरोज़ ख़ान कैसे?बहरहाल पिछले दिनों जर्मन खोजी पत्रकार बर्टिल फाॅक की पुस्तक ‘फ़ीरोज़ द फारगेटिन गांधी’ पर सामने आई। जो लेखक ने सन् 1977 में जब इंदिरा जी सत्ता से बाहर थी तब भारत आकर इस पर शोध कर लिखी है। इसमें उन्होंने बताया है कि फ़ीरोज़ गांधी जन्म से यानि 12 सितम्बर 1912 से ही गांधी थे। ये बात उनके जन्म प्रमाणपत्र लाकर उन्होंने प्रमाणित कर दी है।उनका जन्म मुंबई की अस्पताल तहमूर नरीमन में हुआ था।जो पारसी की थी जहां उनके पिता का नाम फरदून जहांगीर गांधी भी लिखा हुआ है। वे जाने माने मरीन इंजीनियर थे उनकी मां रत्ती माई थी जो पहले रत्ती कोमीस्सारियत थीं।उनके स्काउट मास्टर केशव देव मालवीय जो इस्पात मंत्री रहे हैं उन्होंने भी लेखक को बताया था कि स्काउट छात्र के दौरान भी उनका सरनेम गांधी ही था।बताते हैं कि फ़ीरोज़ गांधी की हृदयाघात से मौत के बाद उनके साथ पढ़े लालबहादुर शास्त्री जी जब नेहरू जी से मिले तो नेहरू भावुक हो गए थे। उन्होंने शास्त्री जी को भी स्वास्थ्य संबंधी हिदायतें दी थीं।शास्त्री जी फ़ीरोज़ गांधी के साथ जेल में भी रहे। वहां भी उनका नाम फ़ीरोज़ गांधी ही दर्ज है।उस दौर के अख़बार लीडर में उनका नाम फ़ीरोज़ गांधी लिखा गया था। जिसकी प्रति लेखक ने दी है इस पुस्तक में प्रमाणिक तौर पर यह बताया गया है कि फ़ीरोज़ गांधी ही थे मुसलमान,गंधी या घांडी नहीं थे। ये तमाम जानकारी गत दिवस एक वीडियो में अशोक कुमार पाण्डेय ने दी है। जो ज़रूरी और महत्वपूर्ण है।
साथियों, जब से ये प्रमाणिक जानकारी सामने आई है अंध भक्तों और फ़ीरोज़ को अनाप शनाप कहने वालों की बोलती बंद है। सबसे बड़ा संकट तो यह आ गया है राहुल गांधी का खानदानी रिश्ता गुजरात से जुड़ा जहां से महात्मा गांधी को उखाड़ने की कोशिशें जारी हैं।एक नया गांधी उभर रहा है। धन्य है गुजरात की धरती।




