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चुनाव नतीजे बताते हैं कि नीतीश कुमार का ग्राफ लगातार गिर रहा है

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 शिवानंद तिवारी

पूर्व सांसद


: नीतीश कुमार अच्छे से जानते है है वो निरंतर राजनीतिक अवसान पर है और हार रहे है। उपचुनाव में वो कम अंतर से भले ही जीत गए है लेकिन वो जानते है उनकी राजनीतिक किताब के अंतिम पन्नों पर हार ही हार लिखी है। तेजस्वी यादव जानते है कि वो हार कर भी जीत गए है। वो इस खेल की विधा को अच्छे से समझ सिंगल-डबल्स के साथ-साथ ज़रूरत अनुसार चौके-छक्के भी मार रहे है और अपनी बाउन्सर, गुगली, स्पिन और गति से सत्ताधारियों को क्लीन बोल्ड भी कर रहे है।

Nitish Kumar upset over NITI Aayog report, asks why compare Bihar with  Maharashtra? - India News


नीतीश कुमार के साथ भाजपा, वीआईपी, हम, लोजपा(पशुपति पारस) सहित पाँच सत्ताधारी पार्टियों के गठबंधन के अलावा सारा प्रशासनिक अमला, यंत्र-तंत्र, धन बल, बाहुबल, छल बल था। मतलब पाँच पार्टियाँ और उम्मीदवार भी ऐसे कुख्यात ढूँढे गए जिन पर बम बनाने, फोड़ने, अपहरण, हत्या से लेकर एक से एक संगीन आपराधिक मामले दर्ज है। नैरटिव ऐसा गढ़ा गया कि राजद आक्रामक है जबकि राजद के प्रत्याशियों पर एक भी केस नहीं है।
इन सबों के विरुद्ध राजद और तेजस्वी यादव लड़ रहे थे। जीत तो जीत होती है। अब आँकड़ो के ज़रिये देखिए कि तेजस्वी यादव अकेले कैसे बढ़त बनाए हुए है।
एक वर्ष पूर्व संपन्न विधानसभा चुनाव में कुशेश्वरस्थान से गठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी को 34% मत प्राप्त हुए थे जबकि इस बार अकेले राजद के प्रत्याशी को 36% मत प्राप्त हुए। 
वहीं तारापुर विधानसभा से विगत चुनाव में गठबंधन के राजद प्रत्याशी को 32% मत प्राप्त हुए थे जबकि इस बार अकेले राजद को 44.35% मत प्राप्त हुए है जो कि नीतीश कुमार के पाँच पार्टियों के गठबंधन से 2% कम है। 
दोनों विधानसभा सीटों के उपचुनाव में औसतन राजद को 40% और पाँच पार्टियों के एनडीए गठबंधन को 46% मत प्राप्त हुए है। इस औसतन प्राप्त 40% मतों में सभी का मत है अर्थात् राजद के जनाधार में निरंतर वृद्धि हो रही है। एक बात याद रखे कोई भी जनाधार ना एक दिन में खिसकता है और ना ही पुन: प्राप्त होता है। यह एक टाइम टेकिंग प्रॉसेस है।
राजद ने अधिकांश राउंड में बढ़त बनाई रखी। यह दर्शाता है कि मिश्रित वोट मिला है। वह भी जब राजद के मजबूत बूथों पर प्रशासन द्वारा मतदाताओं को प्रताड़ित किया गया, डर का माहौल पैदा करने के लिए राजद के मज़बूत कार्यकर्ताओं को मतदान पूर्व पुलिस द्वारा फ़र्ज़ी मामलों में उठा लिया गया, इन बूथों पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में धीमी वोटिंग करायी गयी और जेडीयू के मज़बूत बूथों पर खुली छूट दी गयी। कोई कैमरा नहीं था। जदयू के मज़बूत बूथों पर मिले मत इसको प्रमाणित करते है।
लोग जनाधार और ताकत की बात करते है तो बताइए:-
* बिहार में तेजस्वी के अलावा कौन सी पार्टी अकेले अपने दम पर औसतन 40% प्राप्त कर सकती है?* क्या “अकेले” नीतीश कुमार 11-12% से अधिक मत प्राप्त कर सकते है? * विगत चुनाव में जेडीयू चार पार्टियों के गठबंधन में शायद 122 सीट पर लड़ी थी और महज़ 15.4% वोट प्राप्त किए थे।
और हाँ! 2009 के नए परिसीमन में बनी कुशेश्वरस्थान सीट पर राजद ने अपने सिम्बल से आज तक चुनाव ही नहीं लड़ा था। उससे पूर्व में वहाँ सहयोगी दल ही चुनाव लड़ते थे।
तारापुर और कुशेश्वरस्थान परंपरागत रूप से जेडीयू की मज़बूत सीट रही है और विगत 16 वर्षों से जेडीयू के ही विधायक रहे है लेकिन इस बार तेजस्वी यादव ने 17 दिन लगातार दिन-रात गाँव-गाँव घूम कर संपूर्ण बिहार सरकार के  अलावा आरएसएस, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, गठबंधन सहयोगियों, और जातीय नेताओं को घर-घर टिकने पर मजबूर कर दिया। साड़ी, पैसा तथा राशन बाँटने के अलावा पक्षपाती अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति संबंधित वायरल वीडियो तो आप सबने देखें ही होंगे। तेजस्वी ने अकेले सरकार को नचाया है।

Ramswaroop Mantri

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