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*धर्मांधता और जाति व्यवस्था का उन्मूलन सबसे बड़ी चुनौती- मेधा पाटकर*

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*मधु दंडवते जन्म शताब्दी समारोह का इंदौर में हुआ आयोजन*

 *कार्यक्रम में समाजवादी- वामपंथी एकजुटता की गूंज*

इंदौर :धर्मांधता और जाति व्यवस्था का उन्मूलन हमारे समक्ष सबसे बड़ी चुनौती है, जिसके लिए मधु जी आजीवन प्रयासरत रहे। उन्होंने सदा गैर बराबरी का विरोध किया। इंदौर में आयोजित जन्म शताब्दी समारोह में बोलते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने उक्त विचार व्यक्त किया। सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि मधु दंडवते जी ने 25 वर्ष बाबा साहब अंबेडकर के सिद्धार्थ महाविद्यालय में अध्यापन किया, यह सभी जानते हैं परंतु मुझे लगता है कि वे आजीवन देश के नागरिकों को जागरूक करने के लिए अंतिम सांस तक अध्यापक बने रहे।

 उन्होंने कहा कि  भूमिहीनों, बटाईदारों को न्याय दिलाने, प्राकृतिक संसाधनों की लूट और भूमि हड़पने की साजिश के खिलाफ उन्होंने शाश्वत विकास की अवधारणा स्थापित करने सतत संघर्ष किया। नर्मदा बचाओ आंदोलन के अनेक आंदोलनों में वे शामिल हुए तथा जेल तक गए। मधु जी विकेंद्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार की गारंटी हेतु सदा संघर्षरत रहे।

 स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, गोवा मुक्ति आंदोलन के नेता, समाजवादी चिंतक, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं योजना आयोग के उपाध्यक्ष रहे  प्रो मधु दंडवते जन्म शताब्दी समारोह, इंदौर के अभिनव कला समाज सभागार, गांधी हाल में वरिष्ठ समाजवादी नेता रामबाबू अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।

 जन्म शताब्दी समारोह समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि मैंने अपने जीवन में मधु दंडवते जी से अधिक ईमानदारी, सादगी और समाजवादी सिद्धांतों के साथ सरलता से अपना जीवन जीने वाला कोई दूसरा व्यक्ति नहीं देखा। उन्होंने कभी पार्टी नहीं बदली।

  अरुण श्रीवास्तव ने 21 जनवरी 2024 को मुंबई के यशवंत राव चौहान हाल में आयोजित होने वाले मधु दंडवते जन्म शताब्दी समारोह समापन कार्यक्रम में सभी समाजवादियों से बढ़-चढ़कर भागीदारी करने की अपील की।

 समाजवादी चिंतक डॉ सुनीलम ने बताया कि आगामी 20 सितंबर को रायपुर में, 21 सितंबर को रीवा में भी इंदौर की तरह मधु दंडवते जन्मशताब्दी के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है।

डॉ सुनीलम ने  मधु दंडवते जी के जीवन के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि मधु जी ने 26 जनवरी 1937 को अहमदनगर स्थित अपने स्कूल में तिरंगा फहराया था। 1942 के ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन’ में भूमिगत रहकर सक्रिय योगदान किया था ।  

 समाजवादी चिंतक  अनिल  त्रिवेदी  ने कहा कि हमारे समाजवादी पुरखों ने जो पराक्रम दिखाए, केवल उनका प्रचार करने से समाज में परिवर्तन नहीं आएगा। इसके लिए हमें धैर्यपूर्वक संगठित होकर कार्य करना होगा, बाजार के वर्चस्व पर अंकुश लगाने के लिए संघर्ष करना होगा।

 इंदौर के वरिष्ठ समाजवादी सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि मधु दंडवते केवल समाजवादी ही नहीं  थे, उन पर सभी राजनीतिक दल गर्व कर सकते हैं क्योंकि उनका जीवन नैतिकता के मूल्यों से सराबोर, अनुकरणीय एवं प्रेरणादाई था।

 वामपंथी नेता विजय दलाल ने वर्तमान  तानाशाही पूर्ण सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए समाजवादी- वामपंथी एकजुटता की आवश्यकता बतलाई।

वरिष्ठ समाजवादी रामबाबू अग्रवाल ने अध्यक्षीय भाषण में इंदौर में मधु दंडवते जी के अनेक कार्यक्रमों की जानकारी रखते हुए युवाओं को समाजवादी विचार से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास की जरूरत बतलाई।

समाजवादी विचारक अंजुम पारिख ने कहा कि आज जो देश की परिस्थितियां है उनके मुकाबले के लिए सम विचार के लोगों को एकजूट होकर संघर्ष करने की जरूरत है ।

मधु दंडावते जन्म शताब्दी समारोह समिति मध्य प्रदेश के अध्यक्ष 

रामस्वरूप मंत्री ने कहा कि हमारे इंदौर में हमेशा से कोशिश रही है कि वामपंथी समाजवादी कार्यकर्ता एकजूट हो और अन्याय के खिलाफ सतत संघर्ष करें।संघर्ष से ही हमने हर तानाशाही को पराजित किया है और वर्तमान दौर से भी जनता को निकालेंगे ।

 कार्यक्रम के दौरान जननायक कर्पूरी ठाकुर जन्म शताब्दी समारोह समिति का गठन कर इंदौर मे कर्पूरी ठाकुर को लेकर कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

 प्रमोद नामदेव ने क्रांति गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम को वरिष्ठ गांधीवादी अनिल त्रिवेदी, झाबुआ से आए क्रांति कुमार वैद्य सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। सेंचुरी जनता श्रमिक संघ के नेता श्री मिश्रा ने क्रांति गीत प्रस्तुत किया

कार्यक्रम का आयोजन एवं संचालन मधु दंडवते जनशताब्दी समारोह समिति के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष एवं सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रामस्वरूप मंत्री द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन अशफाक हुसैन ने दिया।

कार्यक्रम में पुष्पेंद्र राजपूत, जितेश शाह, मिर्जा शमीम बेग,  जितेंद्र पाटीदार, बबलू जाधव, शैलेंद्र पटेल, रुद्रपाल यादव, अरविंद पोरवाल, अशोक दुबे, शरद कटारिया, जयप्रकाश गुगरी, सोनू शर्मा, विवेक कुमार, डॉ प्रवीण मल्होत्रा, प्रमोद बागड़ी, हरनाम सिंह, आलोक खरे, मिलिंद रावल, माया जोशी , लाखन सिंह डाबी, प्रकाश पाठक, अथर्व शिंदे, धर्मेंद्र तिवारी, मुकेश चौधरी, सुषमा यादव, कमलेश परमार, लीलाधर चौधरी, मनोज हडिया, कैलाश यादव सहित बड़ी संख्या में वामपंथी समाजवादी कार्यकर्ता और शहर के प्रबुद्ध जन शामिल हुए ।

Ramswaroop Mantri

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