मुंबई/दिल्ली/लखनऊ : 9 अगस्त 1942 की ऐतिहासिक अगस्त क्रांति की 83वीं वर्षगांठ पर देशभर में शहीदों और आंदोलन के नायक -नायिकाओं को याद किया जा रहा है, लेकिन इस बार मुंबई और दिल्ली में परंपरागत मौन जुलूस की अनुमति नहीं दी गई है। 101 वर्षीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ जी.जी. परीख, जो 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में विद्यार्थी के रूप में जेल गए थे, ने कहा, “आज का समय अंग्रेज़ों के दौर से भी कठिन है। सत्ता में बैठे लोग धर्म के आधार पर हिटलर जैसी राजनीति कर रहे हैं।”

संयुक्त किसान मोर्चा ने आज़ादी के आंदोलन से प्रेरणा लेते हुए ‘बहुराष्ट्रीय कंपनियों भारत छोड़ो, कार्पोरेट कृषि क्षेत्र छोड़ो’ अभियान की घोषणा की है, और 13 अगस्त को मोदी-ट्रंप के पुतले जलाने का ऐलान किया है। इतिहासकार बताते हैं कि अगस्त क्रांति भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा जन आंदोलन था। जिसमें 50 हज़ार लोग शहीद हुए और 1 लाख से अधिक को सजा दी गई। गांधीजी ने यूसुफ मेहरअली के सुझाव पर “Quit India” का नारा दिया था, और जनता ने बिना हथियार, लेकिन पूरी ताकत के साथ अंग्रेज़ी हुकूमत को चुनौती दी थी।
हर साल 9 अगस्त को मुंबई के चौपाटी से अगस्त क्रांति मैदान तक पैदल मार्च

डॉ. परीख हर साल 9 अगस्त को मुंबई के चौपाटी से अगस्त क्रांति मैदान तक पैदल मार्च करते हैं, लेकिन इस बार महाराष्ट्र पुलिस ने आदेश जारी कर पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी है,और उल्लंघन पर एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी दी है।=दिल्ली में भी दशकों से प्रो. राजकुमार जैन के नेतृत्व में होने वाला राजघाट से आचार्य नरेंद्र देव मूर्ति तक का जुलूस इस बार रोक दिया गया है।
अगस्त क्रांति का लक्ष्य किसानों और मजदूरों की मुक्ति : डॉ. सुनीलम
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम का कहना है कि “अगस्त क्रांति का लक्ष्य किसानों और मजदूरों की मुक्ति था, जो आज भी अधूरा है। हमें शहीदों के सपनों को पूरा करने का संकल्प लेना होगा।”
भारत छोड़ो से कॉरपोरेट छोड़ो तक- संघर्ष की नई विरासत
9 अगस्त सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि भारत की आज़ादी की धड़कन है। 1942 में जिसने लाखों आम लोगों को अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ खड़ा कर दिया, वही जज़्बा आज किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई में दिख रहा है लेकिन फर्क ये है कि तब विदेशी हुकूमत थी, आज देश के भीतर ही ऐसे आर्थिक -राजनीतिक गठजोड़ खड़े हो गए हैं, जो किसानों, मजदूरों और आम जनता के अधिकारों पर हमला कर रहे हैं।





