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आपदा में भी फार्मा कंपनियों ने ढूंढ़ लिया अवसर:होलसेल रेट से 10 गुना एमआरपी …और रोजाना लुट रहे लाखों मरीज

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इंदौर/नई दिल्ली

कोरोना काल में लोग जब अपनी सांसें और ऑक्सीजन लेवल गिन रहे थे, तब फार्मा कंपनियों ने जमकर मुनाफा कमाया। दवाओं पर एमआरपी होलसेल रेट से 10 गुना ज्यादा तक वसूली गई। जैसे कोविड में रेमडेसिवर इंजेक्शन का खूब इस्तेमाल हुआ। हेट्रो कंपनी के 1 इंजेक्शन की एमआरपी 5,400 और होलसेल कीमत 1,900 थी। इसके 6 इंजेक्शन 32,400 रुपए में पड़े।

वहीं 800 एमआरपी वाले कैडिला के 6 इंजेक्शन के पूरे कोर्स की कीमत महज 4,800 रुपए थी। यानी एक ही दवा के दाम में 27,600 का अंतर। दवाओं के होलसेल और एमआरपी रेट के अंतर की इसी लूट पर रिपोर्ट…
बड़ा सवाल… एक ही दवा को बनाने की लागत एकसमान तो उसके दाम अलग-अलग क्यों हों?

कंपनियां क्यों डलवाती हैं मनमानी एमआरपी?
पीएम जनऔषधि केंद्र को दवा सप्लाई करने वाले एक कंपनी के मालिक अनैतिक मुनाफाखोरी की पुष्टि करते हैं। वे सवाल करते हैं, ‘हम औषधि केंद्र और कंपनियों दोनों को एक भाव पर दवा देते हैं। लेकिन, कंपनियां मनमानी एमआरपी डलवाती हैं और कई गुना महंगे भाव पर बेचती हैं। ऐसा क्यों?

जनऔषधि केंद्र पर एमआरपी अधिक क्यों?
मेडिकल एक्टिविस्ट डॉ. पीयूष जोशी सवाल करते हैं, ‘देश में खुले 8,000 से अधिक जनऔषधि केंद्र जब 20-80% तक छूट देने का दावा करते हैं तो उनकी दवाओं पर भी इतनी ज्यादा एमआरपी क्यों है? असली कीमत क्यों नहीं? मतलब साफ है कि यहां भी दवा माफिया की घुसपैठ हो चुकी है।’

Ramswaroop Mantri

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