ये नज्म AMU के नाम है, ये नज्म JNU के नाम है, ये नज्म दिल्ली के नाम, UP के नाम, जामीया के नाम है
ये नज्म उन तमाम जगहो के नाम पे है
जहाँ रात के अंधेरे मे जुल्म ढाया गया
कायरो और बुजदिलो के द्वारा
के सब याद रखा जायेगा
सब याद रखा जायेगा
सब कुछ याद रखा जायेगा
तुम्हारे लाठीयों और गोलियों से जो कत्ल हुए है
मेरे यार सब
उनकी याद मे दिलों को
बरबाद रखा जायेगा
सब याद रखा जायेगा
तुम स्याहियों से झूठ लिखोगे हमें मालूम है
हो हमारे खून से ही हो सही, सच जरूर लिखा जाएगा
सब याद रखा जाएगा
मोबाइल, टेलीफोन, इंटरनेट भरी दोपहर में बंद करके
सर्द अंधेरी रात में पूरे शहर को नजरबंद करके
हथौड़ियां लेकर दफअतन मेरे घर में घुस आना
मेरा सर बदन मेरी मुख्तसर सी जिंदगी को तोड़ जाना
मेरे लख्त-ए-जिगर को बीच में चौराहे पर मार कर
यूं बेअंदाज खड़े होकर झुंड में तुम्हारा मुस्कुराना
सब याद रखा जाएगा
सब कुछ याद रखा जाएगा
दिन में मीठी-मीठी बातें करना सामने से
सब कुछ ठीक है हर जुबां में तुतलाना
रात होते ही हक मांग रहे लोगों पर लाठियां चलाना, गोलियां चलाना
हम ही पर हमला करके हम ही को हमलावर बताना
सब याद रखा जाएगा
मैं अपनी हड्डियों पर लिखकर रखूंगा ये सारे वारदात
तुम जो मांगते हो मुझसे मेरे होने के कागजात
अपनी हस्ती का तुमको सबूत जरूर दिया जाएगा
ये जंग तुम्हारी आखिरी सांस तक लड़ा जाएगा
सब याद रखा जाएगा
ये भी याद रखा जाएगा कि किस किस तरह तुमने वतन को तोड़ने की साजिशें की
ये भी याद रखा जाएगा कि किस किस जतन से हमने वतन को जोड़ने की ख्वाहिशें की
जब कभी भी जिक्र आएगा जहां में दौर-ए-बुजदिली का तुम्हारा काम याद रखा जाएगा
जब कभी भी जिक्र आएगा जहां में तौर-ए-जिंदगी का हमारा नाम याद रखा जाएगा
कि कुछ लोग थे जिनके इरादे टूटे नहीं थे लोहे की हथौड़ियों से
कि कुछ लोग थे जिनके जमीर बिके नहीं थे इजारदारों की कौड़ियों से
कि कुछ लोग थे जो टिके रहे थे तूफान-ए-नू के गुजर जाने के बाद तक
कि कुछ लोग थे जो जिंदा रहे थे अपने मौत की खबर आने के बाद तक
भले भूल जाए पलक आंखों को मूंदना
भले भूले जमीं अपनी धूरी पर घूमना
हमारे कटे परों की परवाज को
हमारे फटे गले की आवाज को
याद रखा जाएगा
तुम रात लिखो, हम चांद लिखेंगे
तुम जेल में डालो, हम दीवार फांद लिखेंगे
तुम FIR लिखो, हम तैयार लिखेंगे
तुम हमें कत्ल कर दो, हम बनके भूत लिखेंगे, तुम्हारी कत्ल के सारे सबूत लिखेंगे
तुम अदालतों से बैठकर चुटकुले लिखो
हम सड़कों, दीवारों पर इंसाफ लिखेंगे
बहरे भी सुन लें, इतनी जोर से बोलेंगे
अंधे भी पढ़ लें, इतना साफ लिखेंगे
तुम काला कमल लिखो
हम लाल गुलाब लिखेंगे
तुम जमीं पर जुल्म लिख दो
आसमां पर, इंकलाब, लिखा जाएगा
सब याद रखा जाएगा
सब कुछ याद रखा जाएगा
सब कुछ याद रखा जाएगा





