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फौजी मेले में एयरफोर्स प्लेन उड़ाने का अनुभव : भोपाल में लगी एग्जीबिशन में बहुत कुछ स्पेशल

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भोपाल

भोपाल में आज से ‘फौजी मेला शस्त्र प्रदर्शनी’ की शुरुआत हो गई है। MVM ग्राउंड में लगा यह मेला तीन दिन चलेगा। एंट्री फ्री है। सुबह 9.30 बजे से शाम 7 बजे तक इस मेले में भारत की तीनों सेनाओं थल, जल और वायु सेना के फाइटर प्लेन, टैंक, मिसाइल, गन्स और मॉडर्न टेक्नीक के इक्विपमेंट्स देख सकेंगे।

इंडियन एयरफोर्स ने यहां हाईटेक बस खड़ी की है। इसके अंदर आप मालवाहक प्लेन और कमर्शियल हेलीकॉप्टर उड़ाने का एक्सपीरियंस ले सकते हैं। यह वीडियो गेम की तरह है।

इंडियन एयरफोर्स ने एक बस खड़ी की है। इसमें प्लेन और हेलीकॉप्टर उड़ाने का एक्सपीरियंस लिया जा सकता है। प्रदर्शनी में और भी बहुत कुछ खास है।

LSV (लाइट स्ट्राइक व्हीकल)

यह एक हाईटेक टेक्नीक का व्हीकल है। इसे 2019 में भारतीय सेना में मारुति जिप्सी के बदले में लाया गया था। इस व्हीकल में 2.2 लीटर का इंजन है। 750 किलो वजन ला और ले जा सकता है। 4.3 टन की रिकवरी मशीन फेसिलिटी है। 130 किमी/घंटे की स्पीड है। पहाड़ी और रेगिस्तानी इलाकों में चलने के लिए फिट है।

कम्युनिकेशन रोवर

यह व्हीकल जिप्सी में तैयार किया गया है। लड़ाई के ऑर्डर और कंट्रोल के लिए इसे कम्युनिकेशन कंट्रोल स्टेशन के तौर पर यूज किया जाता है। इस व्हीकल में रेडियो सेट लगे होते हैं, जो हाई फ्रीक्वेंसी और वेरी हाई फ्रीक्वेंसी में कम्युनिकेशन के लिए काम आते हैं। रोवर की पहुंच को आसान बनाने के लिए फ्यूल की खपत को कम करने के लिए मॉडिफिकेशन किए गए हैं।

रिकॉन्नेइसैंस व्हीकल का यूज फॉरवर्ड लोकेशन के सर्वे के लिए किया जाता है।

रिकॉन्नेइसैंस व्हीकल

यह एक सर्वे व्हीकल है। इसका इस्तेमाल सैन्य स्काउट व्हीकल के तौर पर किया जाता है। फॉरवर्ड लोकेशन के सर्वे के लिए यूज होता है। बिना लड़ाई लडे़ इस व्हीकल से सर्वे किया जाता है। छोटी टोली के साथ इस व्हीकल से दुश्मन के इलाके की एक्टिविटी का पता लगाया जा सकता है। इसमें सामान्य हथियार रहते हैं, क्योंकि इसका यूज लड़ाई के बजाय सर्वे के लिए ही किया जाता है।

एक्सटेंडेड माइन पलोह (EMP) को टी-90 टैंक में फिट किया गया है।

एक्सटेंडेड माइन पलोह (EMP)

यह इंस्ट्रूमेंट टी-90 टैंक में फिट किया जाता है। दुश्मन द्वारा लगाए गए लैंड माइन्स इस पलोह की लाइन में आते हैं, तो यह उन्हें खोदकर साइड में कर देता है। क्रॉस कंट्री में इसको आसानी से एक जगह से दूसरी जगह पर ले जा सकते हैं। EMP को इलेक्ट्रिकली और लिक्विड फ्यूल के प्रेशर से चला सकते हैं। वजन 2400 किलो होता है। इसकी माउंटिंग में 90 मिनट लगते हैं। EMP के फिट होने पर टैंक की स्पीड 14 किलोमीटर प्रति घंटा और काम करने के दौरान 6 से 8 किलोमीटर प्रति घंटा होती है।

अर्जुन MK1 इसरो के लड़ाकू अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान द्वारा डेवलप युद्धक टैंक है।

अर्जुन MK1

अर्जुन MK1 भारतीय सेना के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के लड़ाकू वाहन अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (CVRDE) द्वारा विकसित तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक है। टैंक का नाम धनुर्धर राजकुमार अर्जुन के नाम पर रखा गया है। इसकी डिजाइन का काम 1986 में शुरू हुआ और 1996 में खत्म हुआ। अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक ने 2004 में भारतीय सेना के साथ सेवा में प्रवेश किया। 2009 में गठित 43वीं आर्मर्ड रेजिमेंट अर्जुन को हासिल होने वाली पहली रेजिमेंट थी।

BMP 2

यह इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल के रूप में भी जाना जाता है। न्यू टेक्नीक के हथियारों से लैस है। युद्ध के मैदानों में 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। ईजी स्टीयरिंग कैपेसिटी है। BMP 2 पानी पर भी 7 किमी/घंटे की रफ्तार से चल सकता है। 35 डिग्री तक की ढलानों पर जा सकता है। रैपिड फायर के लिए इसमें 7.62 एमएम मशीन गन, 30 एमएम तोप, सेकंड जनरेशन की होमिंग टाइप एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल होती है। नाइट विजन भी है।

स्ट्रेला 10

रूसी मूल की हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। इसका नाटो नाम ‘गोफर’ है और इसे ‘सैम-13’ भी कहा जाता है। यह विजन से टारगेटेड है और ऑप्टिकल, इंफ्रा रेड गाइडेंस का उपयोग करता है। इस टेक्नीक का यूज मुख्य रूप से कम ऊंचाई वाले खतरों जैसे हेलीकॉप्टर को तबाह करने के लिए किया जाता है। यह सिस्टम चलते हुए भी टारगेट को हासिल करने में सक्षम है। यह रडार सिग्नल नहीं देता है और सुरक्षा बलों को प्रभावी एयर सिक्योरिटी प्रदान करता है। यह हथियार प्रणाली अचानक दिखाई देने वाले लक्ष्य को बरबाद करने में सक्षम है।

OSA AK कॉम्बेट व्हीकल जमीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम है।

OSA AK कॉम्बेट व्हीकल

यह सोवियत मूल का एक बहुत ही शक्तिशाली जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली से लैस है। इसका नाटो रिपोर्टिंग नाम ‘गेको’ है और इसे ‘सैम-8’ के नाम से भी जाना जाता है। यह सभी मौसम में, ऑटोमेटिक, कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम है। ड्रोन और हेलीकॉप्टर को मार गिराने में सक्षम है। इसे सुरक्षा बलों को अधिकतम 10 किमी की सीमा तक वायु रक्षा प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

SCHILKA सिस्टम छोटी और लंबी दूरी पर एयर टारगेट के खिलाफ प्रभावी प्रणाली है।

SCHILKA

इसी जमीनी बल की रक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। SCHILKA सिस्टम छोटी और लंबी दूरी पर एयर टारगेट के खिलाफ अत्यधिक प्रभावी और कम लागत वाली प्रणाली है। SCHILKA हथियार किसी भी स्पीडिंग टारगेट को मार गिरा सकता है। जहाज पर अत्याधुनिक 3D सेंसर के साथ SCHILKA किसी भी फायर यूनिट को युद्ध के मैदानों और हवाई हमलों के खिलाफ सशस्त्र वाहनों में अत्यधिक घातक तत्व में बदल देता है।

तुंगुस्का वेपन व्हीकल विमान भेदी मिसाइल प्रणाली से लैस है। इसमें सतह से हवा में मारने वाली गन लगी हुई है। इसकी रेंज 18 किलोमीटर है।

तुंगुस्का वेपन व्हीकल

तुंगुस्का सेल्फ ड्राइव विमान भेदी मिसाइल प्रणाली और सतह से हवा में मारने वाली गन से लैस है। यह रूस निर्मित मल्टी गन दो रडारों पर आधारित है। इसकी तरंगों की रेंज 16 से 18 किलोमीटर है। इसे सभी मौसमों, दिन और रात में कम उड़ान वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों और क्रूज मिसाइलों से अपनी पैदल सेना और टैंक को संरक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य हथियार मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता 8 किलोमीटर तक है। इसके साथ दो 30 एमएम कैलिबर गन भी हैं। गन सिस्टम में 4 बैरल हैं। मारक क्षमता 200 से 4000 मीटर है, जो प्रति मिनट 4000 से 5000 राउंड फायर करती है।

3D टैक्टिकल कंट्रोल रडार-3

3D टैक्टिकल कंट्रोल रडार-3

यह एक एक स्टैंड अलोन माध्यम रेंज रडार है, जो हवाई लक्ष्यों का पता लगाने और पहचान करने के लिए सभी मौसम में निगरानी और टारगेट डेटा रिसीवर (टीडीआर) के लिए प्रासंगिक डेटा का प्रसारण करता है। यह रडार एयर टारगेट के ट्रैक वाइल स्कैन (टीडब्ल्यूएस) के लिए सक्षम है। इसमें डिजिटल रिसीवर, प्रोग्रामेबल सिग्नल प्रोसेसर जैसी उन्नत प्रौद्योगिकियां हैं, जो हाई रिजॉल्यूशन, सटीकता, प्रतिक्रिया और सूचना की उपलब्धता प्रदान करती है।

रडार एएलएम 2140

रडार एएलएम 2140

रडार ELM 2140 MR एक मिडियम रेन्ज बैटलफील्ड निगरानी रडार (BFSR MR) है, जो कि ग्राउंड और कम उड़ान वाले टारगेट को डिटैक्ट करता है और इसके साथ-साथ DOOAF की काबिलियत रखता है। ये लाइट वेट और पार्टवल है, जिसके कारण इसे आसानी से और कम समय में एक जगह से दूसरी जगह तैनात कर सकते हैं। ये रडार एक पल्स डॉप्लर रडार है और दिन और रात, खराब मौसम के अंदर काम करने की काबिलियत रखता है। रेतीले इलाके में टारगेट को पता लगाने के लिए इसे क्लीयर दृष्टि रेखा की आवश्यकता होती है। इसको यूनिट के दो ऑप्रेटर कैरी करके दस मिनट में तैनात कर सकते हैं।

CDSP

CDSP

भविष्य के लिए तैयार सीडीएसपी कमांडरों को तेजी से और विश्वसनीय निर्णय लेने में मददगार है। अपनी खुद की शक्ति के साथ एक भारी गतिशील वाहन, यह पहले के 5 वाहनों की कार्यक्षमता को कम करता है, जिससे फुट प्रिंट कम हो जाता है। एकल वाहन ENTITY, MIN COMNCEN, COMN QRT जैसे विविध काम करने में सक्षम है। सुरक्षित आवाज, वीडियो और डेटा का विश्लेषण करता है। यह मल्टीपरपज हाई स्पीड मोबाइल आर्मी डेटा के लिए एक 4जी एलटीई नोड स्थापित करता है। इसमें ड्रोन फीड शामिल है और यह सैटेलाइट संचार द्वारा सपोर्टेड है। इसमें निगरानी इनपुट के एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)आधारित जांच और विश्लेषण सॉफ्टवेयर है। परिस्थिति के हिसाब से सैन्य बल ट्रैकिंग भी मुहैया कराता है। वाहन में आने वाली मिसाइलों को मात देने के लिए एक जीपीएस स्पूफर है डेटा आधारित डेटा का विस्तार करके दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक और मैग्नेनिट सिस्टम को हरा सकता है। इसमें महत्वपूर्ण डेटा सर्वर होते हैं जो इसे एक शक्तिशाली प्लेटफॉर्म बनाते हैं।

जैमर व्हीकल

जैमर व्हीकल

यह एक टाटरा (HMV) जैमर वाहन है, जिसे भारतीय सेना के अनुरूप तैयार किया गया है। इसे BEL के द्वारा बनाया गया है। यह जैमर दुश्मन के HF/VHF और UHF बैंड के संचार को 15-20 किमी की दूरी तक के क्षेत्र में रोकने में सक्षम है। यह जैमर वाहन विस्फोटक प्रतिक्रियाशील वख्तरबन्द से सुसज्जित है। जैमर में HE/VHF तथा UHF बैंड को कवर करने के लिए अलग-अलग पावर एम्लीफायर दिए गएं हैं। इससे दुश्मन के संचार सिस्टम को अधिक से अधिक ध्वस्त किया जा सकता है।

SSBS 5 mtr-लघु अवधि पुल प्रणाली

SSBS 5 mtr-लघु अवधि पुल प्रणाली

यह पुल भारतीय पैदल सेना की लड़ाई के दौरान सेना की गतिशीलता को कायम रखता है। लड़ाई के मैदान में छोटे 3-4 MTR वाले गैप को आसानी से पार करता है। इसके ऊपर से 70 टन तक के वाहन और टैंक चलाए जाते हैं। इस पुल की लम्बाई 5 MTR और चौड़ाई 4 MTR है, इसका वजन 1.61 टन है। टाटरा 815 6X6 के ऊपर दो ब्रिज आते हैं, ब्रिज को R&DE DRDO ने बनाया है, इसको क्रेन की सहायता से गैप के ऊपर रखा जाता है। यह अपनी सेना की गतिशीलता को कायम रखता है। यह भारतीय सेना का सक्षम ब्रिज माना जाता है।

सर्वत्र

डीआरडीओ सर्वत्र, जिसे सर्वत्र मल्टी स्पैन मोबाइल ब्रिज सिस्टम के रूप में भी जाना जाता है। एक ट्रक माउंटेड, मल्टी-स्पैन, मोबाइल ब्रिजिंग सिस्टम है, जिसे आर्मामेंट और कॉम्बेट इंजीनियरिंग सिस्टम द्वारा विकसित किया गया है। अनुसंधान और विकास स्थापना (आरएंडडी) रक्षा अनुसंधान हाथ विकास संगठन (डीआरडीओ) के इंजीनियरों ने भारतीय सेना के लिए इस प्रणाली का निर्माण किया है। इसकी नोडल प्रोडक्शन एजेंसी भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल), बेंगलुरु है।

धनुष

धनुष

धनुष एक 155 मिमी का टॉव्ड हॉवित्जर है। यह एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड द्वारा निर्मित है, जो पहले आयुध निर्माणी बोर्ड का एक हिस्सा था। बंदूक को 2019 में सेवा के लिए अनुमोदित किया गया था। धनुष परियोजना को ओएफबी द्वारा पुराने 105 मिमी भारतीय फील्ड गन, 105 मिमी लाइट फील्ड गन और रूसी 122 मिमी बंदूके को आधुनिक 155 मिमी आर्टिलरी गन से बदलने के लिए शुरू किया गया था। इसका निर्माण ओएफबी ने अपनी गन कैरिज फैक्ट्री जबलपुर में किया है। ओएफबी द्वारा डेफएक्सपो 2018 शो में माउंटेड गन सिस्टम नामक बंदूक के एक वाहन पर लगे एडिशन को प्रदर्शित किया गया था। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) द्वारा लाइसेंस के तहत निर्मित 8×8 टाट्रा ट्रक पर बंदूक लगाई गई है और इसमें 30 किमी प्रति घंटा, कॉस कंट्री स्पीड और 80 किमी प्रति घंटा सड़क पर चलने की स्पीड है।

155MM / 45 CAL SHARANG

155MM / 45 CAL SHARANG

सांरग (विष्णु भगवान का धनु) 130 MM आर्टिलरी गन को विकसित करक 155 MM /45 कैलिबर की मन बनाई गई है। भारतीय सेना की जारत के अनुसार इस न के द्वारा अच्छी मारक क्षमता स्थिरता और अनुकूलता को ध्यान में रखते हुये बनाया गया है। सांरग गन स्वदेशी कम्पनी गन कॅरेज फैक्टरी द्वारा रस से खरीदी 130 MM को विकसित करके बनाया गया है। सांरग गन विश्व के सभी जलवायु की स्थिती (क्लाइमेट) कड़ीशन) के लिये बनाई गयी है और 155 MM कैलिबर स्तर के सभी गोला बार फार करती है, गन की मारक क्षमता विकसित होने के बाद 27 किमी से 38 किमी हो है। इस गन का गोला पहले से ज्यादा बारूद ले जाता है जिससे नुकसान ज्यादा होता है। इस गन को सबसे पहले 2020 में डिफेंस एक्सपो लखनऊ में पूर्व अध्यक्ष मनोज नरवणे को सौपा गया।

ATAGS

एडवांस्ड टोड आर्टिलरी गन सिस्टम (एटीएजीएस) एक टो 155 मिमी / 52 कैलिबर हॉवित्जर है जिसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा भारतीय सेना के लिए विकसित किया जा रहा है और भारत फोर्ज और टाटा पावर एसईडी द्वारा निर्मित किया गया है। उन्नत टोड आर्टिलरी गन सिस्टम आरडीओ (एटीएजीएस) परियोजना 2013 में डी द्वारा भारतीय सेना में पुरानी तोपों को आधुनिक 155 मिमी आर्टिलरी गन से बदलने के लिए शुरू की गई थी। DRDO प्रयोगशाला आयुध अनुसंधान और विकास प्रतिष्ठान (ARDE) ने इस उद्देश्य के लिए निजी खिलाड़ियों भारत फोर्ज लिमिटेड, महिंद्रा डिफेंस नेवल सिस्टम, टाटा पावर स्ट्रेटेजिक इंजीनियरिंग डिवीजन और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) के साथ भागीदारी की। यह DRDO के डेवलपमेंट प्रोडक्शन पार्टनर प्रोग्राम (DCPP) का हिस्सा था।

K9 VAJRA –

K9 VAJRA

K9 वज्र-टी में 14 प्रमुख भारतीय निर्मित प्रणालियों, मूल्य के अनुसार 50% घटक शामिल है, जिसमें नव गोला बारूद सक्षम FCS और इसका भंडारण, संचार प्रणाली, और पर्यावरण नियंत्रण और NBC सुरक्षा शामिल है। प्रत्यक्ष फायरिंग क्षमता के लिए जीपीएस (गनर की प्राथमिक दृष्टि) और दक्षिण अफ्रीकी एपीयू जैसे अतिरिक्त सिस्टम स्थापित किए गए थे, जो डेजर्ट ऑपरेशन के लिए सिद्ध हुए थे। वाहन के समग्र डिजाइन को रेगिस्तान और उच्च तापमान की स्थिति में संचालित करने के लिए संशोधित किया गया था, जिसमें 30 सेकंड में 3 राउंड फायरिंग दर में परिवर्तन शामिल है। भारतीय सेना को 100वां वाहन 18 फरवरी 2021 को दिया गया था, जो अनुसूची से पहले अनुबंध को पूरा कर रहा था।

नौसेना के इन युद्धक संसाधनों को देख सकतें हैं आम लोग

सिंधुघोष

वर्ग की पहली पनडुब्बियों में से भारतीय नौसेना पोत सिंधुघोष को 30 अप्रैल 1986 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था। पनडुब्बी का विस्थापन 3,000 टन, लंबाई 74 मीटर और योग 10 मीटर है। वह 15 अधिकारियों और 60 नाविकों के दल द्वारा संचालित है और हथियारों और सेंसर से लैस है जो पनमुब्बी को विभिन्न बेड़े, सामरिक और थिएटर-स्तरीय अभ्यासों में भाग लेने में सक्षम बनाती है। हाल के दिनों में, पनडुब्बी ने समुद्र में प्रभावशाली संख्या में दिनों तक नौकायन करने के अलावा कई हथियार फायरिंग को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ‘सिंधुघोष का नाम बास्किंग शार्क के नाम पर रखा गया है। शिखा के डिजाइन में नीले रंग की पृष्ठभूमि द्वारा दर्शाए गए गहरे नीले समुद्र में एक बास्किंग शार्क को तैरते हुए दिखाया गया है। पनडुब्बी गर्व से अपने आदर्श वाक्य’ दृष्टि शक्ति मूल्यों पर खरी उतरी है।

कलवरी

भारतीय नौसेना जहाज कलवरी को 14 दिसंबर 2017 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था। यह फ्रेंच ‘स्कॉपीन’ डिजाइन पर आधारित और मझगांव डीक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित प्रोजेक्ट 75 की छह पनडुब्बियों में से पहली है। यह पनडुब्बी तत्कालीन भारतीय नौसेना पोत कलवरी, सोवियत फॉक्सट्रॉट श्रेणी की पनडुब्बी की विरासत को आगे बढ़ाती है, जो पहली भारतीय नौसेना की पनडुब्बी थी। भारतीय नौसेना पोत कलवरी की कुल लंबाई 67.5 मीटर और ऊंचाई 12.3 मीटर है और इसे सात अधिकारियों और 36 नाविकों की एक टीम द्वारा संचालित किया जाता है। वह समुद्री युद्ध पूरे स्पेक्ट्रम में ऑपरेशन करने के लिए हथियारों और सेंसर से लैस है। ‘कलवरी’ का नाम टाइगर शार्क के नाम पर रखा गया है। शिखा के डिजाइन में एक बाघ को दर्शाया गया है।

INS शिवालिक

(F47) भारतीय नौसेना के लिए बनाए गए स्टील्टीमेट्स के अपने वर्ग का प्रमुख जहाज है। वह भारत द्वारा निर्मित पहला स्टीय युद्धपोत है। वह मुंबई में स्थित मझगांव डॉक लिमिटेड (एमडीएस) में बनाया गया था। जहाज का निर्माण 2001 में शुरू हुआ और 2009 तक पूरा हो गया। 29 अप्रैल 2010 को चालू होने से पहले उसने वहां से समुद्री परीक्षण किया। शिवालिक में पूर्ववती ललकार-श्रेणी के युद्धपोती की तुलना में बेहतर चुपके और भूमि पर हमला करने वाली विशेषताएं है। यह CODOG (ड डीजल या गैस प्रणोदन प्रणाली का उपयोग करने वाली पहली भारतीय नौसेना जहाज भी है। यह जहाज कूलिंग के लिए दो 7,500 hp (5,700 kW) पिलस्टिक 15 PABSTC इंजन का उपयोग कर है, या 16,800 hp (12.500KW) GELM2500+ गैस टर्बाइन, COOOG गरेशन में हाई-स्पीड बस्ट के लिए। डीजल इंजन जहाज को 22 in (41 किमी/घंटा) की अधिकतम गति तक पहुंचने की अनुमति देता है ब 321 (50) की अधिकतम गति की अनुमति देता है।INS शिवालिक की कुल समाई 142.5 मीटर 16.9 मीटर और ड्राफ्ट 4.5 मीटर है। जहाज का विस्थापन पूर्ण भार लगभग 6,200 टन है। जहाज में करीब 257 नाविक है जिसमें 37 अधिकारी शामिल हैं।

Ramswaroop Mantri

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