निमंत्रण देकर व्यवस्था नहीं कर पाना अत्यंत गैर जिम्मेदाराना शर्मनाक प्रदर्शन: अजय खरे
रीवा 11 फरवरी। उत्तर प्रदेश के चारों तरफ डबल इंजन सरकारें होने के बाद भी प्रशासनिक तालमेल देखने को नहीं मिल रहा है। समता सम्पर्क अभियान के राष्ट्रीय संयोजक लोकतंत्र सेनानी अजय खरे ने कहा है कि आखिरकार यातायात व्यवस्था क्यों चरमरा गई है। कई दिनों से चल रहे चक्का जाम की अप्रिय स्थिति के लिए केंद्र व राज्य सरकारें अपनी जवाबदेही से नहीं बच सकती हैं। जन समस्याओं को लेकर अभी कोई धरना प्रदर्शन होता तो उसे रोकने के लिए अदालतें भी संज्ञान ले लेतीं लेकिन धर्म के मामले में बड़ी संख्या में लोग मर जाएं लेकिन कहीं कोई पूछने वाला नहीं है। इस तरह की मौतों को बड़ी बेशर्मी से मोक्ष बता दिया जाता है। प्रयागराज महाकुंभ की व्यवस्था अभी तक नहीं सम्हल पाई है। वीआईपी का आना-जाना लगा हुआ है।
प्रशासनिक बद इंतजामी के चलते प्रतापगढ़ , कौशांबी , संत रविदास नगर और मध्य प्रदेश के रीवा जिले से आगे भी यातायात व्यवस्था बिगड़ी हुई है। भारी विडंबना है कि देश चलाने का दावा करने वाले चक्का जाम दुरुस्त नहीं कर पा रहे हैं। यह बात बहुत आपत्तिजनक है। वीआईपी को कोई परेशानी नहीं है मरना तो आम आदमी को है। मालूम हो गत 29 जनवरी को प्रयागराज महाकुंभ के संगम तट पर मौनी अमावस्या की भीड़ नहीं सम्हली तो भगदड़ में सैकड़ो आम श्रद्धालु हताहत हुए पर बड़े पैमाने पर सच्चाई छिपाई गई। लेकिन अभी तक किसी वीआईपी के हताहत होने की बात सामने नहीं आई। अभी तो व्यवस्था संबंधी विफलता छुपाने के लिए इस चक्का जाम को विश्व का सबसे बड़ा चक्का जाम बताने और ग्रीनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने का अभियान चल रहा है। मालूम हो कि दुनिया के सबसे खराब ट्रैफिक जाम की बात करें तो यह चीन के बीजिंग शहर में लगा था। 4 अगस्त, 2010 को लगा यह ट्रैफिक जाम करीब 12 दिनों तक चला था, जो समय के लिहाज से अब तक सबसे अधिक है। 100 किलोमीटर लंबा यह जाम बीजिंग-तिब्बत एक्सप्रेसवे पर लगा था। जाम लगने की वजह हैवी ट्रकों को बताया गया था। वह चीन की सरकार की विफलता थी। श्री खरे ने कहा कि अच्छी यातायात व्यवस्था यह है कि जल्दी से जल्दी सारे रास्ते खुल जाएं और जनसाधारण परेशान ना हो। लेकिन देखने को मिल रहा है कि लंबे सफर के यात्रियों को भी कई दिनों से परेशान होना पड़ रहा है और महाकुंभ में भी। प्रशासन के द्वारा यदा-कदा खाने की व्यवस्था का ढिंढोरा पीटा जा रहा है जबकि रास्ते में पड़ने वाले होटल में भी चक्का जाम के चलते जबरदस्त भीड़ होने से व्यवस्थाएं नहीं बन पा रही हैं। इसके चलते आम आदमी का बजट बिगड़ रहा है। महाकुंभ के नाम पर धंधेबाजों की चांदी है लेकिन फंसे हुए लोगों की हालत खराब है। श्री खरे ने कहा कि निमंत्रण देकर व्यवस्था नहीं कर पाना अत्यंत गैर जिम्मेदाराना शर्मनाक प्रदर्शन है।





