पुष्पा गुप्ता
कुतुब मीनार, दक्षिण दिल्ली में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल है. नाम का शाब्दिक अर्थ विजय टॉवर है. कुतुबुद-दीन ऐबक ने 1199 ईसवी में इस स्मारक की नींव रखी थी और इसे बाद में उसके उत्तराधिकारी और दामाद शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने पूरा किया था.
महरौली, दिल्ली में कुतुब परिसर शानदार प्राचीन और मध्यकालीन इंडो-इस्लामिक वास्तुकला को दर्शाता है. इस परिसर में एक लोहे का स्तंभ है जिसे कीर्ति स्तंभ (विजय स्तंभ) के रूप में जाना जाता है.
इसे चंद्रगुप्त द्वितीय ने (लगभग) तीसरी या चौथी शताब्दी CE में बनवाया था.
सोशल मीडिया यूज़र्स दावा कर रहे हैं कि ये तस्वीर कुतुब परिसर में स्थित लौह स्तंभ की है. स्तंभ पर हिंदू शासकों के नाम गुदे हुए हैं. ये हिंदू शासक मुगलों के पूर्वज थे जिन्होंने 16वीं और 17वीं शताब्दी में भारत के एक बड़े हिस्से पर शासन किया था.
ट्विटर हैंडल @Sarvesh38453373 ने इसी दावे के साथ ये तस्वीर ट्वीट की. उनके ट्वीट को फिलहाल 8 हज़ार से ज़्यादा व्यूज़ मिले हैं.
*०फ़ैक्ट-चेक:*
वायरल की जा रही तस्वीर को गूगल लेंस पर रिवर्स सर्च करने पर हमने देखा कि ये तस्वीर दिल्ली के कुतुब कॉम्प्लेक्स के लौह स्तंभ की नहीं है. तस्वीर राजस्थान के भरतपुर में लोहागढ़ किले के जवाहर बुर्ज के लौह स्तंभ की है.
हमें Alamy पर भी स्मारक की ऐसी ही तस्वीरें मिलीं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की वेबसाइट के मुताबिक, वंशावली वाले इस लौह स्तंभ को कुछ दशकों पहले ही महाराजा बृजेंद्र सिंह ने बनवाया था. 1995 में इनकी मौत हो गई थी.
वे भरतपुर की तत्कालीन रियासत के अंतिम शासक थे. भरतपुर की शाही संपत्ति की ऑफ़िशियल वेबसाइट पर, पूर्व राजाओं के नाम दिए गए हैं जो स्तंभ पर गुदे हुए हैं. इनमें महाराजा केहरी सिंह, नवल सिंह, रणजीत सिंह आदि शामिल हैं.
इससे पता चलता है कि ये दावा निराधार है कि ये शासक मुगलों के पूर्वज थे.





