इंदौर में आउटर रिंग रोड के निर्माण के लिए शुरू कराए गए सर्वे का जोरदार विरोध भी शुरू हो गया है। जैसे ही नेशनल हाईवे की टीम अलग-अलग गांवों में सर्वे करने पहुंची, किसानों ने टीम को घेर लिया और सर्वे नहीं करने दिया। टीम को बैरंग वापस लौटना पड़ा। भारत सरकार द्वारा इंदौर में आउटर रिंग रोड की योजना को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत पश्चिमी रिंग रोड का भी निर्माण किया जाना है। यह सड़क पीथमपुर के आगे एबी रोड से शुरू होकर धार रोड, उज्जैन रोड को पार करते हुए शिप्रा के पास फिर से एबी रोड से जुड़ेगी। इस सड़क का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जाएगा और इसके लिए भूमि अधिग्रहण से पहले सर्वेक्षण किया जा रहा है।
टीम को किसानों ने खदेड़ा
पिछले दो दिनों से नेशनल हाईवे की टीम विभिन्न गांवों में जाकर भूमि सर्वेक्षण कर रही है। लेकिन जैसे ही टीम सर्वे के लिए पहुंचती है, बड़ी संख्या में किसान जमा होकर इसका विरोध करने लगते हैं। कल भी गांव मोहना, किशनपुरा और मांगलिया में जब टीम सर्वे करने पहुंची, तो किसानों ने नारेबाजी करते हुए उन्हें रोक दिया और बिना सर्वे किए ही टीम को लौटना पड़ा। इस दौरान टीम के साथ देपालपुर के अनुविभागीय अधिकारी राकेश मोहन त्रिपाठी, नायब तहसीलदार पूजा सिंह चौहान, लोकेश अजूबा, राजस्व निरीक्षक अमिताभ पारे, पुलिस विभाग, पीडब्ल्यूडी, वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
किसान संघ भी कर रहा है विरोध
किसानों के समर्थन में अब भारतीय किसान संघ भी आ गया है। किसान संघ से जुड़े किसानों ने भी इस सर्वे का विरोध किया और टीम को वापस भेजने में अहम भूमिका निभाई। उधर, इस परियोजना को लेकर केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पहले ही हवाई सर्वे कर चुके हैं। उन्होंने सर्वे में हो रही देरी पर नाराजगी जाहिर की थी, जिसके बाद प्रशासन ने विभिन्न विभागों का संयुक्त दल गठित कर सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए थे।
चार गुना दाम मांग रहे किसान
विरोध कर रहे किसानों की मांग है कि अगर सरकार हमारी जमीन लेना चाहती है, तो हमें बाजार मूल्य से चार गुना ज्यादा मुआवजा दिया जाए। किसानों का कहना है कि राज्य सरकार ने अभी तक इस तरह का कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया है, इसलिए वे इस सर्वे का विरोध कर रहे हैं। जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता, वे सड़क निर्माण कार्य में सहयोग नहीं करेंगे।





