इंदौर। सयुंक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर इंदौर के किसान संगठनों ने भी आज अंबेडकर प्रतिमा पर एकत्रित होकर अम्बेडकर जयंती को सविंधान बचाओ दिवस और किसान बहुजन एकता दिवस के रूप में मनाया । इस अवसर पर किसान संगठनों और वामपंथी जनवादी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता बड़ी संख्या में गीता भवन चौराहा स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर एकत्रित हुए । पहले उन्होंने प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा बाद में संविधान की प्रस्तावना का वाचन कर संविधान विरोधी सरकारी कार्यों के खिलाफ लगातार संघर्ष का संकल्प लिया । आज का यह कार्यक्रम संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति इंदौर इकाई से जुड़े अखिल भारतीय किसान सभा, किसान खेत मजदूर संगठन, किसान संघर्ष समिति, हिंद मजदूर सभा, एटक, सीटू और अन्य वामपंथी जनवादी संगठनों ने किया था । बड़ी संख्या में एकत्रित कार्यकर्ताओं ने संविधान बचाओ, देश बचाओ, किसान विरोधी कानून रद्द करो, बाबा साहब आपके सपनों को मंजिल तक पहुंचाएंगे तथा सरकार की संविधान विरोधी कार्रवाइयों के विरोध में नारेबाजी की । आज के कार्यक्रम का नेतृत्व सर्व श्री अरुण चौहान, रामस्वरूप मंत्री ,हरि ओम ,सूर्य वंशी, प्रमोद नामदेव ,आदि ने किया । प्रदर्शन में सर्वश्री सी एल सरावत, भागीरथ कछवाय, माता प्रसाद मौर्य, सोनू शर्मा कामरेड मारोतकर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शरीक थे । प्रदर्शनकारी नेताओं ने कहा कि डॉ भीमराव अम्बेडकर देश के शोषित, उत्पीड़ित लोगों की आजादी के सपनो के नायक थे। हम उन्हें संविधान निर्माता के रूप में जानते हैं, जिस संविधान में आजादी के दिये गये कई मौलिक अधिकारों पर आज आरएसएस-भाजपा की मोदी सरकार तीखे व क्रूर हमले कर रही है। आज, जब बेरोजगारी बेइंतहा तेजी से बढ़ रही है और खेती में घाटा व कर्जदारी बढ़ रही है, तब इसके चलते खेती से जुड़े लोगों पर सकंट बढ़ता जा रहा है।
खेती के लिए बनाए गये ये तीन कानून और बिजली बिल 2020 भी मोदी सरकार के गरीब विरोधी नीतियों में अगला कदम है। आज ये कानून दोनों जमीन वाले व बिना जमीन वाले किसानों के लिए खतरा बन गए हैं। खेती का यह नया प्रारूफ़ बटाईदार किसानों के लिए और भी घातक है क्योंकि खेती को लाभकारी बनाने के लिए कम्पनियां बड़े पैमाने पर इसमें मशीनों का प्रयोग कराएंगी और बटाईदारों का काम पूरा छिन जाएगा। बटाईदारों की बड़ी संख्या बहुजन समाज से आती है। देश के मेहतनकशों के लिए एक उत्साह की बात है कि जमीन वाले किसान और इनके संगठन, इन कानूनों को रद्द कराने के लिए लड़ रहे हैं।
इसी तरह का कार्यक्रम महू मैं बाबा साहब की जन्म स्थली पर आयोजित किया गया जिसका नेतृत्व अरुण चौहान ने किया ।




