नई दिल्ली. इस साल दिवाली भारत के बाजारों में रिकॉर्ड तोड़ रौनक लेकर आ रही है. ट्रेडर्स बॉडी CAIT (कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स) के मुताबिक इस बार दिवाली पर देशभर में करीब 5 लाख करोड़ रुपये का व्यापार होने का अनुमान है. यानी सिर्फ पांच दिनों में भारतीय मार्केट का कारोबार पाकिस्तान के सालाना रक्षा बजट और नेपाल की पूरी GDP से कहीं आगे निकल जाएगा.
देश के छोटे-बड़े बाजारों से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक, हर जगह बिक्री का बूम आने वाला है. मिठाई से लेकर मोबाइल, सोना, कपड़े, फर्नीचर, गाड़ियां और इलेक्ट्रॉनिक्स तक हर सेगमेंट में भारी मांग देखी जा रही है. इस बार दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि भारत की आर्थिक ताकत का चमकता सबूत बनकर सामने आने वाली है.
अगर तुलना की जाए तो पाकिस्तान ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 2,550 अरब पाकिस्तानी रुपये का रक्षा बजट घोषित किया है. मौजूदा विनिमय दर के हिसाब से यह करीब 760 अरब भारतीय रुपये (₹0.76 लाख करोड़) के आसपास बैठता है. यानी भारत का दिवाली व्यापार पाकिस्तान के सालाना रक्षा बजट से 6 गुना बड़ा है. दूसरे शब्दों में, भारत सिर्फ एक त्योहार के दौरान इतना खर्च कर देता है जितना पड़ोसी देश सालभर अपनी सेना पर नहीं कर पाता.
नेपाल की GDP से भी बड़ी दिवाली की खरीदारी
नेपाल की पूरी अर्थव्यवस्था की बात करें तो वर्ल्ड बैंक के ताजा आंकड़ों के मुताबिक नेपाल की GDP करीब 48 अरब डॉलर (₹4 लाख करोड़) के आसपास है. ऐसे में भारत में दिवाली के दौरान होने वाला व्यापार नेपाल की पूरी वार्षिक GDP से भी बड़ा साबित हो रहा है. यह दिखाता है कि भारत की आंतरिक खपत और उपभोक्ता शक्ति किस स्तर पर पहुंच चुकी है.
रिकॉर्ड तोड़ बिक्री की तैयारी
CAIT ने कहा है कि इस बार दिवाली पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफॉर्म पर बिक्री में 25 से 30 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. खास बात यह है कि इस बार स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ी है और ‘वोकल फॉर लोकल’ की लहर फिर से दिख रही है. दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, जयपुर, सूरत, अहमदाबाद और पटना जैसे शहरों में पहले से ही बंपर एडवांस बुकिंग चल रही है.
त्योहार नहीं, अर्थव्यवस्था का इंजन
त्योहारों का सीजन अब सिर्फ खुशियों का नहीं बल्कि आर्थिक उछाल का भी प्रतीक बन चुका है. दिवाली जैसे त्योहार भारत की रिटेल और सर्विस इंडस्ट्री को असली ताकत देते हैं. हर साल इस दौरान लाखों नौकरियां बनती हैं और अरबों रुपये की नकद अर्थव्यवस्था घूमती है. यानी जब भारत की गलियां दीयों से जगमगाती हैं, तब देश की अर्थव्यवस्था भी तेज रोशनी से भर उठती है.





