प्रियांशु कुमार
आमिर खान की नई फिल्म “सितारे ज़मीन पर” इसी संदेश के साथ और भावनाओं से जुड़ी एक फिल्म है। यह फिल्म मानसिक रूप से कमजोर बच्चों के संघर्षों, समाज की सोच और आत्म-सम्मान की जंग को बड़े ही संवेदनशील अंदाज़ में पेश करती है। फिल्म में आमिर खान एक बास्केटबॉल कोच की भूमिका निभा रहे हैं, जो कोर्ट के आदेश के बाद विशेष बच्चों की एक टीम को प्रशिक्षित करता है। इस यात्रा में वह न केवल बच्चों को सिखाता है, बल्कि खुद भी बहुत कुछ सीखता है।

“सितारे ज़मीन पर” स्पेनिश फिल्म चैंपियंस (2018) की आधिकारिक हिंदी रीमेक है। मूल कहानी की आत्मा को बरकरार रखते हुए इसे भारतीय संदर्भ में भावनात्मक और संवेदनशील रूप से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि फिल्म की मौलिकता पर कुछ सवाल उठे हैं, लेकिन इसकी संवेदनशील प्रस्तुति इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
आमिर खान ने कोच के किरदार में गहराई और ईमानदारी से अभिनय किया है। उनके साथ जेनेलिया डिसूज़ा का अभिनय भी सहज और प्रभावशाली है। बच्चों का अभिनय फिल्म की जान है – उनकी मासूमियत और जज़्बा दर्शकों के दिल को छू जाता है। फिल्म का संगीत कहानी के साथ अच्छी तरह मेल खाता है और भावनात्मक दृश्यों में इसकी भूमिका प्रभावशाली है। कुछ जगहों पर कॉमेडी है, तो कहीं आप इमोशनल भी हो सकते हैं। निर्देशन की दृष्टि से आमिर खान ने एक संवेदनशील विषय को गंभीरता और मानवीय दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।
समीक्षकों ने फिल्म को 3 से 3.5 सितारों की रेटिंग दी है और दर्शकों की प्रतिक्रिया भी अधिकतर सकारात्मक रही है। सोशल मीडिया पर इसे प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली कहानी बताया गया है, हालांकि कुछ दर्शकों ने इसे रीमेक होने के कारण उतना प्रभावित करने वाला नहीं माना। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने शुरुआती दो दिनों में लगभग ₹11.7 करोड़ की कमाई की है और यह धीरे-धीरे दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो रही है।
फिल्म का सबसे गहरा संदेश हार के बाद भी जीत की उम्मीद रखना है। अंतिम दृश्य, जहां टीम हारती है, वहां यह समझ आता है कि हार के बाद मेहनत और सुधार का अवसर मिलता है, जो अंततः सफलता की ओर ले जाता है। यह फिल्म हमें सिखाती है कि हर बच्चे में किसी न किसी रूप में खासियत होती है, और कमजोरियों को कमज़ोरी नहीं बल्कि ताकत बनाना चाहिए। “सितारे ज़मीन पर” फिल्म के निर्देशक आर. एस. प्रसन्ना हैं और निर्माता आमिर खान और अपर्णा पुरोहित हैं।
कुल मिलाकर “सितारे ज़मीन पर” एक सामाजिक संदेश के साथ देखी जाने वाली फिल्म है, जो विशेष रूप से अभिभावकों, शिक्षकों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक साबित होगी। यह फिल्म याद दिलाती है कि हर बच्चा, चाहे जैसा भी हो, एक सितारा होता है।
लेखक: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के स्नातक के छात्र हैं।





