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आखिरकार मिल गया ‘गायब ब्रह्मांडीय मैटर’ 

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ब्रह्मांड में अभी तक छिपे रहे 50% पदार्थ को पहली बार देखा गया.वैज्ञानिकों ने ‘कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड’ का यूज करके पता लगाया.आकाशगंगाओं के आसपास छिपे हाइड्रोजन के विशाल बादलों की खोज.

ब्रह्मांड का आधा हिस्सा आखिरकार मिल गया है. नहीं, हम किसी चोरी की बात नहीं कर रहे. ये उस ‘गायब’ मैटर की कहानी है, जिसे वैज्ञानिक दशकों से ढूंढ रहे थे. अब पता चला है कि वो हमारे ही आस-पास था, लेकिन नजरों से छिपा हुआ. ये हिस्सा है ‘बैरोनिक मैटर’ यानी वो सामान जिससे तारे, ग्रह, इंसान… सब बने हैं. वैज्ञानिकों को अंदेशा था कि इसका करीब 50% कहीं गुम है. अब जाकर इसकी भनक मिली है, गैलेक्सी के बाहर, अदृश्य हाइड्रोजन के रूप में. इस हाइड्रोजन को देखना नामुमकिन था. ये आयोनिक अवस्था में है, इतना फैला हुआ और हल्का कि कोई टेलीस्कोप इसे नहीं पकड़ सकता. लेकिन फिर भी इसे खोज लिया गया. कैसे? इसके लिए वैज्ञानिकों ने सीधा आकाश नहीं देखा, बल्कि आकाश के पीछे की रोशनी को देखा.

कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CMB) यानी ब्रह्मांड की ‘पहली रोशनी’, हर दिशा में फैली है. जब ये रोशनी किसी गैस से टकराती है, तो हल्का-सा बदलाव आता है. उस बदलाव को पकड़ना आसान नहीं था. पर साइंटिस्ट्स ने ‘स्टैकिंग’ नाम की एक ट्रिक लगाई. यानी एक जैसे लाखों ऑब्जर्वेशन को एक के ऊपर एक जमाकर देखा गया. इससे वो फीकी, अदृश्य-सी गैस चमकने लगी. और वहीं दिखी हमारी खोई हुई हाइड्रोजन!

यह कैसे वहां तक पहुंची कैसे?

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी और लॉरेंस बर्कले लैब के रिसर्चर्स ने 8 अरब प्रकाशवर्ष दूर की 1 मिलियन रेड गैलेक्सी को स्टडी किया. उन्होंने पाया कि हर गैलेक्सी के चारों ओर हाइड्रोजन का एक विशाल बादल है. इतना बड़ा, जितना पहले सोचा भी नहीं गया था.

ये गैस वहां कैसे पहुंची? दो रास्ते हैं. एक- गैलेक्सी के बाहर से गैस आकर उसमें समा गई. दूसरा- जब गैलेक्सी के सेंटर में मौजूद ब्लैक होल एक्टिव होता है, तो वह इतना तेज फोर्स छोड़ता है कि गैस को गैलेक्सी से बाहर धकेल देता है. यही गैस फिर गैलेक्सी के चारों ओर छा जाती है.

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अंतरिक्ष में हाइड्रोजन चमक सकती है. ओरियन नेबुला में ऐसा ही है, लेकिन मुक्त अंतरिक्ष में चमकने के लिए इसमें पर्याप्त घनत्व और रेडिएशन नहीं. (NASA, ESA, M. Robberto (STScI/ESA) और हबल स्पेस टेलीस्कोप ओरियन ट्रेजरी प्रोजेक्ट टीम)

ब्लैक होल से जुड़ी क्या बात पता चली?

ब्लैक होल जब ज्यादा एक्टिव होता है, तो इसके चुंबकीय क्षेत्र से निकलते जेट्स लाखों प्रकाशवर्ष दूर तक फैल जाते हैं. साथ ही बहुत तेज हवाएं भी फूटती हैं, जो अंदर की गैस को बाहर कर देती हैं. इससे सितारे बनना रुक जाता है, क्योंकि तारे गैस से ही बनते हैं.

अब जो विशाल हाइड्रोजन के बादल मिले हैं, वो बताते हैं कि ब्लैक होल की ये एक्टिविटी शायद रुक-रुक कर होती है. कभी शांत, तो कभी अचानक भड़क उठती है. इससे गैलेक्सी कैसे बनती है, कैसे बढ़ती है, इस पर नई रोशनी पड़ती है. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. कुछ रिसर्च बताती हैं कि ब्रह्मांड का कुछ और गायब मैटर डार्क मैटर की रेखाओं में छुपा है, वही कॉस्मिक वेब जो गैलेक्सियों को जोड़ता है.

ब्रह्मांड की पहेली का एक अहम टुकड़ा मिला

इस नई रिसर्च ने एक नया दरवाजा खोल दिया है. वैज्ञानिक अब इन अदृश्य गैसों को ढूंढने का नया तरीका पा चुके हैं. अब काम है- इन सारे टुकड़ों को जोड़ना, और पूरी तस्वीर बनाना. रिसर्चर्स ने अपनी स्टडी में लिखा, ‘ये काम ब्रह्मांड की गुत्थियां सुलझाने की एक नई शुरुआत है.’ उनकी यह स्टडी Physical Review Letters में सबमिट की गई है और arXiv पर उपलब्ध है.

ramswaroop mantri

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