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अनेकता में एकता खोजो अनेक विशेषताएं

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शशिकांत गुप्ते इंदौर

इनदिनों राजनीति बहुत ही मनोरंजक होती जा रही है।बचपन के किस्से सुनकर आमजन में कौतूहल जागता है।स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशवासियों को अलीगढ़ के ताले की विशेषता का पता चल पाया।भारत में बहुत से ऐसे शहर जिनकी अपनी विशेषता है।हर शहर की विशेषताओं को राजनीतिज्ञ अपने स्वविवेक से खोज लेतें है।उत्तर प्रदेश के कन्नौज शहर की विशेषता बहुत तारीफें काबिल है।कन्नौज में इत्र निर्मित होता है।इस शहर के लिए कहा जाता है कि यहाँ की नालियों अर्थात गटर से खुशबू आती है।महान रसायन शास्त्र के विशेषज्ञ की खोज पर यदि,बेरोजगार युवक अमल करें और इस शहर की नाली की गैस से ईंधन तैयार कर चाय और पकौड़े बनने लगेंगे तो, आमजन को खुशबूदार चाय पीने को मिलेगी और सुगंधित पकौड़े का स्वाद चखने को मिलेगा?
वैसे भारत के प्रत्येक प्रान्त के हरएक शहर की अपनी विशेषता है।खोजने वाला चाहिए।राजनीतिशास्त्र अर्थात (Political science)।
यह शास्त्र नीति निर्धारण का मोर्चा है।पहलीबार देश को राजनीतिशास्त्र के माध्यम से नीति निर्धारण के अतिरिक्त अन्य विशेषताओं को खोजने वाला वैज्ञानिक मिला है।
राजनीति में संलग्न लोगों को राजस्थान के भरतपुर की विशेषता से भी बहुत लगाव है।भरतपुर में लोटे निर्मित होतें हैं।यहां जो लोटे निर्मित होतें वे बिन पेंदे के होतें हैं।पैदा विहीन होने से यहाँ निर्मित लोटे एक जगह स्थिर नहीं रहतें हैं,लुढ़कते रहतें हैं।
लेखक ऐसे शहरों की जानकारियां प्राप्त कर रहा था।लेखक की मंशा थी कि, देश के आमजन को विभन्न शहरों की विशेषताओ की जानकारी मिले। लेखक को यकायक एक मित्र ज्ञानचंद का स्मरण हुआ।ज्ञानचंद की शैक्षणिक योग्यता Diploma inTourism अर्थात पर्यटन में अधिकारक प्रमाण पत्र प्राप्त कर रखा।
लेखक जिज्ञासावश ज्ञानचंद के पास गया।ज्ञानचंद को अपनी जिज्ञासा से अवगत कराया।
ज्ञानचंद बहुत ही विनोदी स्वभाव का व्यक्ति है।
ज्ञानचंद ने पर्यटन के दौरान हर शहर की विशेषताओं कि,अपने ढंग से खोज की है।ज्ञानचंद ने कहा मै तो जिस शहर में जाता हूँ।वहाँ की विशेषता वहीँ के निवासियों को सुनता हूँ।
लेखक ने कहा हमें तो हर शहर की महत्वपूर्ण जानकारी सुनना है।ज्ञानचंद ने पूछा क्या करोगे जानकर?
सियासतदानों द्वारा अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए प्रत्येक शहर की स्तुति की जाती है।शहरों के वास्तविक विकास के लिए कुछ भी नहीं किया जाता?
सियादतदान तो कानपुर शहर के चर्म उद्योग की भी तारीफ करेंगे।कानपुर में चर्म के जूते चप्पल निर्मित होतें हैं।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर की चप्पलें प्रसिद्ध है।आगरा का महत्व विश्व के अजूबों में प्रसिद्ध है पूर्व में यहाँ का पागलखाना भी मशहूर था।अब वह अन्यत्र स्थानांतरित होगया है।
लेखन ने ज्ञानचंद से कहा जब तुम पागल खाने तक पहुँच गए हो तो, इससे आगे कुछ भी जानने का साहस नहीं है।
ज्ञानचंद ने अपनी बात को जारी रखतें हुए कहा कि यही तो मैं कहना चाहता हूँ।पागलखना एक मनोवैज्ञानिक सच्चाई है।सत्य कटु होता है।सत्य से हर किसी को भय होता है।
संत कबीर ने लगभग सात सौ वर्ष पूर्व कहा है।
संतो यह जग बौराना
साँच कहो तो मारन धावे
झूठे जग पतियाना

अर्थात यह जग सच कहने पर मारने ही दौड़ेगा झूठे पर ही विश्वास करेगा।
खंडहर पर ऊपर से कितने ही कीमती रंग रोगन का मुल्लमा चढ़ाओ।कोई फायदा नहीं होगा ऊपर से चढ़ाए मुल्लमे के पोपडे भरभरा कर गिरेंगे ही।
भारत की विशेषता है।अनेकता में एकता।भारत को व्यापक दृष्टि से देखना चाहिए।संकीर्णता से देखने पर दादाजी अर्थात पितामह को अब्बाजान कहने में भी सांप्रदायिकता का आभास होता है।ज्ञानचंद ने कहा पहले अपने सोच को व्यापक बनाओ।विशाल हृदयता का परिचय देते हुए पर्यटन करोगे तो हर जगह की विशेषताओं के महत्व को समझ पाओगे।
ज्ञानचंद ने कहा उपर्युक्त सोच तब ही बन पाएगा जब फैशनेबल राजनीति को त्याग कर राजनीति शास्त्र के महत्व को समझा जाएगा।

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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