नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमेन (एनएफआईडब्ल्यू) की कथित महासचिव एनी राजा, एनएफआईडब्ल्यू की राष्ट्रीय सचिव निशा सिद्धु के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है; और दीक्षा दुवेदी, वकील, को राज्य में मीरा पैबिस की भावनाओं को आहत करने के आरोप में इंफाल पुलिस स्टेशन में।
इन तीनों पर शनिवार, 8 जुलाई 2023 को इंफाल पुलिस स्टेशन में मणिपुर की महिला मीरा पैबिस की उपेक्षा करने और मुख्यमंत्री के इस्तीफे के खिलाफ मीरा पैबिस के विरोध को “मंच-संचालित नाटक” बताने के लिए मामला दर्ज किया गया था। उन पर मणिपुर में 3 मई के दंगे को ‘राज्य-प्रायोजित दंगा/राज्य प्रायोजित हिंसा’ बताने के लिए भी मामला दर्ज किया गया है।
इसके अलावा, जैसा कि नागालैंड पोस्ट, दिनांक 2.7.2023 में बताया गया है, उपरोक्त आरोपियों ने यह भी कहा कि वे दोनों समुदायों के प्रभावित लोगों से भी मिले थे और एक प्रेस मीट में निष्कर्ष निकाला कि उन्होंने इसे राज्य प्रायोजित हिंसा के रूप में देखा था।
याचिकाकर्ता ने कहा कि, राज्य की मौजूदा कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण, मणिपुर के मुख्यमंत्री ने एक जिम्मेदार नेता के रूप में और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए, खुद को मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला किया। हालाँकि मीरा पैबिस के भारी विरोध और आम जनता के यह कहने के कारण कि उन्हें मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए और इस महत्वपूर्ण समय में इस्तीफा नहीं देना चाहिए, उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उक्त तीन आरोपियों (उनमें से एक राजनीतिक दल, सीपीआई से संबंधित है) ने तथ्यों की पूरी तरह से अनदेखी करते हुए मणिपुर की महिला मीरा पैबीस के साथ दुर्व्यवहार किया है और मुख्यमंत्री के इस्तीफे के खिलाफ मीरा पैबीस के विरोध प्रदर्शन को “मंच-संचालित नाटक” करार दिया है। “.
इतना ही नहीं बल्कि मणिपुर में 3 मई को हुए दंगे को भी बिना किसी निर्णायक सबूत के ‘राज्य प्रायोजित दंगा’/’राज्य प्रायोजित हिंसा’ करार दिया गया है। इस तरह का बयान लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए व्यक्ति को उखाड़ फेंकने की साजिश है।’
याचिकाकर्ता ने लिखा है कि सरकार लोगों को सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसा रही है।
इसके अलावा, एक प्रेस वार्ता में, उपरोक्त आरोपियों ने यह भी कहा, “हमने दोनों समुदायों के प्रभावित लोगों से भी मुलाकात की है और इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि यह राज्य प्रायोजित हिंसा है जो हमने मणिपुर में देखी” जैसा कि नागालैंड में रिपोर्ट किया गया है। पोस्ट दिनांक 2.7.2023.
उपरोक्त अभियुक्तों ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि ‘दोनों पक्षों के लोग चाहते हैं कि शांति लौटे और राज्य सरकार को सामान्य स्थिति लाने के लिए ईमानदारी से प्रयास करना चाहिए।’
गौरतलब है कि गृह मंत्रालय ने दिनांक 4 जून 2023 को अधिसूचना जारी कर क्रमांक. इसलिए। 2424(ई) और धारा द्वारा प्रदत्त शक्ति का प्रयोग। जांच आयोग अधिनियम, 1952 के 3
एक जांच आयोग नियुक्त किया गया जिसमें (1) माननीय न्यायमूर्ति अजय लांबा (मुख्य न्यायाधीश गौहाटी उच्च न्यायालय सेवानिवृत्त); (2) हिमांशु शेखर दास, जेएएस (सेवानिवृत्त) और (3) अलोका प्रभाकर, आईपीएस (सेवानिवृत्त) को एक बनाने के लिए
मणिपुर में हिंसा की घटनाओं की जांच।
बताए गए तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आईपीसी की धारा 121- ए/124/153/153-ए/ 153-बी/ 499/ 504/505(2)/34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
हेइंगंग माखा लेइकाई के दिवंगत सनौजम फूलो सिंह के बेटे एल. लिबेन सिंह (53 वर्ष) ने इंफाल पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई।
”ये डरी हुई सरकार है”: मणिपुर गई NFIW की फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम पर मामला दर्ज
मणिपुर के दौरे से लौटी NFIW की टीम की तरफ से हिंसा को ‘राज्य प्रायोजित हिंसा’ ( state sponsored violence ) बताने पर मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई पर संगठन की नेशनल सेक्रेटरी निशा सिद्धू ने कहा कि ”ये डरी हुई सरकार है”।
28 जून से 1 जुलाई तक हिंसा प्रभावित मणिपुर का दौरा करने वाली तीन सदस्य वाली फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम पर मणिपुर में मामला दर्ज किया गया है। इस टीम में भारतीय महिला फेडरेशन ( National Federation of Indian women ) से जुड़ी एनी राजा (जनरल सेक्रेटरी), निशा सिद्धू ( नेशनल सेक्रेटरी) और दिल्ली की एक वकील दीक्षा द्विवेदी शामिल थीं।
दिल्ली लौटने पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम ने मणिपुर में हिंसा प्रभावित महिलाओं और बच्चों की स्थिति के बारे में बताया था साथ ही रिलीफ कैंप में लोगों की आपबीती को बयां किया था। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मणिपुर हिंसा को ‘राज्य प्रायोजित हिंसा’ ( state sponsored violence ) बताया गया था। इसी बयान पर मामला दर्ज किया गया है।
मामला 8 जुलाई को इंफाल में एल लिबेन सिंह की तरफ से दर्ज करवाया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कई धाराओं ( 121A, 124, 153, 153A, 153B, 499, 504 505(2) के तहत दर्ज किए गए मामले में राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ना, उकसाना और मानहानि शामिल है।
हमने फ़ैक्ट फाइंडिंग टीम का हिस्सा NFIW की नेशनल सेक्रेटरी निशा सिद्धू से फोन पर बात की। मामला दर्ज होने पर उन्होंने कहा कि” FIR किसी IPS ने दर्ज करवाई है, उसमें लिखा है कि ‘राज्य प्रायोजित हिंसा’ ( state sponsored violence) कहा है। ये तो लोग कह रहे हैं ये हम अपनी तरफ से तो नहीं कह रहे, ये तो पब्लिक ने कहा है जिनके बीच में हम गए हैं, वे कह रहे थे कि सरकार ने रोका नहीं है, सरकार की शह पर हो रहा है”।
वे आगे कहती हैं कि ” रिलीफ कैंप में लोगों ने हमसे कहा कि हमारे पास कोई नहीं आया। आप पहले हैं जो हमारे पास आए हैं। मैं ईमानदारी से कह रही हूं कि कूकी और मैतेई दोनों तरफ के लोगों के फोन आए हैं कि आपने हमारे मन की बात कही दी, जो हम नहीं कह सकते थे”।
निशा सिद्धू से पूछा कि वे इस कार्रवाई को कैसे देखती हैं तो उन्होंने कहा कि ” ये डरी हुई सरकार है जो नाकाम हो गई है वहां पर लोगों की मदद करने में”।
3 मई को शुरू हुई हिंसा को दो महीने से ज़्यादा का वक़्त हो गया है लेकिन अब भी मणिपुर से हिंसा से जुड़ी ख़बरें आ रही हैं। क़रीब 150 लोगों के मरने की ख़बर है जबकि हज़ारों लोग विस्थापित हो गए हैं। प्रभावित लोगों में कूकी और मैतेई दोनों ही समुदाय के लोग हैं। इंटरनेट बंद होने की वजह से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मणिपुर की सटीक तस्वीर पेश करने का कोई दावा नहीं कर सकता ऐसे में वहां महिलाओं और बच्चों का हाल लेने पहुंची NFIW की टीम पर मामला दर्ज होना कई सवाल खड़ा करता है।

मामला दर्ज होने पर NFIW की दिल्ली इकाई की तरफ से भी एक बयान जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि ” यह दिखाई दे रहा है कि सरकार हर उस आवाज़ को दबा देना चाहती है जो उसकी नाकामी और बर्बरता को सामने लाने की कोशिश भी करे। एक तरफ ये राज्य और केंद्र सरकार एक-एक कर राज्यों को भेदभाव और सामुदायिक सांप्रदायिक हिंसा में झोंक कर उनके तमाम मौलिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर तबाह कर रही है और किसी को उनके इरादों को बाहर लाने का भी अधिकार नहीं है। पूरा देश धीरे-धीरे एक जेल में बदल देने और सरकारी पुलिस का नागरिकों की आवाज कुचलने का अधिकार केंद्र और राज्य सरकारों को है। वहीं जान हथेली पर ले कर आम जनता के सामने सच्चाई लाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज की जाती है। भारतीय महिला फेडरेशन की दिल्ली इकाई इन साथियों की बहादुरी पर उन्हें बधाई और धन्यवाद देती है वहीं उनके खिलाफ दर्ज हुई इस बेबुनियाद FIR को तुरंत वापस लेने की मांग सरकार से करती है”।
वहीं कई महिला सामाजिक कार्यकर्ताओं ने NFIW का समर्थन किया है। साथ ही इन्होंने एक ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान चला कर तुरंत FIR रद्द करने की मांग की है।





