भोपाल। कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के समय प्रदेश की रेत खदानों की नीलामी के मामले में अधिक राजस्व मिलने का जो डिंडोरा पीटा गया था, वह अब थोथा साबित हो रहा है। प्रदेश में हालत यह है कि 14 सौ खदानों में से अब तक सिर्फ 575 खदानों से ही खनन शुरू हो पाया है। इसकी वजह से सरकार को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल पा रहा है। इस बीच तमाम जिलों के ठेकेदारों ने घाटे के चलते खदानों से हाथ खींचना शुरू कर दिया है, जिसकी वजह से प्रदेश सरकार की परेशानी दोगुनी हो गई है। रेत ठेकेदारों का हाथ खींचने की बड़ी दो वजहें। पहली पर्यावरण के फेर में खदानों का शुरू न हो पाना और दूसरा प्रदेश में बड़ी मात्रा में अवैध उत्खनन होना। इसके चलते ही अब तक महज प्रदेश की खदानों से बीते आठ माह के कार्यकाल में 1.40 करोड़ घन मीटर रेत निकाली गई है। यह मात्रा प्रदेश की एक साल की आवश्यकता से बहुत अधिक है। बताया जाता है कि प्रदेश की इन नीलाम की गई रेत खदानों में 8 करोड़ घन मीटर रेत का भंडार है। दरअसल सरकार द्वारा बीते साल तीन सालों के लिए रेत खदानों के ठेके किए गए थे। इन तीन सालों में कुल चार करोड़ घन मीटर रेत निकालने का ठेका दिया गया है।
पर्यावरण मंजूरी बनी मुश्किल
ठेके के एक साल बाद भी प्रदेश की पांच सैकड़ा खदानें शुरू नहीं हो पायी हैं। इसकी वजह है इन खदानों को पर्यावरण स्वीकृति अब तक नहीं मिल पाना। इस बीच ठेकेदारों ने इन खदानों को या तो सरेंडर करना शुरू कर दिया है, या फिर किस्त का भुगतान करना रोक दिया है। इसकी वजह से कई खदानों के अब सरकार द्वारा ठेके निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
इस साल गिरे दाम
बीते वर्ष एक डंपर रेत के दाम राजधानी भोपाल में 45 हजार देने पड़ते थे, लेकिन अब वही रेत उतनी ही मात्रा में 35 हजार रुपए के आसपास मिल रही है। अगर सभी खदानें शुरू हो गई होतीं तो यही रेत करीब 25 हजार रुपए में आसानी से उपलब्ध हो सकती थी।
यह पांच जिले बने परेशानी का सबब
प्रदेश के पांच जिले राज्य सरकार के लिए मुसीबत बने हुए हैं। पहले इन जिलों की खदानों को सरकार कई प्रयासों के बाद जैसे -तैसे नीलाम कर पायी थी। इनमें रायसेन , मंदसौर,अलीराजपुर, आगर मालवा और उज्जैन जिले की रेत खदानें शामिल हैं। अब सरकार द्वारा फिर से इनकी नीलामी के लिए माइनिंग कॉर्पोरेशन के माध्यम से टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इनमें रायसेन ,मंदसौर और अलीराजपुर की खदानों के ठेके इसी हफ्ते ही निरस्त किए गए हैं।





