पाकिस्तान में बाढ़ का कहर जारी है और स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. मानसूनी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और सैकड़ों लोगों की जानें भी गई हैं. इस बीच पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर पानी को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है. हालांकि भारत की ओर से पहले ही पाकिस्तान को नदियों में बाढ़ के संबंध में जानकारी दी गई थी, लेकिन पाकिस्तान का आरोप है कि यह जानकारी सिंधु जल संधि के तहत नहीं दी गई और यह काफी सीमित और अपर्याप्त थी, जिसके कारण बाढ़ की तीव्रता और समय का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो गया.
भारत ने राजनयिक माध्यम से दी बाढ़ की जानकारी
पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने कहा कि भारत ने जब बाढ़ की सूचना राजनयिक चैनल के माध्यम से पाकिस्तान को दी, तो इसके तीन प्रमुख संदेश थे. पहला, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह सिंधु जल संधि को निलंबित करने के मामले में कोई नरमी नहीं दिखाएगा. दूसरा, यह पाकिस्तान के लिए एक संकेत था कि सिंधु जल संधि को पुनर्जीवित करने के लिए उसकी कोशिशें सफल नहीं होंगी. और तीसरा, यह संदेश दुनिया के सामने था कि भारत ने मानवीय आधार पर सहयोग किया, जिससे यह साबित होता है कि वर्तमान तनावों के बावजूद भारत का मानवीय दृष्टिकोण बरकरार है.
जानबूझकर पानी छोड़ने का आरोप
अब्दुल बासित ने यह भी आरोप लगाया कि भारत ने जानबूझकर नदियों में पानी जमा किया और फिर भारी मात्रा में पानी छोड़कर पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की. उन्होंने इसे जल को हथियार बनाने की नीति करार दिया और कहा कि यह कदम न केवल असंवैधानिक है बल्कि इसे कड़ी निंदा की जानी चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि जलवायु परिवर्तन इस बाढ़ की एक बड़ी वजह है, लेकिन अगर भारत ने सिंधु जल संधि के तहत सहयोग किया होता तो बाढ़ की तबाही को काफी हद तक रोका जा सकता था.
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया और आपत्ति
पाकिस्तान ने स्वीकार किया है कि इस मानसून में भारत ने तवी और सतलुज नदियों के लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की. लेकिन उनका यह कहना है कि भारत ने इस जानकारी को स्थायी सिंधु आयोग (PIC) के बजाय भारत के इस्लामाबाद स्थित उच्चायोग के जरिए भेजा, जो संधि के नियमों के खिलाफ है. पाकिस्तान के अधिकारियों के अनुसार, ये बाढ़ चेतावनियां काफी सीमित और अस्पष्ट थीं, जिनमें केवल ‘उच्च बाढ़’ जैसी सामान्य जानकारी दी गई, जिससे उन्हें बाढ़ के असली पैमाने और समय का सही अनुमान लगाने में दिक्कत हुई.
बाढ़ का पाकिस्तान में प्रभाव और राजनीतिक आरोप
पाकिस्तान के विभिन्न हिस्से बाढ़ की मार झेल रहे हैं, खासकर पंजाब के नारोवाल जिले में हालात बेहद खराब हैं. यहां बाढ़ के कारण हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. इस क्षेत्र के सांसद और पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया और इस दौरान उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि भारत की नीतियों ने इस प्राकृतिक आपदा को और भी बढ़ा दिया है.





