एक लाख पदों पर भर्ती के लिए एक समान परीक्षा होगी, सीएम मोहन यादव ने उज्जैन में की घोषणा
उज्जैन। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि मध्यप्रदेश में सरकारी विभागों के एक लाख पदों की भर्ती एक समान परीक्षा से होगी। यूपीएससी की तर्ज पर एक कामन एग्जाम के जरिए चार-पांच श्रेणियों के पदों को भरा जाएगा, जिससे समय बचेगा और युवाओं को एकीकृत अवसर मिलेंगे।
यह पहल भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाने की दिशा में मील का पत्थर होगी।मुख्यमंत्री शुक्रवार को अपने गृह नगर उज्जैन में प्रतिकल्पा काम्प्लेक्स, शिप्रा विहार वाणिज्यिक केंद्र और एमआर-11 रोड़ जनता को समर्पित कर रहे थे।
उन्होंने 371 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर शहरीकरण के भविष्य का रोडमैप प्रस्तुत किया। यह आयोजन केवल उज्जैन नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए आधुनिक, समावेशी और नागरिक सुविधाओं से युक्त नगरीय माडल की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
माता मंदिरों का होगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने हरसिद्धि शक्तिपीठ और भूखी माता मंदिर परिसर के विस्तार का विस्तार करने की घोषणा भी की। कहा कि 850 करोड़ से इंदौर-उज्जैन मेट्रो परियोजना धरातल पर उतरना है। प्रदेश सरकार से केंद्र सरकार को फाइल योजना स्वीकृति के लिए भेज दी है। उन्होंने दुबई और स्पेन यात्रा के जरिए नए औद्योगिक निवेश को लाने का भरोसा भी जताया।
स्मार्ट सड़क और ट्रैफिक समाधान
16 करोड़ रुपये से विकसित एमआर-11 स्मार्ट रोड उज्जैन के इंदौर और देवास रोड को जोड़ने वाला एक वैकल्पिक कारिडोर है। 1.7 किमी लंबी और 45 मीटर चौड़ी यह सड़क हरियाली, स्ट्रीट लाइटिंग और सेंट्रल डिवाइडर जैसी सुविधाओं से सुसज्जित है। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
शैक्षणिक अधोसंरचना में ऐतिहासिक निवेश
मुख्यमंत्री ने विक्रम विश्वविद्यालय परिसर में 49.20 करोड़ रुपये से बनने वाली विभिन्न अध्ययनशालाओं, स्किल लैब्स, हास्टल और कम्प्यूटर भवनों का भूमि पूजन किया। इससे उज्जैन में विज्ञान, तकनीक और कृषि शिक्षा को मजबूती मिलेगी। साथ ही माधव कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय और कालिदास कन्या महाविद्यालय में बने नए प्रयोगशालाओं, अतिरिक्त कक्षों और छात्रावासों का भी लोकार्पण किया गया, जो छात्राओं के लिए बड़ी सौगात है।
हनी ट्रैप मामले में पूर्व सीएम और गोविंद सिंह को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
इंदौर: हनी ट्रैप मामले में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति विनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता कोई ठोस प्रमाण या वीडियो फुटेज कोर्ट में पेश नहीं कर सका, जिससे पूर्व सीएम के खिलाफ कोई प्रथम दृष्टया मामला बनता हो।

यह जनहित याचिका अधिवक्ता भूपेंद्र सिंह कुशवाह द्वारा वर्ष 2023 में दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कमलनाथ ने कथित रूप से यह बयान दिया था कि उन्होंने हनी ट्रैप कांड के वीडियो देखे हैं और उनके पास भाजपा नेताओं की पेन ड्राइव मौजूद है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि अगर पूर्व मुख्यमंत्री के पास ऐसे महत्वपूर्ण साक्ष्य थे, तो उन्होंने इन्हें जांच एजेंसी या एसआईटी को क्यों नहीं सौंपा। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री पर तथ्यों को दबाने और जांच में बाधा डालने के आरोप लगाए गए थे।
हालांकि, सुनवाई के दौरान जब अदालत ने याचिकाकर्ता से उक्त बयान के प्रमाण मांगे, तो वह कोई वीडियो या ऑडियो फुटेज प्रस्तुत नहीं कर सका। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कई टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में यह खबरें प्रकाशित और प्रसारित हुई थीं। लेकिन अदालत ने साफ किया कि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप नहीं लगाए जा सकते, खासकर जब वे आरोप सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति के खिलाफ हों। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों की पुष्टि करने के लिए कोई दस्तावेज या प्रमाण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया।
ये था पूरा मामला
हनी ट्रैप मामला सितंबर 2019 में इंदौर में तब सामने आया था जब नगर निगम के तत्कालीन मुख्य अभियंता हरभजन सिंह ने पुलिस को ब्लैकमेलिंग की शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार, कुछ युवतियों ने उन्हें आपत्तिजनक वीडियो के जरिये ब्लैकमेल कर 3 करोड़ रुपये की मांग की थी। पुलिस ने इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था, जिनमें छह महिलाएं शामिल थीं। इनमें आरती, मोनिका, दोनों श्वेताएं, बरखा और गाड़ी चालक ओमप्रकाश कोरी नाम सामने आए थे। इसके अतिरिक्त अभिषेक ठाकुर और रूपा को भी आरोपी बनाया गया था।
जांच में सामने आया था कि यह गिरोह हाई-प्रोफाइल अधिकारियों को फंसा कर ब्लैकमेल करता था। बीएससी छात्रा मोनिका के माध्यम से इंजीनियर हरभजन सिंह को फंसाया गया था और इंदौर के एक होटल में वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल किया गया। जब चौथी बार पैसे मांगने के लिए आरोपी महिलाएं पहुंचीं, तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।
एमपी ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025: CM मोहन यादव ने दी करोड़ों की सौगात
इंदौर: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को ‘मध्यप्रदेश ग्रोथ कॉन्क्लेव 2025’ में राज्य के 5 प्रमुख क्षेत्रों के लिए 12,360 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की शुरुआत अभय प्रशाल में विद्यार्थियों को कॉपी वितरण से की। इसके बाद उन्होंने ‘एक बगिया मां’ योजना के तहत भूमि पूजन किया और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने होटल, पर्यटन, रियल स्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के करीब 20 प्रमुख निवेशकों से वन-टू-वन संवाद किया।
कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा यह ग्रोथ कॉन्क्लेव केवल एक निवेश आयोजन नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के उज्ज्वल शहरी भविष्य की बुनियाद है। आज के निवेश प्रस्ताव आने वाले कल के रोजगार हैं। हम मध्य प्रदेश को ऐसा राज्य बनाना चाहते हैं, जहां हर वर्ग को अवसर, सुविधा और सुरक्षित जीवन मिले।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में मेट्रो से लेकर मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट, झील संरक्षण, स्मार्ट कमांड सेंटर जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर काम शुरू हो चुका है। उन्होंने कहा कि शहरों का सतत विकास हमारी प्राथमिकता है। आधुनिक और स्मार्ट शहरों के निर्माण के लिए हमने अधोसंरचना, स्वच्छता, परिवहन और आवास पर समन्वित कार्य योजना तैयार की है। भोपाल और इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट्स को तेज़ी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित किए जा रहे हैं।
स्वच्छता अवॉर्ड को लेकर नीति में बदलाव के संकेत
कार्यक्रम के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर की स्वच्छता उपलब्धियों को लेकर कहा कि, इंदौर ने लगातार सात बार देश में स्वच्छता में पहला स्थान हासिल किया है। इस बार आठवीं बार अवॉर्ड को लेकर केंद्र सरकार विचार कर रही है कि इसे फिर से इंदौर को दिया जाए या नहीं। उन्होंने कहा कि अब सरकार की योजना ‘ट्यून सिटी’ मॉडल लाने की है, जिसमें इंदौर के साथ किसी अन्य शहर की तुलना होगी। यदि दूसरा शहर स्वच्छता के स्तर पर इंदौर की बराबरी कर लेता है, तब अवॉर्ड मिलेगा।
वन विभाग पर नाराजगी भी जताई
‘एक बगिया मां’ कार्यक्रम के दौरान विजयवर्गीय ने मंच से वन विभाग की भूमिका पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा, अब तक 7 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं, लेकिन जितना सहयोग वन विभाग से मिलना चाहिए था, उतना नहीं मिल पाया है। मैं मुख्यमंत्री से निवेदन करूंगा कि विदेश दौरे पर जाने से पहले इस संबंध में आवश्यक निर्देश दें।
हुकुमचंद मिल के पुनर्विकास को मिलेगी गति
सीएम डॉ. यादव ने इस अवसर पर यह भी कहा कि हुकुमचंद मिल की भूमि के पुनर्विकास को अब प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार औद्योगिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को भी संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
ई-बस योजना से जुड़ेंगे 6 शहर
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस योजना के अंतर्गत प्रदेश के छह प्रमुख शहरों में 582 इलेक्ट्रिक बसें शुरू की जाएंगी। इसे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था बेहतर होगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।

कार्टूनिस्ट की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट; RSS और PM पर बनाए थे
आरएसएस और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित कार्टून साझा करने वाले कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। उनकी याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई होगी। इससे पहले मंगलवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हेमंत की याचिका खारिज कर दी थी। इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय ने हाल ही में आरएसएस और पीएम मोदी को लेकर विवादित कार्टून बनाए थे। अधिवक्ता और आरएसएस के स्वयंसेवक विनय जोशी ने हेमंत मालवीय के खिलाफ शिकायत की थी। हेमंत की अग्रिम जमानत याचिका को मंगलवार को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।
यमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने हेमंत मालवीय द्वारा दायर याचिका पर 14 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की। मालवीय की अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि मामला एक कार्टून से संबंधित है, जिसे मालवीय ने 2021 में कोविड के दौरान बनाया था और उच्च न्यायालय ने कहा कि अर्नेश कुमार और इमरान प्रतापगढ़ी जैसे ऐतिहासिक मामलों, जो जीवन और स्वतंत्रता से संबंधित थे, का पालन नहीं किया जाएगा। उच्च न्यायालय ने कार्टूनिस्ट की निंदा की है। ग्रोवर ने कहा कि यह अपराध बीएनएस के अंतर्गत आता है, जिसके लिए अधिकतम तीन वर्ष की सजा का प्रावधान है।
इंदौर के कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय ने हाल ही में आरएसएस और पीएम मोदी को लेकर विवादित कार्टून बनाए थे। अधिवक्ता और आरएसएस के स्वयंसेवक विनय जोशी ने हेमंत मालवीय के खिलाफ शिकायत की थी। इसमें कहा गया था कि उन्होंने फेसबुक पर हेमंत मालवीय की प्रोफाइल देखी, जहां यह कार्टून पोस्ट किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सामग्री जानबूझकर आरएसएस और हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के उद्देश्य से साझा की गई है। साथ ही प्रधानमंत्री और भगवान शिव पर की गई टिप्पणियों को समाज में तनाव फैलाने वाला बताया।
विवादित कार्टून में आरएसएस को उसकी पारंपरिक वर्दी (खाकी हाफ पैंट और सफेद शर्ट) में मानव रूप में दर्शाया गया था, जो झुककर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खड़ा है। पीएम मोदी को स्टेथोस्कोप और इंजेक्शन के साथ दिखाया गया, जो वह आरएसएस के पीछे लगा रहे हैं। इसके साथ ही भगवान शिव पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी जोड़कर पोस्ट को अधिक अपमानजनक बना दिया गया था।
शिकायत के बाद हेमंत मालवीय ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अग्रिम याचिका दायर की थी। मालवीय की ओर से अदालत में यह तर्क दिया गया कि उन्होंने यह कार्टून महज हास्य-व्यंग्य के उद्देश्य से अपने फेसबुक पेज पर साझा किया था। मंगलवार को जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकल पीठ ने मालवीय की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। पीठ ने माना कि यह मामला “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” की सीमाएं लांघता है और आरोपी की पुलिस कस्टडी में पूछताछ जरूरी है।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले
हेमंत मालवीय के खिलाफ इससे पहले हरिद्वार के कनखल थाने में बाबा रामदेव ने भी एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी की मां के निधन पर मालवीय द्वारा की गई एक पोस्ट को लेकर भी आपत्ति जताई गई थी। उस समय भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा द्वारा थाने में शिकायत की गई थी, जिसके बाद मालवीय पर धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

गर्भवती महिला लीला ने की सड़क की मांग, भाजपा सांसद बोले- तारीख बताओ… उठवा लेंगे; मंत्री भी यह कह गए
मध्य प्रदेश के सीधी जिले की एक गर्भवती महिला लीला साहू ने गांव की कच्ची और कीचड़ भरी सड़कों की समस्या को लेकर एक बार फिर आवाज उठाई है। नौ महीने की गर्भवती लीला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने बताया कि सड़क की कमी के कारण अस्पताल जाना उनके लिए कितना जोखिम भरा है। लीला का वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा और पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के अजीब-गरीब बयान सामने आए।

सांसद मिश्रा ने लीला से उनकी डिलीवरी की तारीख पूछते हुए कहा- तारीख बताओ, हम तुम्हें उठा लेंगे। वहीं, मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि कोई भी कुछ सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देगा तो क्या हम उसकी हर मांग मान लेंगे। पीडब्ल्यूडी या किसी भी विभाग के पास इतना बजट नहीं होता कि किसी सोशल मीडिया पोस्ट पर हम डंपर या सीमेंट-कंक्रीट लेकर सड़क बनाने पहुंच जाएं। भाजपा के दो बड़े नेताओं के ऐसे बयान सामने आने के बाद प्रदेश में सियासी माहौल भी गरमा गया है।
दरअसल, सीधे जिले में रहने वाली लीला साहू गर्भवती हैं। उनकी डिलीवरी का समय भी लगभग पूरा हो चुका है। लीला पिछले करीब एक साल से अपने गांव में पक्की सड़क की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक उनकी मांग अनसुनी रही। लीला ने कहा, मैंने भाजपा को वोट दिया, लेकिन सड़क का वादा पूरा नहीं हुआ। डबल इंजन सरकार से उम्मीद थी, पर हमें सिर्फ बहाने मिले। अपने वीडियो में लीला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से अपील करते हुए कहा कि उनके गांव तक सड़क बनाई जाए, जिससे उनकी और उनके बच्चे की जान को कोई खतरा न हो।

सांसद डॉ. राजेश मिश्रा का पूरा बयान पढ़िए
लीला का वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा और पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह के बयान सामने आए। सांसद मिश्रा ने कहा, सड़क बनने में समय लगता है। अलग-अलग कारणों से कई बार काम रुक जाता है। खाम वाली सड़क पिछले 10 साल से बन रही है, अब भी थोड़ा-बहुत काम बाकी है। जंगल की वजह से रुकावटें आती हैं। सड़क कोई विश्वकर्मा नहीं बनाते कि हाथ फैलाया और चमत्कार हो गया। रामायण में देखा था कि विश्वकर्मा ने चमत्कार से नई नगरी बना दी थी, लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं होता। मुझे दुख है कि कांग्रेस को कोई नेता नहीं मिल रहा, इसलिए वे एक गर्भवती महिला को राजनीति का मोहरा बना रहे हैं। मुझे कांग्रेस पर तरस आता है। उन्होंने कहा कि लीला साहू जिस सड़क की बात कर रही हैं, वह चुरहट और धोनी विधानसभा को जोड़ती है। सड़क सांसद नहीं बनाता, वह इंजीनियर और तकनीकी टीम बनाती है। पहले सर्वे होता है, फिर डीपीआर बनती है। सड़क बनने में दो-तीन साल का समय लगता है। जिस सड़क की बात हो रही है, उसकी सारी प्रक्रियाएं तय हैं। मीडिया को भी इस बारे में सूचना दी गई है। मुझे इस पर क्यों घेरा जा रहा है? बात डिलीवरी की है तो उस गांव में और भी कई महिलाएं होंगी, जिनकी डिलीवरी हो चुकी होगी। हमारी सरकार हवाई सेवा के माध्यम से भी मरीजों को अस्पताल पहुंचा रही है और इलाज भी करवा रही है। एंबुलेंस और आशा कार्यकर्ताएं है, हम व्यवस्था करेंगे। डिलीवरी की संभावित तारीख होती है। बताएं तो एक हफ्ते पहले हम उन्हें उठा लेंगे। यदि लीला जी की इच्छा हो तो वे आकर भर्ती हो सकती हैं। सरकार की ओर से भोजन और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जाती हैं। इस तरह की बातों से केवल सोशल मीडिया में छाने की कोशिश की जाती है। यदि ऐसा हो तो हर गांव में यही स्थिति बन जाएगी। सवाल यह है कि उठता है कि मुझसे पहले जो कांग्रेस के नेता यहां थे, उन्होंने उस सड़क के लिए क्या किया?

मंत्री राकेश सिंह क्या बोले?
पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने कहा, “ऐसे कई स्थान हैं जहां लोगों द्वारा सड़क निर्माण की मांग की जा रही है। लेकिन किसी भी विभाग, चाहे वह पीडब्ल्यूडी हो या अन्य, के पास इतना बजट नहीं होता कि किसी की सोशल मीडिया पोस्ट पर हम तुरंत सीमेंट, कंक्रीट या डंपर लेकर सड़क बनाने पहुंच जाएं। उन्होंने कहा, कौन-सी सड़क कौन-सा विभाग बनाएगा, इसकी अपनी तय प्रक्रिया होती है। विभागों की अपनी सीमाएं हैं। अगर, कोई भी सोशल मीडिया पर कुछ भी मांग पोस्ट कर देगा, तो क्या हम हर मांग को तुरंत मांग लेंगे? ऐसा संभव नहीं है।

ओंकारेश्वर में बदली दर्शन व्यवस्था, VIP दर्शन सिर्फ प्रोटोकॉल से
श्रावण मास 2025 में 14 जुलाई से 28 अगस्त तक कुल छह सोमवार पड़ रहे हैं। इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं के ओंकारेश्वर पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने विशेष तैयारियां की हैं। एसडीएम शिवम प्रजापति के निर्देशन में दर्शन व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, घाटों की सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और वीआईपी व्यवस्था पर विस्तृत योजना बनाई गई है।
दर्शन व्यवस्था
सप्ताह के शनिवार, रविवार और सोमवार को विशेष दर्शन प्रबंध रहेंगे। वीआईपी दर्शन सिर्फ प्रोटोकॉल से ही होंगे। स्थानीय लोगों के लिए प्रातः 9:00 बजे तक विशेष दर्शन की सुविधा रहेगी। उसके बाद आम श्रद्धालु की तरह लाइन में लगना होगा। भीड़ को देखते हुए दोपहर 12:20 से 1:20 तक मंदिर बंद रहता था, जिसका समय कम कर दिया गया है। अब मंदिर जल्दी खोला जाएगा, ताकि दर्शन में कोई अवरोध न हो। ट्रस्ट की ओर से पहले से लागू नये सिस्टम से श्रद्धालु अब काफी अभ्यस्त हो चुके हैं।
विज्ञापन

स्वास्थ्य सेवाएं
मंदिर ट्रस्ट की ओर से तीन डॉक्टर नियमित रूप से तैनात रहेंगे। एक अतिरिक्त डॉक्टर जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। सभी प्रमुख घाटों पर ऑक्सीजन सिलिंडर और प्राथमिक उपचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

घाटों और सुरक्षा प्रबंध
घाटों पर सुरक्षा नाव तैनात की जाएंगी।
नगर परिषद को अनाउंसमेंट सिस्टम लगाने के निर्देश।
कोटवार, पटवारी, आरआई आदि की घाटों पर ड्यूटी सुनिश्चित की जाएगी।
ओंकारेश्वर नर्मदा नदी में नौका विहार में डीजल इंजन नावों पर रोक, केवल पेट्रोल चालित नए इंजन वाली नावों को अनुमति।

यातायात प्रबंधन
ऑटो रिक्शा को नगर की सीमा में प्रवेश नहीं मिलेगा।
ऑटो स्टैंड: दंडी आश्रम, पुराने बस स्टैंड और बालवाड़ी तक सीमित।

सिर्फ इनको मिलेगी अनुमति
श्रद्धालु और कांवड़िए सावन माह में बड़ी संख्या में जल अर्पित करने ओंकारेश्वर पहुंचेंगे। इसलिए इंदौर खंडवा इच्छापुर सड़क मार्ग बड़े वाहनों पर प्रतिबंध एक माह तक लागू रहेगा। सभी भारी वाहनों धमनोद खंडवा महाराष्ट्र की ओर जाना होगा। सिर्फ छोटे वाहन कार बस और पेट्रोल-डीजल टैंकरों को निकालने की अनुमति रहेगी। ओंकारेश्वर में गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। मठ मंदिर आश्रम में लोगों ने संत महात्माओं से आशीर्वाद लिया।
मध्य प्रदेश में पीडीएस की सूची से हटाए 20 लाख नाम, अब नए हितग्राही जुड़ेंगे
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के हितग्राहियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए कराई गई ई-केवाईसी में लगभग 20 लाख नाम हटाए गए हैं। अब नई पात्रता सूची जारी होगी यानी इनके स्थान पर इतने ही नए हितग्राही जोड़े जाएंगे।

खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि विभाग ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत सभी पात्र हितग्राहियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए ई-केवाईसी कराने का अभियान चलाया था।
पांच माह में एक करोड़ से अधिक हितग्राहियों की ई-केवाईसी कराई जा चुकी है। इसमें मृत, एक हितग्राही का नाम दो जगह होने, पलायन या अन्य कारण से लगभग 20 लाख हितग्राहियों के नाम हटाए गए हैं।
उधर, आयुक्त खाद्य कर्मवीर शर्मा का कहना है कि प्रदेश में पात्र हितग्राही 5.32 करोड़ हैं। 90 प्रतिशत हितग्राहियों का ई-केवाईसी हो चुका है। अब 20 लाख नए पात्र हितग्राहियों को जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा।
छह-छह माह से नहीं लिया राशन
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई उपभोक्ता प्रतिमाह राशन लेने नहीं आते हैं। जो खाद्यान्न शेष रहता है, उसे दुकान संचालक द्वारा सुरक्षित रखा जाता है, लेकिन कई उपभोक्ता छह-छह माह से खाद्यान्न लेने ही नहीं आ रहे हैं। इनके नाम उचित मूल्य की दुकान के बाहर सूचना पटल पर चस्पा भी किए गए। इसके बाद भी वे खाद्यान्न लेने नहीं आए इसलिए इनके नाम सूची से हटाए गए हैं।




