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स्वतंत्रता सैनानियों ने सम्पूर्ण देश को स्वतंत्रता दिलवाई

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शशिकांत गुप्ते

आज सीतारामजी ने मुझे कॉल किया और कहा आप आइए, गम्भीर विषय पर चर्चा करनी है।
मै सीतारमजी के घर पहुँचा।
आपस में नमस्ते का आदान प्रदान होने के बाद मैने पूछा,किस गम्भीर विषय पर चर्चा करनी है?
सीतारामजी ने कहा वर्तमान में देश का वातावरण बहुत चिंतनीय बना हुआ है।
मैने अपनी सहमति प्रकट करते हुए पूछा अपन क्या कर सकतें हैं?
सीतारामजी ने आप आम भारतीय की तरह मुद्दे को सुने बिना Avoid कर रहे हो, मतलब टाल रहे हो।
यह कहतें हुए सीतारामजी मानसिक रूप से अतीत में चले गए। कहने लगे स्वतंत्रता पूर्व यदि हमारे स्वतंत्रता सैनानी भी यह सोचतें की अपन क्या कर सकतें हैं तो क्या हमें आजदी मिलती?
सीतारामजी ने कहा यूँ तो आजादी के आंदोलन का इतिहास बहुत व्यापक और बहुत अविस्मरणीय है। आजादी के आंदोलन के कुछ अंश याद आ रहें हैं। इन अंशो को याद करना आज बहुत जरूरी हो गया है।
इतना कहने के बाद सीतारामजी व्यथित हो कर कहने लगे स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास पढ़ो तो समझ में आता है कि,उन वीरों में आजादी प्राप्त करने का कितना जुनून था।
सन 1947 के पूर्व के स्वतंत्रता संग्राम को बार बार याद करना चाहिए।
मात्र 15 वर्ष की आयु में चंद्रशेखर आजाद स्वतंत्रता संग्राम में शरीक हो गए थे। ब्राह्मण परिवार में जन्मे आजाद की माँ आजाद को संस्कृत पढ़ना चाहती थी।
लेकिन आजाद ने स्वतंत्रता संग्राम का पाठ पढ़ा। गिरफ्तारी के बाद न्यायालय में जब उनसे नाम पूछा गया तो उन्होंने बताया अपना नाम आजाद बताया। माँ का नाम स्वतंत्रता और निवास जेल बताया।
काकोरी कांड के वीर सिपाही रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान इन दोनों को इनके अन्य साथियों के साथ फिरंगी हुकूमत ने फाँसी की सजा दी। इन वीरों ने काकोरी कांड को अहिंसक रूप से अंजाम दिया था। लेकिन गलती से आजादी के दीवानों में से किसी एक के द्वारा एक अंग्रेज मारा गया तो इन हिंसा के विरोधी क्रांतिकारियों को बहुत अफसोस हुआ था।
राम्प्रसादबिस्मिल और अशफाक उल्ला खान इन दोनों की दोस्ती हिन्दू-मुस्लिम एकता की महत्वपूर्ण मिसाल है।
शहीदे आजम भगतसिंग ने अपने साथियों के साथ सभागृह में बम का धमाका किया और बहादुर सिपाही की तरह वहाँ से भागे नहीं। भगतसिंह ने बम का धमाका सिर्फ अंग्रजो को डराने के
लिए किया था। हिंसा करना उनका लक्ष्य नहीं था।
सीतारामजी बहुत ही गम्भीर होकर कहने लगे,आज 1947 के पूर्व के इतिहास पर अनावश्यक टिका टिपण्णी की जा रही है।
अपने देश के इतिहास में जयचंद भी हुए हैं। जयचंद एक मानसिकता है।
स्वतंत्रता संग्राम में शिरकत कर शहादत देने वाले सैनानियों ने भारत देश को आजाद किया है।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आजद हिन्द फ़ौज बनाने वाले, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस ने महात्मा गांधीजी को सर्वप्रथम राष्ट्रपिता कहा है।
गांधीजी के लिए विश्व विख्यात वैज्ञनिक ने कहा इतिहास में लिखा जाएगा कि एक इकहरे कदकाठी का व्यक्ति भी इतनी बड़ी क्रांति कर सकता है।
हमारे स्वतंत्रता सैनानियों ने अपने देश की आन,बान और शान तिरंगे झंडे का सन्माम किया है।
विश्व विजयी तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहें हमारा
तिरंगा झंडा हाथों में थामे उक्त गीत गाते हुए आंदोलन किया।
सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है यह बार बार स्मरण करना चाहिए, आंदोलनकारियों ने सम्पूर्ण भारत को स्वतंत्रता दिलवाई।
अनेकता में एकता यही तो भारत की विशेषता है।
सीतारामजी की बात सुनकर मैने कहा सच में आजादी के आंदोलन का इतिहास पढ़ने पर वर्तमान वातावरण सच में बहुत चिंतनीय लगता है।
मैने कहा वातावरण को स्वच्छ करने के लिए एक ही उपाय है।
किसी ने क्या खूब कहा है।
गंदा नाला साफ करों,मच्छर मारने के दवाइयां मत बनाओ

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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