-सुसंस्कृति परिहार
जिस तरह से प्रकृति करवट लेने की तैयारी में है ठीक उसी तरह देश की अवाम भी अब वसंत की अगवानी हेतु तैयार हो रही है यूं तो राहुल गांधी की वय वासंती नहीं है किंतु उन्होंने ठिठुरते गणतंत्र को बचाने हेतु जिस जोशीले भारत जोड़ो न्याय यात्रा का आगाज़ किया है वह इस अंधेरे और दबे-कुचले वक्त में संजीवनी की तरह है। तमाम लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं जब ध्वस्त होने की दशा में पहुंच रही है लोगों का विश्वास लोकतंत्र की जगह, राम भरोसे करने की पूरी तैयारी चल रही हो। नेताओं का ज़मीर ख़त्म होता जा रहा हो।ऐसे ठंडे समय में एक ऊर्जावान वसंत की तासीर लिए राहुल गांधी मौजूद है जो गांधी के रास्ते चलते हुए देश को इन संकटापन्न स्थितियों से उभारने की क्षमता रखता है। आईए वसंत के स्वागत हेतु तत्पर हो जाएं।
आने वाले वसंत की ऊर्जा का अहसास इसी बात से चलता है कि वह निर्भय है और लोगों को ‘डरो मत-सहो मत’का मूलमंत्र बांट रहा है।वह सिर्फ गांधी नामधारी नहीं है वह गांधी को आत्मसात कर चुका है। सामाजिक सद्भाव की उसकी कोशिश को नया नाम देकर वह जगह-जगह नफ़रत के दरवाज़े बंद कर मोहब्बत की दूकान खोल रहा है। सत्ता की लिप्सा से दूर रहकर भारत में एक नया वसंत लाने वह प्रतिबद्ध है इसलिए इंडिया गठबंधन पर भी ज़ोर है। नीतीश जैसे डरपोक चिरकुटों के जाने से वह घबराता नहीं।उसकी कोशिश है देश को सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते एकजुट करना।
सेवेन सिस्टर्स में से नागालैंड, मणिपुर,मेघालय,अरुणाचल और असम में जो स्नेह और संबल इस यात्रा को मिला वह बहुमूल्य है। खासतौर पर मणिपुर में डबल इंजन सरकार ने जो कहर बरपाया और फिर केन्द्र ने जिस तरह मुंह फेरा उसके गाल पर एक मजबूत थप्पड़ इस यात्रा ने मारकर मणिपुर के ज़ख़्म भरने की कोशिश की हैं। असम में न्याय यात्रा के विरोध में जो वातावरण बनाया गया उसका उल्टा असर हुआ। राहुल गांधी की लोकप्रियता वहां बढ़ी है। बंगाल का उत्तरी हिस्सा भी राहुलमयी दिखाई दिया। यात्रा बिहार में किशनगंज से प्रवेश की। अंदेशा था, शायद नीतीश भक्त गड़बड़ करेंगे लेकिन राहुल में विश्वास लिए हज़ारों हज़ार लोगों ने राहुल को हाथों हाथ लिया है यही हाल अररिया, पूर्णिया में देखा गया किसानों , युवाओं और बच्चों के बीच उनकी लोकप्रियता देखते बनती थी। बंगाल के कूच बिहार और मालदा का हाल भी लगभग एक सा था ।अभी यात्रा के सिर्फ़ 15-16 दिन ही गुज़रे हैं।
ये सब स्थितियां इस बात की प्रतीक हैं कि भाजपाई अवरोधों के बावजूद यात्रा अपने गंतव्य की ओर बढ़ रही है और वह अपने मंतव्य को पूरा भी करेगी। राहुल की इस ताकत को भाजपा ने भली-भांति जान लिया है इसलिए यात्रा की राह में आने वाले राज्यों के विपक्षी मुख्यमंत्रियों को बदलने, कमज़ोर करने की कवायद ज़ोर शोर से चल रही है पर यह सत्य है कि कवायद उनके लिए ही भारी पड़ने वाली है। इसका उदाहरण बिहार ही है जहां अब जेडीयू ही समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया है।
कहा जाता है जब जब भारत की सांस्कृतिक पहचान पर संकट आया है तो भगत सिंह ,अश्फ़ाक, बिस्मिल जैसे लोगों ने मेरा रंग दे बसंती चोला के साथ देश को नई दिशा दी है।आज देश फिर युवाओं के भरोसे है। उसमें यह भारत जोड़ो न्याय यात्रा एक नया वसंत लाने की तैयारी में कटिबद्ध है। आइए सूर्य कांत त्रिपाठी निराला को याद करते हुए यह अभियान बढ़ाएं जो बहुत पहले वीणा वादिनी वर दे के ज़रिए सम्यक बदलाव की बात कर चुके हैं वे वीणा वादन करती हुई मां सरस्वती से कहते हैं -वीणा वादिनी वर दे,
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृतमंत्र रव/ भारत में भर दे!/काट अंध-उर के बंधन-स्तर/बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;/कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर/ जगमग जग कर दे!/नव गति, नव लय, ताल-छंद नव/नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;/नव नभ के नव विहग-वृंद को/नव पर, नव स्वर दे /वर दे, वीणा वादिनि वर दे।
उम्मीद है नये वसंत में सब कुछ नया होगा। बदलाव होगा।अंधे हृदय के बंधन कट जाएंगे। आईए वसंत का स्वागत करें।देशवासियो,वसंत को आने दें और उसके साथ वसंतमय हो जाएं। शुभकामनाएं।-तम हर प्रकाश भर/ जगमग जग कर दे!/नव गति, नव लय, ताल-छंद नव/नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;/नव नभ के नव विहग-वृंद को/नव पर, नव स्वर दे /वर दे, वीणा वादिनि वर दे।
उम्मीद है नये वसंत में सब कुछ नया होगा। बदलाव होगा।अंधे हृदय के बंधन कट जाएंगे। आईए वसंत का स्वागत करें।देशवासियो,वसंत का इस्तकबाल करें और उसके साथ वसंतमय हो जाएं। वह पूरे जोश में हैं।शुभकामनाएं।





