इंदौर शहर अपनी साफ-सफाई और खानपान के अलावा अपने कलाकारों की वजह से भी बहुत मशहूर है. यहां से एक से बढ़कर एक ऐसे कलाकार निकले हैं जिन्होंने न सिर्फ देश बल्कि विदेश में भी अपनी अलग छाप छोड़ी है.
इंदौर ने न केवल अपनी स्वच्छ हवा और ज़ायकेदार खान-पान के लिए पहचान बनाई है, बल्कि यह वह पवित्र भूमि है जहां से विश्व भर में नाम कमाने वाली कई महान हस्तियों ने अपनी यात्रा शुरू की और दुनिया में काम से अपना नाम बनाया . कैसे इस छोटे से शहर के सपूतों ने कला, खेल और साहित्य के क्षेत्र में इंदौर का नाम रोशन किया, आइए जानते हैं.

इसमें सबसे पहला नाम है स्वर कोकिला लता मंगेशकर जी का, जिनका जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था. उन्हें भारत की नाइटेंगल भी कहा जाता है, उन्हें 2001 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’से सम्मानित किया गया था.

स्टैंड अप कॉमेडियन जाकिर खान इंदौर से ताल्लुक रखते हैं, 20 अगस्त 1987 को उनका जन्म इंदौर में हुआ था, उनका डायलॉग सख्त लौंडा और चाचा विधायक हैं हमारे काफी प्रचलित हुए, जाकिर कॉमेडी की दुनिया में एक बड़ा नाम हैं. 2012 में कॉमेडी सेंट्रल इंडिया का खिताब भी वह जीत चुके हैं. हाल ही में उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े इनडोर ऑडिटोरियम में से एक मेडिसिन स्क्वेयर गार्डन में अपना शो किया था.

क्रिकेट जगत से आने वाले राहुल द्रविड़ का जन्म 11 जनवरी 1973 को इंदौर में हुआ था, उन्हें क्रिकेट जगत में उनके शांत स्वभाव, अटूट दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट बल्लेबाजी तकनीक के कारण ‘द वॉल’के नाम से जाना जाता है. द्रविड़ ने वनडे और टेस्ट मिलाकर भारत को 10000 से ज्यादा रन बनाकर दिए, बतौर कोच रहते हुए 2024 में उन्होंने टीम इंडिया को T20 कप जिताया था.

100 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके सलमान खान का जन्म इंदौर में सन 1965 में हुआ था, सलमान बॉलीवुड के सबसे बड़े अभिनेताओं में से एक है. उनके पिता सलीम खान फिल्म की स्क्रिप्ट्स लिखते थे. फिल्मों के अलावा सलमान का शो बिग बॉस भी काफी हिट प्रोग्राम है, सलमान की लोकप्रियता केवल देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में है खासकर उनके एक्शन सींस लोगों को बेहद पसंद आते हैं.

हिंदुस्तान के शास्त्रीय संगीत के महा पुरोधा उस्ताद आमिर खान भी इंदौर से ताल्लुक रखते थे उनका जन्म 1912 में हुआ था उनकी आवाज़ अत्यंत मधुर और गंभीर थी, जो श्रोताओं को एक गहरी, ध्यानपूर्ण अवस्था में ले जाती थी। उन्होंने शास्त्रीय संगीत के सिद्धांतों को सरल और अधिक सुलभ बनाया, 1967 में भारत सरकार द्वारा ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया। उन्हें आज भी महान गुरुओं में गिना जाता है.





