अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*छिंदवाड़ा के तामिया में गलघोंटू बमारी ने बरपाया कहर. एक ही परिवार के दो बच्चों की मौत*

Share

छिंदवाड़ा : पातालकोट में खतरनाक बीमारी गलघोंटू ने दस्तक दे दी है. आशंका जताई जा रही है कि डिप्थीरिया नामक ये बीमारी पातालकोट के एक परिवार के चार बच्चों में पाई गई है. तामिया अस्पताल से पीड़ित बच्चों को प्राथमिक इलाज के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया था, जिसमें से एक 6 साल के बच्चे की मौत हो गई है. माना जा रहा है कि 6 सला के बच्चे की मौत गलघोंटू से हुई है. वहीं, बाकी तीन बच्चों का जिला अस्पताल की पीआईसीयू में इलाज चल रहा है. तामिया के एक ही परिवार के चार बच्चे डिप्थीरिया यानी गलघोंटू बीमारी से पीड़ित थे, जिनमें से 2 बच्चों की मौत हो गई है. तामिया अस्पताल से पीड़ित बच्चों को प्राथमिक इलाज के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया था. जिला अस्पताल लाते वक्त रास्ते में शुक्रवार को 1 बच्चे की डेथ हो गई थी. तीन बच्चों का जिला अस्पताल की पीआईसीयू में इलाज चल रहा था. रविवार को एक और बच्चे की मौत हो गई.

पीड़ित बच्चों को देखने पहुंचे सांसद, परिजन से मुलाकात
छिंदवाड़ा सांसद बंटी विवेक साहू जिला अस्पताल में पीड़ित बच्चों का हाल-चाल जानने पहुंचे. इसके साथ ही उन्होंने परिजन से भी मुलाकात की. उन्होंने बताया कि, “तामिया के दलेलढाना के दुखलाल काकोडिया के चार बच्चे डिप्थीरिया से जूझ रहे थे. यह बीमारी डिप्थीरिया वैक्टीरिया की वजह से होती है. तामिया अस्पताल से प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया था.”

जिला अस्पताल में दो बच्चों की मौत हो गई. 2 बच्चों का इलाज पीआईसीयू में चल रहा है. भर्ती बच्चों की हालत भी गंभीर बताई जा रही है. डिप्थीरिया (गलघोंटू) से बच्चे की मौत की खबर से स्वास्थ्य में हड़कंप मच गया. स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम तामिया के दूरस्थ ग्राम दलेलढाना पहुंची. यहां पीड़ित परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों की जांच की जा रही है.

बीमारी की वजह से सभी ऑर्गन हो चुके थे फेल
छिंदवाड़ा इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में शिशु रोग विभाग के एचओडी डॉ. पवन नंदूरकर ने बताया कि, ”यह बीमारी डिप्थीरिया कहलाती है, जो वैक्सीन नहीं लगने की वजह से होती है. हो सकता है बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी हो, इसलिए इस बीमारी ने नहीं घेर लिया. एक बच्चे की शुक्रवार को ही डेथ हो चुकी थी और दूसरे बच्चे के किडनी हार्ट और सभी ऑर्गन फैलियर हो चुके थी. लेकिन दो बच्चों का इलाज जारी है.”

क्या है गलघोंटू बीमारी
दुनिया भर में गलघोंटू या डिप्थीरिया बीमारी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है. गलघोंटू बीमारी के लक्षण गले से शुरू होते हैं. गले में संक्रमण, गले की ग्रंथियों में दर्द और सूजन, गले में झिल्ली बनने से सांस लेने में तकलीफ और बुखार और सर्दी-खांसी होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं. इस बीमारी के चलते मरीज के लिवर, किडनी और नर्वस सिस्टम को बेहद नुकसान पहुंचता है. मरीज को सांस लेने में भी दिक्कत होती है.

समय पर वैक्सीन लगाने से डिप्थीरिया से हो सकता है बचाव
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पवन नंदुरकर ने बताया कि, ”डिप्थीरिया से बचाव के लिए बच्चों को वैक्सीन लगाए जाते हैं. जिसमें पहले वैक्सीन डेढ़ महीने दूसरा वैक्सीन ढाई महीने और तीसरा वैक्सीन साढ़े तीन महीने में लगाया जाता है. साथ ही एक बूस्टर डोज 16 महीने में लगाया जाता है और दूसरा बूस्टर डोज 5 से 6 साल की उम्र में लगाया जाता है.” डॉक्टर ने बताया कि ”कम से कम 5 वैक्सीन के डोज लगना अनिवार्य होता है.”

संक्रामक है बीमारी, एक ही परिवार के थे चारों बच्चे
डॉ. पवन नंदूरकर ने बताया कि, ”पीड़ित बच्चे एक ही परिवार के हैं. इस परिवार में कुल 6 बच्चे हैं, जिनमें से चार बच्चों को डिप्थीरिया की बीमारी हुई है. दो बच्चों को इसका असर नहीं हुआ है. हालांकि यह बीमारी संक्रामक है, जब एक बच्चे में हो जाती है तो फिर ड्रॉपलेट्स के जरिए दूसरे में भी जल्दी से फैलती है. खासतौर पर यह बैक्टीरिया गंदी जगह पर होता है.”

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें