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गांधी विचार आज भी दुनिया की नैतिक पूँजी है ,दुनिया आज भी भारत को महात्मा गांधी के नाम से जानती है -झटाले

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महात्मा गांधी आज भी विश्व की नैतिक चेतना..

गांधी विचार आज भी दुनिया की नैतिक पूँजी है : झटाले

इंदौर : महात्मा गांधी की पुण्यतिथि शहीद दिवस के रूप में मनाई गई। अवसर पर लोक संवाद–विचार मंच के तत्वावधान में ‘सामाजिक सदभाव के लिए बलिदान’ विषय पर कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लेखक एवं पत्रकार चंद्रकांत झटाले (अकोला, महाराष्ट्र) ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि दुनिया आज भी भारत को महात्मा गांधी के नाम से जानती है क्योंकि गांधी व्यक्ति नहीं, बल्कि एक नैतिक दृष्टि हैं। मुख्य वक्ता ने कहा कि इतिहास के कठिन क्षणों में भी गांधी ने मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखा। भगतसिंह की फांसी रुकवाने के लिए गांधी द्वारा किए गए प्रयास इसका प्रमाण हैं।

उन्होंने कहा कि गांधी अहिंसा को कायरता नहीं, बल्कि नैतिक साहस मानते थे।इसी नैतिक साहस ने उन्हें सत्ता और विरोध दोनों के बीच खड़े होकर सत्य कहने की शक्ति दी।

डॉ. भीमराव अंबेडकर के संदर्भ में चंद्रकांत झटाले ने कहा कि गांधी ने संविधान-निर्माण के लिए नेहरू से आग्रह किया कि यह दायित्व अंबेडकर को दिया जाए क्योंकि वे गरीब, वंचित और शोषित के दर्द को गहराई से समझते थे। यह गांधी की व्यापक दृष्टि और सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। गांधी का भारत समावेशी था, जहां असहमति भी सम्मान के साथ सुनी जाती थी।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि नाथूराम गोडसे को आज केवल गांधी-हत्या के संदर्भ में ही याद किया जाता है, जबकि गांधी को समझने के लिए किसी नाथूराम की आवश्यकता नहीं पड़ी। गांधी अपने विचारों, अपने आचरण और अपने संघर्षों से जाने जाते हैं। वे आज भी इसलिए प्रासंगिक हैं क्योंकि उन्होंने राजनीति को नैतिकता से जोड़ा और समाज को करुणा से।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश इंटक के अध्यक्ष श्याम सुंदर यादव ने की। मुख्य अतिथि अभ्यास मंडल के अध्यक्ष श्री रामेश्वर गुप्ता रहे। कार्यक्रम इंदौर प्रेस क्लब के सभागृह में संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक, लेखक, पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने कहा कि आज के विभाजित सामाजिक वातावरण में गांधी-विचार पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। कानून, नीति और सार्वजनिक विमर्श में संवेदनशीलता और संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि बिना विचार-विमर्श के उठाए गए कदम समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ते हैं। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि गांधी को केवल स्मृति-दिवसों तक सीमित न रखकर उनके विचारों को दैनिक जीवन, राजनीति और सामाजिक व्यवहार में उतारा जाए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। कार्यक्रम का संचालन शशिकांत गुप्ते ने किया। विषय प्रवर्तन सुभाष रानडे ने किया और आभार राहुल निहोरे ने माना।
कार्यक्रम में अनिल त्रिवेदी, कैलाश लिंबोदिया,ओपी जोशी, फादर लकरा, जीवन मंडलेचा, मिलिंद रावल , प्रकाश पाठक , लक्ष्मी नारायण पाठक आदि उपस्थित थे।

Ramswaroop Mantri

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