फादर !
मुझे सूझ नहीं रहा है
आपको कैसे याद करूं ?
आप के प्रति कैसे
श्रद्धा सुमन अर्पित करूं ?
आपको कैसे सलाम करूं ?
कैसे, आपको अलविदा कहूं ?
मैं उस देश का नागरिक होने पर
शर्मिंदा हूं !
जहां आप जैसे देश के सच्चे सपूत की
आप जैसे खूबसूरत इंसान की
निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई !
आप ने ऐसे देश में जन्म लिया
जहां आप जैसा बेहतरीन इंसान होना ही
अपराधी होना हो गया है !
अन्याय की मुखालफत करना
देशद्रोही होना !
दलितों-आदिवासियों के हक-हकूक लिए लड़ना
माओवादी होना !
आप जैसे ‘अपराधियों ’ की
आप जैसे ‘देशद्रोहियों ’ की
आप जैसे ‘माओवादियों ’ की
बहुत- बहुत जरूरत है, इस देश को
आप जैसा होने का संकल्प ही
आपके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी
आपकी मौत
मौत नहीं हत्या से
लाखों लोग गमनीन हैं !
उनमें से मैं भी एक हूं
आपने जिंदगी का
एक मेयार गढ़ा
मौत का भी
अलविदा फादर !
-सिढार्थ रामू
संकलन _-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवंम् पर्यावरण संरक्षण’,संपर्क -9910629632,ईमेल-nirmalkumarsharma3@gmail.com





