पिछले एक साल से बैंकों में पैसे जमा करने की दिलचस्पी कम हुई है। इस गिरावट को लेकर सरकार भी टेंशन में नजर आ रही है। दरअसल, वित्त मंत्रालय ने बैंकों से ‘कासा’ (चालू खाता और बचत खाता) जमा में सुधार लाने को कहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले एक साल में सरकारी बैंकों का कासा रेश्यो लगातार गिर रहा है, जिससे उनके मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है।
किस बैंक का कितना कासा रेश्यो
देश के सबसे बड़े बैंक, एसबीआई का भी कासा रेश्यो जून तिमाही में पिछले साल के 40.70 प्रतिशत से घटकर 39.36 प्रतिशत हो गया। इसी तरह, बैंक ऑफ बड़ौदा का कासा रेश्यो जून तिमाही में कम होकर 39.33 प्रतिशत हो गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कासा जमा में सुधार से बैंकों को अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को ऋण देने में भी मदद मिलेगी। इसके साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कृषि क्षेत्र के साथ-साथ रोजगार पैदा करने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को ऋण देने में वृद्धि करने का आग्रह किया गया। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को विशेष रूप से कृषि, एमएसएमई क्षेत्रों को कर्ज देने के लिए कहा है, क्योंकि कृषि के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है।
कासा रेश्यो के बारे में जान लीजिए
यह एक बैंकिंग टर्म है, जो यह बताता है कि किसी बैंक की कुल जमाराशि (डिपॉजिट) में से कितना हिस्सा चालू और बचत खाता से आता है। चालू खाता की बात करें तो व्यापारी या बिजनेसवाले इस्तेमाल करते हैं। वहीं, बचत खाते की बात करें तो इसे साधारण ग्राहक भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इन दोनों (चालू+ बचत) की जमाराशि को मिलाकर कासा कहते हैं। कासा रेश्यो से यह पता चलता है कि बैंक की कुल जमा राशि में कितना प्रतिशत हिस्सा कासा (चालू + बचत खाता) से आ रहा है।





