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*राज्य की वेतन प्रणाली से गायब 50,000 ‘कर्मचारियों’ की जांच सरकार ने 3 दिनों में ही कर ली पूरी*

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 करीब 50,000 सरकारी कर्मचारी राज्य की वेतन प्रणाली से गायब हैं,  जबकि उनका डेटा सिस्टम में मौजूद है और उनके कोड्स भी सक्रिय हैं. यही नहीं, ये ‘भूत कर्मचारी’ ₹230 करोड़ से ज्यादा की वेतन देनदारी से जुड़े हो सकते हैं.मध्य प्रदेश में 50,000 ‘भूत कर्मचारियों’ की कहानी में सरकार ने इस मामले में 15 दिनों में खत्म होने वाली जांच की प्रक्रिया को 3 दिनों में पूरा करके अपनी रिपोर्ट दे दी है.

दरअसल, NDTV के हाथ आयुक्त कोष और लेखा की एक चिट्ठी लगी थी. 23 मई को लिखी गई इस चिट्ठी से पता लगा था कि दिसंबर 2024 से हजारों सरकारी कर्मचारियों ने वेतन नहीं लिया, बावजूद इसके उनके एम्प्लॉई कोड अब भी सिस्टम में सक्रिय हैं.

कोई भी फर्जी कर्मचारी नहीं मिला

इसके बाद स्टेट फाइनेंशियल इंटेलिजेंस सेल (SFIC) ने एक राज्यव्यापी डेटा क्लीनिंग अभियान शुरू किया. इस अभियान में प्रदेश भर के DDO (ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर) और कोषालय अधिकारियों को शामिल करते हुए, IFMIS (इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम) में दर्ज सरकारी कर्मचारियों के कोड्स और वेतन रिकॉर्ड्स की गहराई से जांच की गई. इस जांच के बाद अब सरकार दावा कर रही है कि अब तक कोई भी फर्जी या संदेहास्पद कर्मचारी नहीं मिला है.

जांच में ये बात आई सामने

जांच के दौरान सामने आया कि कुल 44,918 सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें 36,081 नियमित और 8,837 अनियमित कर्मचारी हैं, जिन्होंने पिछले छह महीनों से IFMIS के माध्यम से तनख्वाह नहीं ली है. वहीं, 21461 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जिसमें 19,533 नियमित और 1,928 गैर नियमित थे. इसके अलावा, 4,654 कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर थे, जिसमें 4,436 नियमित और 178 गैर नियमित कर्मचारी है. वहीं, 7,764 नियमित और 3,221 गैर नियमित, कुल 10,985 कर्मचारी या तो सेवानिवृत्त हुए, या त्यागपत्र दे दिया या उनकी सेवा समाप्त हो गई. इस दौरान 483 कर्मचारी निलंबित थे, जिनका वेतन नहीं निकल रहा था. साथ ही 1,656 कर्मचारियों का वेतन शासन के निर्देशों के कारण रोका गया था. इसके अलावा, 2,342 कर्मचारी ‘फ्री पूल’ में दर्ज थे. यानी ट्रांसफर या स्थिति बदलने के बाद अब किसी पद पर नहीं हैं. वहीं, 1,022 मामलों में तकनीकी कारण बताए गए हैं और 2,247 कर्मचारी ‘विविध श्रेणी’ में शामिल थे, जिनमें बॉन्डेड डॉक्टर, पंचायत सचिव और ग्रांट इन एड स्टाफ आदि थे.

IFMIS में अब भी सक्रिय हैं एम्प्लॉयी कोड

रिपोर्ट में बताया गया है कि इन सभी श्रेणियों के बावजूद, अधिकांश के एम्प्लॉयी कोड अब भी IFMIS में सक्रिय हैं. कोई एग्जिट एंट्री नहीं हुई, कोई फ्लैगिंग नहीं की गई. यानी तकनीकी तौर पर ये कोड्स अब भी “जिंदा” हैं और कभी भी वेतन जारी किया जा सकता है.

NDTV की पहली रिपोर्ट बनी अलार्म बेल

NDTV ने सबसे पहले यह खुलासा किया था कि करीब 50,000 सरकारी कर्मचारी राज्य की वेतन प्रणाली से गायब हैं,  जबकि उनका डेटा सिस्टम में मौजूद है और उनके कोड्स भी सक्रिय हैं. यही नहीं, ये ‘भूत कर्मचारी’ ₹230 करोड़ से ज्यादा की वेतन देनदारी से जुड़े हो सकते हैं.

तब जवाब नहीं दे पाए थे वित्त मंत्री देवड़ा

जब NDTV ने वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा से इस मुद्दे पर सवाल किया, तो उन्होंने जवाब देने से कतराते हुए सिर्फ इतना कहा: “जो भी प्रक्रिया होती है, वो नियमों के अनुसार होती है…” दूसरे सवाल पर उन्होंने दोहराया, “जो होगा, नियमों के अनुसार ही होगा… ओके… फाइन.” इसके बाद मंत्री जी कैमरे से बचते हुए अंदर चले गए.

सरकार अब उठाएगी ये कदम

NDTV की रिपोर्ट ने जो उजागर किया है. वह इस पूरे सिस्टम की कमजोरियों को सामने लाता है, क्योंकि अगर मृत कर्मचारी, रिटायर्ड कर्मचारी, निलंबित कर्मचारी थे, तो सभी के कोड अब भी सक्रिय क्यों थे. सरकार कह रही है कि यह प्रक्रिया अब सतत रूप से चलती रहेगी और जल्द ही इस शुद्ध डेटा को IFMIS NextGen में माइग्रेट किया जाएगा.


ऐसे सवाल उठता है कि अगर NDTV ने यह रिपोर्ट नहीं की होती, तो क्या किसी ने ध्यान दिया होता? सरकार कह रही है कि अब कोई भी भूत कर्मचारी नहीं है, लेकिन परछाई अब भी सिस्टम पर मंडरा रही है. NDTV अब भी इस पर नज़र बनाए रखेगा, जब तक हर कोड, हर नाम और हर रुपया हिसाब में नहीं आ जाता.

Ramswaroop Mantri

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