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सरकार को देना होगा 20,942 करोड़ ब्याज हर साल

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भोपाल। वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से सरकारी खजाने की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि प्रदेश सरकार को पूरी तरह से कर्ज पर ही निर्भर होना पड़ रहा  है। इसके बाद भी सरकार इस मामले में कठोर कदम उठाने की हिम्मत नहीं दिखा पा रही है, जिसकी वजह से साल दर साल लिए जाने वाले कर्ज का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। कर्ज की हालत यह हो चुकी है कि राज्य सरकार को हर साल उसके ब्याज के रुप में फिलहाल की स्थिति में 20 हजार 942 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा। यह ब्याज की राशि मप्र जैसे राज्य के लिए बहुत बड़ी रकम है। प्रदेश सरकार जिस रफ्तार से कर्ज लेकर उसे दोनों हाथों से लुटा रही है उससे यह स्थिति साल दर साल और भयावह होना तय मानी जा रही है। अब नए वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार को कर्ज के ब्याज की अदायगी पर ही 20 हजार 942 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च करना पड़ेगी, इस हिसाब से यह ब्याज की राशि हर माह 1650 करोड़ रुपए से अधिक की होती है। फिलहाल प्रदेश पर  31 मार्च 2020 की स्थिति में दो लाख एक हजार 989 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था। इसमें अब तक चालू वित्त वर्ष में लिए गए नए कर्ज की 31500 करोड़ रुपए की वृद्धि हो चुकी है। अभी इस वित्त वर्ष के तीन सप्ताह बचे हुए हैं, जिसमें भी बड़ा कर्ज लिए जाने के हालात बने हुए हैं। वैसे भी अंतिम माह में भी राज्य सरकार कर्ज लेने में कभी पीछे नहीं रहती। यही वजह है कि माना जा रहा है कि वित्त वर्ष समाप्त होने तक इस वर्ष लिए गए कर्ज की राशि लगभग 38 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकती है। यदि ऐसा होता है तो इस वर्ष 31 मार्च की स्थिति में मप्र पर कुल कर्ज करीब दो लाख 40 हजार करोड़ रुपए तक हो सकता है।  ऐसे में कर्ज पर चुकाए जाने वाले ब्याज की राशि में भी वृद्धि होना तय है। यही वजह है कि शिव सरकार को ब्याज की अदायगी के लिए इतनी बड़ी राशि का बजट प्रावधान करने पर मजबूर होना पड़ा है।

इस साल ब्याज की रकम में हो गई साढ़े चार हजार करोड़ की वृद्धि
मप्र सरकार जिस गति से कर्ज ले रही है , उसी गति से ब्याज की राशि में भी वृद्धि हो रही है। इस साल अब तक दिए जाने वाले ब्याज की राशि में  4482 करोड़ 61 लाख रुपए की वृद्धि हो चुकी है। फिलहाल चालू वित्त वर्ष के लिए राज्य सरकार द्वारा ब्याज चुकाने के लिए 16 हजार 460 करोड़ 21 लाख रुपए का इंतजाम किया था, जिसमें अब वृद्धि करते हुए उसे नए वित्त वर्ष के लिए 20942 करोड़ 82 लाख रुपए कर दिया गया है।

आंकड़ों की बाजीगरी से राजकोषीय घाटे को किया कम
मप्र में सरकार द्वारा राजकोषीय घाटे को लेकर जारी आंकड़ों की बाजीगरी बरकरार है। नए वित्त वर्ष 2021-22 के लिए राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 4.50 फीसदी होना बताया गया है। जोकी चालू वित्त वर्ष की तुलना में दशमलव 49 फीसदी कम है। इससे राज्य सरकार ने स्थिति में सुधार के संकेत दिए हैं। चालू वित्त वर्ष के बजट में यह घाटा जीएसडीपी का 4.99 फीसदी होने का अनुमान जताया गया था, जो कि पांच फीसदी की सीमा के बेहद करीब था। इसकी वजह है कि अगर किसी राज्य का राजकोषीय घाटा पांच फीसदी के आंकड़े को पार कर जाता है तो उस राज्य का वित्तीय प्रबंधन बेहद खराब माना जाता है, जिसकी वजह से उसे वित्तीय कुप्रबंधन वाले राज्यों में शामिल कर लिया जाता है। इस वजह से उसकी साख बिगड़ जाती है। इसके चलते उसे कर्ज लेने में तो परेशानी होती ही है, साथ ही केंद्र सरकार से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि सहित अन्य मदों की राशि में भी कटौती का सामना करना पड़ता है। यही वजह है कि राज्य सरकार आंकड़ों से राजकोषीय घाटा पांच फीसदी से कम दिखाने का प्रयास करती है।

कोरोना की वजह से कर्ज सीमा में मिली छूट
कोरोना की वजह से पैदा हुए आर्थिक संकट की वजह से चालू वर्ष में केंद्र सरकार ने राज्यों की कर्ज सीमा में वृद्धि कर दी थी। पूर्व के साल तक राज्य सरकार जीएसडीपी का 3.5 फीसदी तक का ही कर्ज ले सकते थे, लेकिन उसकी सीमा में डेढ़ फीसदी की वृद्धि करते हुए उसे पांच फीसदी तक कर दिया गया था। इस वजह से राज्य सरकार 14 से 16 हजार करोड़ रुपए तक अतिरिक्त कर्ज लेने की पात्र हो गई है। राज्य सरकार ने पेश किए गए बजट में अगले वित्त वर्ष में लगभग 49 हजार 463 करोड़ 61 लाख रुपए का नया कर्ज लेने की बात भी स्वीकार की है। इस वर्ष के लिए यह अनुमान 47 हजार 101 करोड़ 54 लाख रुपए था। इस वजह से नए वित्त वर्ष में जितना कर्ज लेगी, उसका लगभग 40 फीसदी हिस्सा तो उसे कर्ज के ब्याज के रुप में ही खर्च करना होगा, जो कि उसने पहले से ही ले रखा है। मप्र के किसी भी विभाग के लिए किए गए बजट प्रावधान से भी अधिक ब्याज की अदायगी के लिए रखी गई राशि है।

Ramswaroop Mantri

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