भोपाल। एक तरफ प्रदेश सरकार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है तो, दूसरी और सरकार सुविधाओं के नाम पर फिजूलखर्ची करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। अब सरकार ने तय किया है कि सरकारी अफसरों और मामनीयों के साथ ही विधायकों के परिजनों को भी फास्टैग जेब से नहीं देना होगा। माननीयों के परिजनों के वाहन पर लगाए जाने वाले फास्टैग का भुगतान भी सरकार अपने खजाने से करेगी। फास्टैग पर विधायकों के दो वाहनों की सुविधा दने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें एक वाहन तो माननीय का होगा, जबकि दूसरा उनके परिवार का रहेगा। इस तरह माननीयों के दो वाहनों को फ्री फास्टैग की सुविधा मिलेगी। यही नहीं प्रदेश के 1100 सौ के लगभग मौजूद पूर्व विधायकों को भी उनके स्वयं के वाहन को भी टोल नाकों पर मुफ्त आवाजाही की सुविधा भी देने की तैयारी है।
दरअसल प्रदेश में इस समय मप्र सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) के 75 और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के 48 टोल काम कर रहे हैं। इन पर लगने वाले टोल पर फास्टैग से होने वाले भुगतान से अफसरों व विधायकों को मुक्त रखने पर मंथन किया जा रहा है। इस संदर्भ में लोक निर्माण और परिवहन विभाग के बीच बातचीत की जा रही है। दरअसल फास्टैग लेन का टोल एडवांस दिया जाना होता है, जिसके लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। फिलहाल यह तय किया जाना है कि संबधित विभाग अपने वाहन का भुगतान करे या फिर सभी सरकारी वाहनों की सूची तैयार कर उन पर लगाए जाने वाले फास्टैग का एकमुश्त भुगतान किया जाए। गौरतलब है कि प्रदेश में राज्य सरकार के करीब 25 हजार वाहन हैं। इन वाहनों की पहचान उनके रजिस्ट्रेशन से होती है और टोल पर अब तक इन वाहनों से राशि का भुगतान नहीं लिया जाता है।
विस सचिवालय ने दिया प्रस्ताव
विधानसभा सचिवालय ने इस मामले में प्रस्ताव तैयार कर परिवहन विभाग को भेज दिया है। प्रस्ताव के अनुसार मौजूदा विधायकों के दो वाहनों और पूर्व विधायकों के एक वाहन को फास्टैग लेने पर आवाजाही की फ्री सुविधा देने का उल्लेख किया गया है। इसमें वर्तमान 229 में से 31 में मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट और राज्यमंत्री हैं जिन्हें शासन द्वारा सभी तरह की सुविधाएं राज्य सरकार द्वारा अपने खजाने से उपलब्ध कराई जाती हैं।
माननीयों के साथ अब उनके परिजनों को भी उपकृत करेगी सरकार





