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महान क्रांतिकारी लेनिन

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मुनेश त्यागी

 दुनिया में बहुत सारे महान व्यक्ति पैदा हुए हैं जैसे गौतम बुद्ध, महावीर, न्यूटन, आर्यभट्ट, आचार्य चार्वाक, अरस्तु, सुकरात, कोपरनिकस, डार्विन, कार्ल मार्क्स, फ्रेडरिक एंगेल्स, स्टालिन, शहीदेआजम भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, हिंदू मुस्लिम एकता के चमकते सितारे रामप्रसाद बिस्मिल और  अशफाक उल्ला खान,किसी भी कीमत पर आजादी और धर्मनिरपेक्षता के दीवाने सुभाष चंद्र बोस,सत्य और अहिंसा के पुजारी महात्मा गांधी,जवाहरलाल नेहरू, माओ त्से तुंग, फिदेल कास्त्रो, अर्नेस्टो चे ग्वेरा, प्रेसिडेंट शावेज, अब्राहम लिंकन और मानव जाति के वे श्रेष्ठ पुरुष जिन्होंने नए-नए आविष्कार करके मानव जाति की परेशानियों को कम किया है। 
 मैं मानव जाति के एक सर्वश्रेष्ठ और महान क्रांतिकारी बेटे को जानता हूं, जिसका नाम है व्लादिमीर इल्यिच लेनिन, जो रूस के थे, जिसे दुनिया भर के मजदूर-किसान वर्ग के लोगों यानी कि बेटे-बेटियों ने, महान लेनिन (The Great Lenin) का नाम दिया है।
लेनिन मानव जाति का वह पहला बेटा है जिसने अपने मजदूर किसान साथियों के साथ मिलकर मानव जाति के इतिहास में सबसे पहले मजदूरों, किसानों का राज्य और उनकी सत्ता कायम की ओर मानव इतिहास में सबसे पहले इन्हें अपना भाग्यविधाता बनाया और दुनिया में सबसे पहली सफल क्रांति रूस में की थी।

महान लेनिन द्वारा स्थापित किसानों, मजदूरों के इस पहले राज्य ने,,,,
सबको शिक्षा,
सबको स्वास्थ्य,
सबको रोजगार,
सबको मकान,
सबको मनोरंजन,
सबको सुरक्षा,
सबको वस्त्र,
मोहिया कराये,

जार के शासन के जुल्मों सितम अन्याय शोषण भेदभाव गरीबी भुखमरी और पिछड़ेपन का अंत किया, और दुनिया में पहली दफा, मजदूरों और किसानों के राज्य को कायम किया, उन्हें एक शासक वर्ग में बदला। इस देश को USSR या सोवियत संघ कहा गया।
लेनिन दुनिया के पहले शख्स थे जिन्होंने सफलतापूर्वक क्रांति की। दुनिया का कोई भी सामंती या पूंजीवादी व्यवस्था का नेता या मुल्क तब तक यह सब करने में नाकाम रहा था। लेनिन ने स्थापित किया की सत्ता के बिना किसान मजदूर और जनता की हालत नहीं सुधारी जा सकती, इसलिए सत्ता प्राप्त करना किसानों और मजदूरों का पहला काम है।
उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता का प्रयोग व्यक्तिगत धन कमाने के लिए नहीं या अपना घर भरने के लिए नही, बल्कि किसानों मजदूरों का राज कायम करना, उनकी तकलीफों को दूर करना और शोषण, अन्याय, दमन, भेदभाव का खात्मा करना है। उन्होंने यह भी कहा था की क्रांति निरंतर जारी रहनी चाहिए, अगर क्रांति थम गई तो क्रांति मर जाती है और दुश्मन जनता का दुश्मन पुराना राज्य लौट आता है और जनता उनके शोषण, अन्याय, दमन, अत्याचार और भेदभाव और पिछड़ेपन का शिकार हो जाती है। अतः उन्होंने निरंतर क्रांति की बात कही जिसे सतत क्रांति भी कहा जाता है।
यह लेनिन द्वारा स्थापित क्रांतिकारी राज ही था जिसने बाद में सबके लिए शिक्षा, सबके लिए काम, सब के लिए मकान, सबके लिए स्वास्थ्य, सबके लिए स्वस्थ्य मनोरंजन के काम को जारी रखा, बहुत सारे स्कूल खोलें जनता के पढ़ने के लिए और स्वस्थ मनोरंजन करने के लिए।
रूस में अनेकों अनेक पुस्तकालय कायम किए गए जिनमें हजारों लाखों पुस्तकें एकत्रित की गई और जनता को पढ़ाया गया और उसको सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत किया गया। लेनिन ने कहा था कि अपने देश और समाज में अस्थाईत्व कायम करने के लिए और दुश्मनों से अपने नए राज्य को बचाने के लिए, सब व्यस्कों को हथियारबंद होना चाहिए यानी मास मिलिशिया का कंसेप्ट लागू किया और सबको हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी ताकि समय पड़ने पर शत्रुओं से अपने राज्य की रक्षा की जा सके।
बाद में दूसरे देशों में जहां-जहां क्रांतियां हुई जैसे फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा में, प्रेसिडेंट शावेज ने वेनेजुएला में, एवो मोरालेस ने बोलीविया में, माओ त्से तुंग ने चीन में उत्तरी कोरिया में वियतनाम में अपनी अपनी जनता को हथियारबंद किया और क्रांति को दुश्मनों के हमलों से बचाया।
लेनिन एक बहुत बड़े क्रांतिकारी दार्शनिक थे और एक बड़े लेखक थे। उनके पास पुस्तकों का बड़ा भंडार था। उनकी कुछ महत्वपूर्ण पुस्तकों का विवरण इस प्रकार है,,, “एक कदम आगे दो कदम पीछे”, “क्या करें?”, “वामपंथी कम्युनिज्म एक बचकाना मर्ज”, “साम्राज्यवाद पूंजीवाद की अंतिम अवस्था” और “स्टेट और रिवॉल्यूशन” यानी “राज्य औरक्रांति”। इन किताबों को पढ़ने से आदमी का कुंद दिमाग खुलता है और वह अपने को एक शक्तिशाली और एक ज्ञानवान मानव समझने लगता है। पूरी दुनिया की हकीकत उसकी समझ में आ जाती है। इसलिए किसी भी स्त्री-पुरुष का मार्क्स, लेनिन, भगतसिंह और फिदेल कास्त्रो को पढ़ना सबसे जरूरी काम है।
क्या आप दुनिया के ऐसे महान इंसान के विषय में कुछ भी जानना, पढना पसंद नही करोगे?
आओ, लेनिन की शरण में चले और दुनिया को शोषण, जुल्म, अन्याय, भेदभाव, गरीबी, गैरबराबरी, हिंसा, हत्याओं, युद्धोन्माद और बीमारी और पूंजीवादी राष्ट्रवाद, लूट खसोट, जैसी महामारियोँ से बचाये। आज पुनः वैश्वीकरण, निजीकरण और उदारीकरण की महामारियों ने दुनिया को घेर लिया है जिस कारण दुनिया में सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक और आध्यात्मिक गैर बराबरी दिनों दिन बढ़ती जा रही है। जनता का बहुत बड़ा हिस्सा गरीबी में जी रहा है। इन महामारियों ने जनता द्वारा हासिल किए गए रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वस्थ मनोरंजन आदि के सारे अधिकारों को हमसे छीन लिया है और दुनिया में साम्राज्यवाद, सांप्रदायिकतावाद, जातिवाद, फासीवाद, भ्रष्टाचार और महंगाई का बोलबाला कर दिया है।
हमें इस निजाम को खत्म करने के लिए पुनः लेनिन की शरण में जाना पड़ेगा और किसानों मजदूरों का क्रांतिकारी और एकजुट आंदोलन खड़ा करना पड़ेगा जिससे कि इन आधुनिक महामारियों से निजात पाई जा सके।
इंकलाब जिंदाबाद, समाजवाद जिंदाबाद।
पूंजीवाद मुर्दाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबाद।

Ramswaroop Mantri

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