सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का मानना है कि मोदी सरकार द्वारा जीएसटी पर मामूली छूट को उपलब्धि और उत्सव के रूप में पेश करना देश की मेहनतकश जनता के साथ किया गया घटिया मज़ाक है। जीएसटी लागू होने के बाद से ही छोटे व्यापारियों, कारीगरों, स्वरोज़गारियों और उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा है। महँगाई और बेरोज़गारी ने जनता की कमर तोड़ दी है। अब जब सरकार कुछ दरों में संशोधन कर रही है तो उसे गलती सुधारने की बजाय “राहत” बताना और उस पर जश्न मनाना जनता के जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
जीएसटी लागू करने के समय से ही सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) का मानना है कि मोदी सरकार ने यह कर प्रणाली बिना पूरी तैयारी के हड़बड़ी में लागू की
और बाद में इस सरकार के इसमें जल्दी-जल्दी किए गए अनगिनत संशोधन और टैक्स स्लैब में लगातार बदलाव करने से यह बात सच साबित हुई। इस व्यवस्था से राज्यों की आर्थिक शक्तियों को सीमित कर संघीय ढाँचे को तो कमजोर किया ही और यह इस सरकार की “एक देश, एक कर” की बहुप्रचारित नीति पर भी खरी नहीं उतरी। इससे न तो दरें एक समान हो पाईं और न ही कराधान सरल हुआ। और वर्षों तक ऊँची दरों पर टैक्स वसूल कर जनता की परेशानी में इज़ाफ़ा किया और उसके बाद अब दरों में सुधार को राहत के रूप में प्रचारित करना असल में और कुछ नहीं इस सरकार का अपनी विफलता को छिपाने की कोशिश है। शीघ्र ही यह भी सामने आ जाएगा कि इस तथाकथित दो लाख करोड़ की छूट का लाभ वास्तविकता में जनता को कितना मिलेगा और इसका कितना फ़ायदा कॉरपोरेट एवं बिचौलियों के हिस्से में जाएगा?
सरकार द्वारा पेट्रोल और डीज़ल को जीएसटी के दायरे में शामिल न करना आम जनता पर भारी पड़ रहा है। सरकार की मंशा यदि जनता को राहत देने की है तो वह इन्हें जीएसटी के दायरे में लाए जिससे टैक्स संरचना सरल होगी और इनकी कीमतें काफी कम हो सकती हैं । लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व हितों के चलते इन्हें जीएसटी से बाहर रखा गया है, जिसका सीधा खामियाज़ा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ रहा है। आज जनता पेट्रोल-डीज़ल के महंगे दामों पर इन्हें खरीदने को मजबूर है, जिससे महँगाई और जीवनयापन की कठिनाइयाँ और बढ़ गई हैं।
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) स्पष्ट करती है कि जीएसटी शुरू से ही बड़े कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुँचाने और छोटे कारोबारियों को बर्बाद करने का औज़ार रही है। आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को पूरी तरह टैक्स मुक्त करना, छोटे व्यापारियों व स्वरोज़गारियों को जीएसटी से बाहर रखना और संघीय ढाँचे को मज़बूत करना ही असली समाधान है।
मोदी सरकार ने सवालों से बचने के लिए अपनी असफलताओं को उत्सव के रूप में पेश कर उन्हें छुपा लेने की कला में महारत हासिल कर ली है और यह छूट उत्सव भी असल में उनका ऐसा ही एक प्रचार है। इस छूट से जनता को कोई उल्लेखनीय राहत मिलेगी ऐसी उम्मीद हमें नहीं है।
बसंत हेतमसरिया
राष्ट्रीय प्रवक्ता
सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया)
मो. 9934443337





