ग्वालियर. मध्य प्रदेश के ग्वालियर का दीवान परिवार, अनोखा परिवार है. ये परिवार 88 साल से मरीजों की सेवा कर रहा है. इस परिवार में चार पीढ़ियों में 45 डॉक्टर हुए. इनमें से 11 डॉक्टर बेटियों के परिवार से हैं. इस परिवार की 5वीं पीढ़ी भी डॉक्टर ही बनेगी. आइए डॉक्टर्स डेपर जानते हैं इस अनोखे परिवार की कहानी.
ग्वालियर के हुजरात रोड पर स्थित है दीवान हाउस. दीवान हाउस की कहानी शुरू होती है परिवार की पहली पीढ़ी के डॉक्टर ओएस दीवान से जो 1933 में इस पेशे में आए थे. उनके बाद की पीढ़ियों ने लगातार इस पेशे को अपनाया. चौथी पीढ़ी के उनके पड़पोते 24 साल के आदित्य पिछले साल डॉक्टर बने हैं. उनकी पड़पोती प्रियंका इस साल एमबीबीएस फाइनल इयर का एग्जाम देंगी.
इनके नाम पर मनाया जाता है डॉक्टर दिवस
हर साल देश में 1 जुलाई को डॉक्टर दिवस मनाया जाता है. दरअसल ये दिन देश के जाने-माने डॉक्टर और बंगाल के धुरंधर नेता डॉ. बिधानचंद्र राय को समर्पित है. डॉक्टर के तौर पर उनकी गजब की धाक थी. माना जाता था कि उनके पास आने वाला रोगी हमेशा ठीक होता था. वो चेहरा और नाड़ी के जरिए रोग का हाल और निदान बता देते थे. डॉ.राय गांधी से लेकर नेहरू तक के डॉक्टर रहे. जैसी डॉक्टरी की पढ़ाई उन्होंने पढ़ी, वो कम डॉक्टर ही कर पाते हैं.
कहा जाता था बंगाल का निर्माता
डॉ. राय फिजिशियन भी थे और सर्जन भी. उन्होंने पहले कोलकाता मेडिकल कॉलेज से अच्छे नंबर्स से एमबीबीएस और एमडी किया और फिर लंदन में पढ़ने चले गए. वहां उन्होंने एमडी की तो एमआरसीपी और एफआरसीएस जैसी शिक्षाएं भी हासिल कीं, जो बिरले डॉक्टरों के पास ही होती है. उन्हें बंगाल का निर्माता भी कहा जाता है. क्योंकि उनके समय में इस राज्य में कई बड़ी इंडस्ट्रीज लगने के साथ साथ बड़े शैक्षिक संस्थान भी खोले गए.
14 साल रहे बंगाल के मुख्यमंत्री
डॉ. विधान चंद्र राय का जन्म 1 जुलाई 1882 को हुआ, जबकि मुख्यमंत्री रहते हुए ही 1 जुलाई 1962 को उनका निधन हुआ. वो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के करीबी रहे तो महात्मा गांधी और नेहरू के अच्छे दोस्त भी.
सुभाष की बेटी की पढ़ाई के लिए ट्रस्ट बनवाया
सुभाष के निधन के बाद उनकी बेटी की पढ़ाई लिखाई सुचारू तौर पर चलती रहे और उसके खर्च मिलता रहे, इसके लिए उन्हीं की पहल पर एक ट्रस्ट बनाया गया था. जब तक नेताजी की बेटी अनिता ने शिक्षा जारी रखी, तब तक उसका खर्च इसी ट्रस्ट ने उठाया.




