कानून की आंखों में धूल झोंककर हो रहा कब्जा
इंदौर में ज़मीनें अब खरीदी नहीं जा रहीं, “दान” में मिल रही हैं… और वो भी बिना गवाह, बिना रजिस्ट्रेशन, बिना कानूनी कसौटी के सिर्फ एक कागज़ पर लिखे तीन शब्दों के दम परः “मैंने दे दिया”….
हिब्बानामा-जो एक धार्मिक दान की प्रक्रिया थी, अब शहर में ज़मीन कब्ज़ाने का नया ब्रह्मास्त्र बन चुकी है…. जहाँ कानून थमता है, वहाँ हिब्बानामा शुरु होता है…. बिना दाम, बिना डर, बस दस्तावेज़ी ड्रामा ! इंदौर में अब हर कोना, हर गली बस यही पूछ रही है- “कब कौन किसे हिब्बा कर दे?”
इंदौर….
मध्यप्रदेश का यह शहर, जहां एक ओर विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर हिब्बानामा के नाम पर जमीनों की बंदरबांट का खेल भी चरम पर है…. हिब्बानामा, जो कि मुस्लिम लॉ में एक वैध दान प्रक्रिया है, अब कुछ लोगों के लिए जमीन हड़पने का आसान तरीका बन गया है….
क्या है हिव्वानामा?
मुस्लिम विधि के अनुसार, एक दान पत्र होता है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को बिना किसी मूल्य के किसी अन्य को हस्तांतरित करता है….
यह प्रक्रिया मौखिक या लिखित दोनों रूपों में हो सकती है, और इसमें रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है…..
हालांकि, अचल संपत्ति के मामलों में रजिस्ट्रेशन आवश्यक माना गया है….
कैसे बन रहा है हिब्बानामा जमीन कब्जाने का जरिया?
इंदौर में हाल के वर्षों में हिब्बानामा का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है….कुछ लोग, विशेष रुप से भूमाफिया, इस प्रक्रिया का उपयोग करके सरकारी या विवादित जमीनों पर कब्जा जमा रहे हैं…. वे फर्जी हिब्बानामा तैयार कर, बिना रजिस्ट्रेशन के, जमीनों पर अपना
दावा ठोक देते हैं…. इससे न केवल सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा हो रहा है.बल्कि वास्तविक मालिकों के अधिकार भी खतरे में पड़ रहे हैं….
प्रशासन की भूमिका और लापरवाही
प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है….
कई बार तो अधिकारियों की मिलीभगत से ही ये फर्जी हिब्बानामा तैयार होते हैं…. नामांतरण की प्रक्रिया में भी लापरवाही बरती जाती है,
जिससे अवैध कब्जाधारियों को कानूनी मान्यता मिल जाती है….
कानूनी पेच और आम जनता की परेशानी
हिव्यानामा के मामलों में कानूनी प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली होती है…. वास्तविक मालिकों को अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं…. इस दौरान अवैध कब्जाधारी संपत्ति का उपयोग करते रहते हैं,
जिससे मालिकों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की क्षति होती है….
समाधान की दिशा में कदम
सख्त निगरानीः प्रशासन को हिब्बानामा के माध्यम से हुए सभी संपत्ति हस्तांतरण की जांच करनी चाहिए…..
– रजिस्ट्रेशन अनिवार्यः अचल संपत्ति के हिब्बानामा का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके….
– जनजागरुकताः लोगों को हिब्बानामा की प्रक्रिया और इसके दुरुपयोग के बारे में जागरुक किया जाना चाहिए। – कानूनी सहायताः पीड़ितों को त्वरित और सुलभ कानूनी सहायता प्रदान की जानी चाहिए.
कानून की आंखों में धूल झोंककर हो रहा कब्जा
इंदौर में ज़मीनें अब खरीदी नहीं जा रहीं, “दान” में मिल रही हैं… और वो भी बिना गवाह, बिना रजिस्ट्रेशन, बिना कानूनी कसौटी के सिर्फ एक कागज़ पर लिखे तीन शब्दों के दम परः “मैंने दे दिया”….
हिब्बानामा-जो एक धार्मिक दान की प्रक्रिया थी, अब शहर में ज़मीन कब्ज़ाने का नया ब्रह्मास्त्र बन चुकी है…. जहाँ कानून थमता है, वहाँ हिब्बानामा शुरु होता है…. बिना दाम, बिना डर, बस दस्तावेज़ी ड्रामा ! इंदौर में अब हर कोना, हर गली बस यही पूछ रही है- “कब कौन किसे हिब्बा कर दे?”
इंदौर….
मध्यप्रदेश का यह शहर, जहां एक ओर विकास की नई इबारत लिखी जा रही है, वहीं दूसरी ओर हिब्बानामा के नाम पर जमीनों की बंदरबांट का खेल भी चरम पर है…. हिब्बानामा, जो कि मुस्लिम लॉ में एक वैध दान प्रक्रिया है, अब कुछ लोगों के लिए जमीन हड़पने का आसान तरीका बन गया है….
क्या है हिव्वानामा?
मुस्लिम विधि के अनुसार, एक दान पत्र होता है जिसके माध्यम से कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को बिना किसी मूल्य के किसी अन्य को हस्तांतरित करता है….
यह प्रक्रिया मौखिक या लिखित दोनों रूपों में हो सकती है, और इसमें रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता नहीं होती है…..
हालांकि, अचल संपत्ति के मामलों में रजिस्ट्रेशन आवश्यक माना गया है….
कैसे बन रहा है हिब्बानामा जमीन कब्जाने का जरिया?
इंदौर में हाल के वर्षों में हिब्बानामा का दुरुपयोग तेजी से बढ़ा है….कुछ लोग, विशेष रुप से भूमाफिया, इस प्रक्रिया का उपयोग करके सरकारी या विवादित जमीनों पर कब्जा जमा रहे हैं…. वे फर्जी हिब्बानामा तैयार कर, बिना रजिस्ट्रेशन के, जमीनों पर अपना
दावा ठोक देते हैं…. इससे न केवल सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा हो रहा है.बल्कि वास्तविक मालिकों के अधिकार भी खतरे में पड़ रहे हैं….
प्रशासन की भूमिका और लापरवाही
प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है….
कई बार तो अधिकारियों की मिलीभगत से ही ये फर्जी हिब्बानामा तैयार होते हैं…. नामांतरण की प्रक्रिया में भी लापरवाही बरती जाती है,
जिससे अवैध कब्जाधारियों को कानूनी मान्यता मिल जाती है….
कानूनी पेच और आम जनता की परेशानी
हिव्यानामा के मामलों में कानूनी प्रक्रिया जटिल और समय लेने वाली होती है…. वास्तविक मालिकों को अपनी संपत्ति वापस पाने के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं…. इस दौरान अवैध कब्जाधारी संपत्ति का उपयोग करते रहते हैं,
जिससे मालिकों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की क्षति होती है….
समाधान की दिशा में कदम
सख्त निगरानीः प्रशासन को हिब्बानामा के माध्यम से हुए सभी संपत्ति हस्तांतरण की जांच करनी चाहिए…..
– रजिस्ट्रेशन अनिवार्यः अचल संपत्ति के हिब्बानामा का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके….
– जनजागरुकताः लोगों को हिब्बानामा की प्रक्रिया और इसके दुरुपयोग के बारे में जागरुक किया जाना चाहिए। – कानूनी सहायताः पीड़ितों को त्वरित और सुलभ कानूनी सहायता प्रदान की जानी चाहिए.





