जबलपुर हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अपने अहम आदेश में वर्तमान परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए इंदौर में बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने के आदेश दिए हैं। 12 साल पहले 300 करोड़ की लागत से बने इंदौर के बीआरटीएस को हटाने पर मप्र हाईकोर्ट ने मुहर लगा दी। बीआरटीएस को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इसे हटाने की मंजूरी दे दी। अब एक दो दिन में नगर निगम बीआरटीएस की बस लेन हटाने का काम शुरू कर देगा।

तीन माह पहले इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बीआरटीएस को हटाने की घोषणा कर हाईकोर्ट में इस बारे में पक्ष रखने की बात कही थी। भोपाल का बीआरटीएस हटाया जा चुका है। इंदौर के पुराने एबी रोड पर बने 11 किलोमीटर लंबे बीआरटीएस के आठ प्रमुख जंक्शनों पर नगर निगम अब ब्रिज बनाना चाहता है। इसके लिए बीआरटीएस हटाने का फैसला लिया गया। हाईकोर्ट में बीआरटीएस हटाने के लिए याचिका लगी थी, लेकिन बीते कई वर्षों से नगर निगम बीआरटीएस की उपयोगिता बताते हुए अपना पक्ष रखता आ रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के बाद नगर निगम ने खुद हाईकोर्ट के समक्ष कहा कि सरकार बीआरटीएस हटाना चाहता है।
बीआरटीएस प्रोजेक्ट को दी गई थी चुनौती
गौरतलब है कि इंदौर शहर के निरंजनपुर से राजीव गांधी प्रतिमा तक लगभग 11.8 किमी के बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (BRTS) प्रोजेक्ट को चुनौती देते हुए इंदौर खंडपीठ में याचिका दायर की गई थी। इंदौर खंडपीठ ने साल 2013 में बीआरटीएस प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति में व्यवहारिकता की जांच के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता पीके सक्सेना की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि बीआरटीएस लेन में किसी अन्य वाहन को यातायात की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
नई कमेटी गठित कर रिपोर्ट पेश करने के दिए थे निर्देश
याचिका की सुनवाई करते हुए इंदौर हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में एक नई कमेटी का गठन किया था। हाईकोर्ट ने कमेटी को रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया था। बाद में, दोनों याचिकाओं को नवंबर 2024 में सुनवाई के लिए जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में स्थानांतरित कर दिया गया। चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने 12 फरवरी को सुनवाई के दौरान पाया कि इंदौर खंडपीठ द्वारा पारित आदेश के बाद कमेटी ने सिर्फ एक बैठक की थी।
23 को बैठक, 25 फरवरी को रिपोर्ट पेश
मुख्य पीठ में याचिकाओं के स्थानांतरण के बाद कमेटी की कोई बैठक नहीं हुई थी। इसलिए, युगलपीठ ने 12 फरवरी को आदेश जारी कर कमेटी को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह में बैठक करे और यदि आवश्यक हो तो 23 फरवरी को पुनः बैठक करे। दो दिन के भीतर 25 फरवरी तक रिपोर्ट प्रस्तुत करे। कमेटी की रिपोर्ट में कहा गया कि यातायात को सुगम बनाने के लिए फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है। वर्तमान परिस्थितियों में बीआरटीएस कॉरिडोर के कारण यातायात पर दबाव पड़ रहा है, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। सरकार ने भी बीआरटीएस कॉरिडोर को बंद करने का समर्थन किया और बताया कि यातायात सुधार के लिए 7 फ्लाईओवर बनाए जाएंगे।
हाईकोर्ट ने बीआरटीएस कॉरिडोर को हटाने के दिए आदेश
युगलपीठ ने दोनों याचिकाओं का निराकरण करते हुए बीआरटीएस कॉरिडोर को वर्तमान परिस्थितियों में अव्यवहारिक मानते हुए इसे समाप्त करने का आदेश जारी किया। याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र के रूप में वरिष्ठ अधिवक्ता अमित एस. अग्रवाल उपस्थित हुए।
ट्रैफिक सुगम होगा : मेयर
इंदौर के मेयर पुष्य मित्र भार्गव ने इस बारे में कहा कि याचिका में दोनों ही पक्ष बीआरटीएस हटाने पर सहमत थे, इसलिए कानूनी अड़चन नहीं आई। बीआरटीएस के हटने से शहर के ट्रैफिक में अलग सुगमता आएगी और ब्रिज भी बन सकेंगे। बीआरटीएस हटने से सड़क चौड़ी हो जाएगी। शुक्रवार से बस लेन हटाने का काम शुरू हो जाएगा।
इंदौर में देश का पहला प्रोजेक्ट था
जवाहर लाल शहरी नवीनीकरण मिशन के तहत इंदौर बीआरटीएस देश का पहला स्वीकृत प्रोजेक्ट था। इंदौर के बाद पुणे, दिल्ली, भोपाल, अहमदाबाद में भी बीआरटीएस प्रोजेक्ट मंजूर हुए थे, हालांकि इंदौर से पहले अहमदाबाद का बीआरटीएस बनकर तैयार हो गया था। इंदौर बीआरटीएस के जंक्शनों पर अब ब्रिज बनाने के लिए सर्वे का काम भी पूरा हो चुका है।





