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हाईकोर्ट का केन्द्र सरकार से जवाब-तलब:टि्वटर पर हिन्दी भाषा को मान्यता दिलाने क्या कदम उठा रही सरकार; अगली सुनवाई 24 मार्च को

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जबलपुर

मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बैंच ने कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म टि्वटर पर हिन्दी भाषा को मान्यता दिलाने के लिए केन्द्र सरकार क्या कदम उठा रही है। डिवीजन बैंच ने इस मामले में केन्द्र सरकार को 24 मार्च तक जवाब देने का निर्देश दिया है।

ये है मामला-यह जनहित याचिका बालाघाट की लांजी विधानसभा के पूर्व विधायक किशोर समरीते की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि टि्वटर द्वारा विश्व की 9 भाषाओं को मान्यता दी गई है। भारत में सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली हिन्दी भाषा को टि्वटर पर मान्यता नहीं है। याचिकाकर्ता ने इस संबंध में केन्द्र सरकार को पत्र लिखा, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

विदेशों में ट्रांसलेट करके दिखाए जाते हैं ट्वीट
अधिवक्ता शिवेन्द्र पाण्डेय और सुयश प्यासी ने तर्क दिया कि भारत में टि्वटर पर हिन्दी पर किए जाने वाले ट्वीट तो हिन्दी भाषा में दिखते हैं, लेकिन विदेशों में हिन्दी भाषा के ट्वीट को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके दिखाया जाता है। इसके कारण ज्यादातर हिन्दी ट्वीट का अर्थ बदल जाता है। इसको रोकने के लिए टि्वटर पर हिन्दी भाषा को मान्यता दिलाना जरूरी है।

टि्वटर का उपयोग करने में भारत तीसरे स्थान पर
याचिका में कहा गया कि टि्वटर का उपयोग करने के मामले में दुनिया में भारत का स्थान तीसरा है। प्रधानमंत्री कार्यालय, रेलवे सहित सभी महत्वपूर्ण विभाग टि्वटर के जरिए महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। इसको देखते हुए टि्वटर पर हिन्दी भाषा को मान्यता दिलाया जाना जरूरी है। केन्द्र सरकार की ओर से इस मामले में जवाब देने के लिए समय दिए जाने का अनुरोध किया गया, डिवीजन बैंच ने 24 मार्च तक जवाब पेश करने का समय दे दिया है।

लोकायुक्त को पाँच बैंक खातों को मुक्त करने का आदेश
छिंदवाड़ा| छिंदवाड़ा के विशेष न्यायाधीश डॉ. एस. परमार ने विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त जबलपुर को आदेशित किया है कि छिंदवाड़ा निवासी नजमा हुसैन के पाँच बैंक खातों को मुक्त किया जाए। प्रकरण के अनुसार आवेदिका के भाई जाकिर हुसैन के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम का प्रकरण दर्ज किया गया था। लोकायुक्त ने जाँच के दौरान आवेदिका के भी पाँच बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे। अधिवक्ता विनोद सिसोदिया ने तर्क दिया कि आवेदिका के बैंक खातों को उसके भाई की आय की गणना में शामिल नहीं किया गया है। विशेष न्यायालय ने पाँच बैंक खातों को मुक्त करने का आदेश दिया है।

गरीबों को क्यों नहीं मिला प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ
मप्र हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और बीमा कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि गरीबों को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ क्यों नहीं मिल पा रहा है। जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने अनावेदकों से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। गढ़ाकोटा सागर निवासी सविता रानी लोधी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि उनके पति की मृत्यु सड़क दुर्घटना में हो गई थी। उनके पति का बैंक में बीमा था, लेकिन प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत उन्हें राशि का भुगतान नहीं किया गया। अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने कहा कि बीमा राशि के लिए एफआईआर की मूल प्रति, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मूल प्रति माँगी जा रही है। इसकी वजह से गरीबों को बीमा योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। प्रारंभिक सुनवाई के बाद एकलपीठ ने अनावेदकों से जवाब-तलब किया है।

Ramswaroop Mantri

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