संभल हिंसा-146 साल पहले कोर्ट में हारा था हिंदू पक्ष:48 साल बाद फिर दंगे, मस्जिद के परकोटे में कल्कि अवतार की मान्यता जैसे राम का अवतार अयोध्या के मंदिर में हुआ। कृष्ण का अवतार मथुरा के मंदिर में हुआ। ऐसे ही कल्कि भगवान का अवतार संभल के मंदिर में होगा।
संभल की जामा मस्जिद का इतिहास
संभल की जामा मस्जिद, बाबर के 1526 और 1530 के बीच पांच साल के शासनकाल के दौरान बनाई गई 3 मस्जिदों में से एक है। अन्य दो मस्जिदों में एक पानीपत की मस्जिद है और दूसरी अयोध्या में ध्वस्त हो चुकी बाबरी मस्जिद थी।उत्तर प्रदेश के संभल में 16वीं शताब्दी की जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश विवाद का कारण बना,जामा मस्जिद का निर्माण मुगल सम्राट बाबर के शासनकाल के दौरान 1526 और 1530 के बीच हुआ था,24 नवंबर को दूसरे सर्वेक्षण के दौरान हिंसा भड़क गई, चार लोग मारे गए और 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल
उत्तर प्रदेश का संभल जल रहा है और विवाद के केंद्र में है एक मस्जिद। मोरादाबाद के संभल में 16वीं शताब्दी की जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश जैसे आया,वहां के स्थानीय लोगों के अंदर क्रोध की ज्वाला जल उठी। इसक बाद जो हुआ वह हर अखबार, मीडिया चैनलों की सुर्खियां बन गया। क्रोध की इस आग में पुलिस अधिकारी घायल हुए, कई मौतें और दंगों के बाद आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया,लेकिन जिस मस्जिद को लेकर इतना बवाल हुआ है, उसका इतिहास क्या है? आइए जानते हैं।
संभल आज के समय में मुस्लिम बाहुल्य शहर है, लेकिन हिंदू शास्त्रों में इसका अलग उल्लेख मिलता है। कहा जाता है कि घोर कलयुग के समय में यहां भगवान विष्णु के एक अवतार कल्कि प्रकट होंगे। वही कलयुनग का अंत करके नए युग की शुरुआत करेंगे। संभल के मौजूदा हालात में इसकी चर्चा इसलिए कि दावा होता रहा है कि संभल में जहां जामा मस्जिद बनी है, वो एक मंदिर को तोड़कर बनाई गई। 1527-28 में बाबर के सेनापति ने श्री हरिहर मंदिर को आंशिक रूप से ध्वस्त किया था।
जामा मस्जिद या हरिहर मंदिर, संभल में इस पर विवाद
संभल की जामा मस्जिद का विवाद अयोध्या, काशी और मथुरा में चल रहे मामलों के बीच बढ़ा है। हिंदू पक्ष दावा करता है कि हरिहर मंदिर को तोड़कर जामा मस्जिद बनाई गई थी। मुस्लिम पक्ष जामा मस्जिद को लेकर हिंदू पक्ष की दावों को खारिज करता है। हालिया लड़ाई कानूनन लड़ी जा रही है, जिसमें अदालत की ओर से आए मस्जिद के सर्वे ऑर्डर पर काम हो रहा है।
संभल के सिविल जज की अदालत में विष्णु शंकर जैन की ओर से जामा मस्जिद को लेकर वाद दायर किया गया। सुप्रीम कोर्ट के वकील हरिशंकर जैन और केला देवी मंदिर के महंत ऋषिराज गिरि समेत 8 वादी हैं। वादियों ने भारत सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और संभल जामा मस्जिद समिति को विवाद में पार्टी बनाया है। याचिका में कहा गया-‘ मस्जिद मूल रूप से एक हरिहर मंदिर था, जिसे 1529 में मस्जिद में बदल दिया गया। मंदिर को मुगल सम्राट बाबर ने 1529 में ध्वस्त कराया था। बाबरनामा और आइन-ए-अकबरी किताब में इस बात का उल्लेख है कि जिस जगह पर जामा मस्जिद बनी है, वहां कभी हरिहर मंदिर हुआ करता था।’
मुस्लिम पक्ष भी मानता है कि जामा मस्जिद बाबर ने बनवाई थी और आज तक मुसलमान इसमें नमाज पढ़ते आ रहे हैं। हालांकि मुस्लिम पक्ष कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट के 1991 के उस ऑर्डर को आधार बनाकर अपना विरोध दर्ज कराता है, जिसमें अदालत ने कहा था कि 15 अगस्त 1947 से जो भी धार्मिक स्थल जिस भी स्थिति में हैं, वो अपने स्थान पर बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या पर फैसले के समय भी इस पर जोर दिया था। इसके जरिए मुस्लिम पक्ष संभल की जामा मस्जिद पर हक जताता है और हिंदू पक्ष के दावे, किसी अन्य न्यायिक कार्यवाही को कानून की अवहेलना बताया है।
ऐतिहासिक रिपोर्टों के अनुसार,मस्जिद का निर्माण दिसंबर 1526 में बाबर के विश्वासपात्र सिपाहसालार हिंदू बेग कुचिन की देखरेख में किया गया था। इसकी स्थापत्य शैली उस दौर के विकसित हो रहे मुगल डिजाइन को दर्शाती है,जिसमें एक बड़ा चौकोर हॉल और बीच में एक गुंबद है। मस्जिद के अंदर फारसी शिलालेख इसकी मुगल उत्पत्ति की पुष्टि करते हैं,हालांकि कुछ इतिहासकारों का दावा है कि इसके निर्माण में पहले से मौजूद हिंदू मंदिरों के अवशेषों को शामिल किया गया था।
हिंदुओं के लिए धार्मिक महत्व
संभल खुद हिंदुओं के लिए धार्मिक महत्व रखता है,क्योंकि यह विष्णु के दसवें और अंतिम अवतार कल्कि का कथित जन्मस्थान है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार,कल्कि कलयुग (अंधकार का युग) को समाप्त करने के लिए संभल में प्रकट होने वाले हैं। इस साल की शुरुआत में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य कल्कि धाम का शिलान्यास किया था और ‘राम राष्ट्र’ का आह्वान किया और दावा किया कि कल्कि का अवतार हजारों वर्षों के भविष्य का निर्धारण करेगा।
कानूनी विवाद क्या है?
विवाद तब शुरू हुआ जब वकील विष्णु शंकर जैन और अन्य लोगों ने संभल में एक याचिका दायर की। ज्ञानवापी मस्जिद और कृष्ण जन्मभूमि विवादों में शामिल होने के लिए जाने जाने वाले जैन ने दावा किया कि जामा मस्जिद भगवान कल्कि को समर्पित एक मंदिर के खंडहरों पर बनाई गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1526-27 में बाबर के आक्रमण के दौरान मंदिर को नष्ट करने के बाद मस्जिद का निर्माण किया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बाबरनामा और अकबरनामा जैसे ऐतिहासिक ग्रंथ बाबर की ओर से मंदिर के विनाश का दस्तावेजीकरण करते हैं।





