दीपिका पादुकोण फिल्म पठान के गाने बेशरम रंग में बिकिनी पहनकर विवाद में घिर गई हैं। उन पर भारतीय सभ्यता को खराब करने का आरोप लग रहा है। कारण है उनका गाने में ऑरेंज बिकिनी पहनना और इस पर गाने के बोल होना बेशरम रंग। दीपिका मॉडर्न बिकिनी पहनने वाली बॉलीवुड या दुनिया की पहली एक्ट्रेस नहीं हैं।
दुनिया में बिकिनी का इतिहास 7600 साल पुराना है। साउथ अनाटोलिया (वेस्टर्न एशिया) की एक प्राचीन बस्ती में एक देवी की बिकिनी जैसे कपड़े पहने एक पेंटिंग मिली थी। भारतीय फिल्मों में बिकिनी पहनने वाली पहली एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर थीं, वहीं दुनिया की बात करें तो मॉडर्न बिकिनी 5 जुलाई 1946 को ईजाद हुई। इसके बनने का कनेक्शन वर्ल्ड वॉर 2 और उस समय आई तंगी से है। जब वर्ल्ड वॉर 2 के बाद सेना के पास पैसे नहीं बचे, तो US गवर्नमेंट ने स्विमवियर में इस्तेमाल होने वाले फैब्रिक में 10 प्रतिशत कटौती करने का फैसला किया।
इस तरह आपदा में नया अवसर मिला और बिकिनी बन गई, लेकिन इसे बनाने वाला कोई डिजाइनर नहीं बल्कि एक फ्रेंच मैकेनिकल इंजीनियर लुईस लियर्ड थे। जब पहली मिस वर्ल्ड ने 1951 में क्राउनिंग के दौरान बिकिनी पहनी तो खूब हंगामा हुआ और कई क्रिश्चियन देशों में इसे बैन कर दिया गया। फिर एक गाने से बिकिनी का चलन शुरू हुआ, जिसके बाद आज दुनियाभर में बिकिनी की कई वैराइटी और ब्रांड मौजूद हैं।
वही बिकिनी, जिसे पहनकर कोई सिलेब्रिटी पेज़ थ्री पर आ जाती है। अब आप सोच रहे होंगे कि दूसरे विश्व युद्ध में बिकिनी कहां से आ गई, तो थोड़ा-सा धीरज रखिए। दरअसल यह ड्रेस जितनी छोटी है, इसकी कहानी उतनी ही लंबी। दूसरा विश्व युद्ध नहीं होता तो शायद बिकिनी जैसी कोई ड्रेस जानें कब बनती।
बात 1939 की है, जब जर्मनी ने पोलैंड पर हमला किया, तो दो दिन बाद ही ब्रिटेन और फ्रांस ने भी जर्मनी के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी। यहां से शुरू हुई दूसरे वर्ल्ड वॉर की कहानी और बिकिनी की ज़रूरत। 1941 में जापान ने अमेरिकी व्यापार प्रतिबंधों से परेशान होकर उसके नौसेना बेस पर्ल हार्बर पर अचानक हमला कर दिया। इसके बाद अमेरिका भी इस लड़ाई में कूद पड़ा। दो देशों के बीच शुरू हुई जंग ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। यूरोप में कई चीज़ों की कमी पड़ने लगी। इनमें कपड़े की कमी भी शामिल थी। ऐसे में अमेरिका की तरफ से एक निर्देश जारी किया गया। कहा गया कि औरतों के स्विमसूट के कपड़ों में कटौती की जाए। कुछ ऐसा बनाया जाए, जिसमें कपड़े की ज़रूरत कम हो और औरतें को यह पसंद भी आए।

इस आदेश के बीच बिकिनी का आइडिया लेकर आए फ्रांस के डिजाइनर लुई रियर्ड। वह पेशे से ऑटोमोबाइल इंजीनियर थे, लेकिन उनका परिवार लिंगरी शॉप चलाता था। एक दिन उन्होंने देखा कि फ्रेंच मेडिटेरियन सी के बीच पर कुछ महिलाएं नहा रही हैं। वे अपने बाथ सूट को लपेटकर और छोटा कर रही हैं ताकि उनकी स्किन ज़्यादा एक्सपोज हो सके। बस रियर्ड को यहीं से टू-पीस बिकिनी का आइडिया मिला।
इसके बाद उन्होंने बिकिनी तैयार तो कर ली, लेकिन उनके सामने चुनौती थी कि छोटे कपड़े औरतें पहनेंगी कैसे? क्योंकि वह दौर कपड़ों के लिहाज से तरक्कीपसंद तो था नहीं। और जब तक कोई बिकिनी नहीं पहनता, इसका प्रचार प्रसार नहीं हो पाता। वह कई अभिनेत्रियों के पास गए, लेकिन उनकी मुराद पूरी नहीं हुई।
रियर्ड इसे पेरिस में एक फैशन इवेंट में प्रदर्शित करना चाहते थे। अंत में उनकी तलाश ख़त्म हुई 19 साल की फ्रेंच मॉडल मेशलिन बेर्नीर्दिनी पर। 1946 में मेशलिन ने बिकिनी पहनकर फोटोशूट कराया। इसे एक मैगजीन ने छापा भी। मेशलिन की फोटो के साथ जब मैगजीन बाज़ार में उतरी, तो तहलका मच गया। मेशलिन ने बिकिनी पहने हुए हाथ में एक माचिस की डिब्बी लेकर पोज भी दिया, जिसका यह मतलब निकलता था कि यह बिकिनी इतनी छोटी है कि माचिस की डिब्बी तक में समा सकती है।

मेशलिन चर्चा में भी आईं, तो उनके बिकिनी पहनने को लेकर काफी विवाद भी हुआ। कैथोलिक चर्च इसके विरोध में उतर आए। अख़बारों में मेशलिन के ख़िलाफ़ खूब आर्टिकल छपे। लेकिन, विवादों के साथ-साथ मेशलिन पर प्यार भी खूब बरसा। इसका अंदाज़ा इस बात से लगा सकते हैं कि बिकिनी फोटोशूट के बाद मिशेलिन को करीब 50 हज़ार लोगों ने लव लेटर भेजे।
लुई रियर्ड और मेशलिन के लिए यह चौंकाने वाला अनुभव था। यहीं से बिकिनी पहनावे के तौर पर अस्तित्व में आई। अब सवाल यह कि आखिर इसका नाम बिकिनी क्यों पड़ा? तो इसके पीछे एक दिलचस्प कहानी है। प्रशांत महासागर के इलाके़ के बीच एक जगह है, बिकनी अटोल। यहां अमेरिका ने परमाणु परीक्षण के लिए बहुत सारे बम गिराए थे। लुई रियर्ड ने इस जगह के नाम पर अपने डिजाइन को बिकिनी का नाम दिया। उनका कहना था कि उनकी डिजाइन की हुई यह ड्रेस किसी बम से कम नहीं। उनका मानना था कि बिकिनी के चलन में आने के बाद जो प्रतिक्रिया आएगी, वह किसी बम विस्फोट के बाद की प्रतिक्रिया से कम नहीं होगी।
वक़्त के साथ बिकिनी पहनने का चलन रुपहले पर्दे पर भी नज़र आया। 1962 में जेम्स बॉन्ड फिल्म की सीरीज में अभिनेत्री उर्सुला एंड्रेस ने बिकनी पहनी। इसके बाद पश्चिमी देशों में धीरे-धीरे बिकिनी पहनना आम हो गया।

भारत में भी बिकिनी की दस्तक विवादित ही रही। साल 1966 में फिल्मफेयर मैगजीन के अगस्त इशू के कवर पेज के लिए शर्मिला टैगोर ने पहली बार बिकिनी पहनी। वह मैगजीन के लिए बिकिनी पोज देने वाली भी पहली इंडियन एक्ट्रेस बनीं। जब शर्मिला इस फोटोशूट के लिए स्टूडियो पहुंचीं, तो फोटोग्राफर धीरेन चावड़ा ने उनसे पूछा कि वह शूट पर क्या पहनने वाली हैं। इस पर शर्मिला ने अपना टू-पीस फ्लोरल स्विमसूट पर्स से निकाला और कहा कि इसमें फोटोशूट करवाऊंगी। फोटोशूट के बाद कुछ ही दिनों में यह कवर वायरल हो गया और इससे जुड़े विवाद बढ़ते गए। इस पर खूब हाय तौबा मची। मामला संसद तक पहुंचा, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
हालांकि, उनको इन विवादों का फायदा भी मिला। यह साल शर्मिला के करियर में मील का पत्थर साबित हुआ। 1996 में आई उनकी 5 फिल्में- अनुपमा, देवर, सावन की घटा, नायक, ये रात फिर न आएगी हिट रही। शर्मिला का करियर तरक्की कर गया और बिकिनी भी।






बॉलीवुड एक्टर मुकेश खन्ना ने हाल ही में शाहरुख खान की अपकमिंग फिल्म ‘पठान’ के सॉन्ग ‘बेशरम रंग’ पर रिएक्ट करते हुए इसे अश्लील बताया है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा है सेंसर बोर्ड को ऐसे गोनों को पास ही नहीं करना चाहिए। वहीं स्वरा भास्कर ने इस सॉन्ग को सपोर्ट करते हुए BJP लीडर्स को मुंहतोड़ जवाब दिया है।
मुकेश ने सेंसर बोर्ड पर उठाए सवाल
मुकेश खन्ना ने बेशरम रंग सॉन्ग के बारे में बात करते हुए कहा, ‘आज कल के बच्चे टीवी और फिल्म देख कर बड़े हो रहे हैं। इसलिए सेंसर बोर्ड को ऐसे गानों को पास ही नहीं करना चाहिए। हमारा देश कोई स्पेन नहीं बन गया, जो इस तरह के गाने लाए जाएं। सेंसर बोर्ड इस तरह गाने को पास ही क्यों करता है।’

ये रंग बहुत संवेदनशील है
मुकेश खन्ना ने आगे कहा, ‘क्या इस सॉन्ग को बनाने वाले को पता नहीं है कि भगवा रंग एक धर्म और सम्प्रदाय के लिए बहुत मायने रखता है। ये रंग बहुत संवेदनशील है। हम इसे भगवा कहते हैं, जो शिवसेना के झंडे में भी है और हमारे RSS में भी है। अगर उनको ये पता है, तो इस सॉन्ग को बनाने वाले ने क्या सोच कर इसे बनाया है।
स्वरा भास्कर ने किया इस सॉन्ग को सपोर्ट
वहीं स्वरा भास्कर ने सोशल मीडिया के जरिए ‘बेशरम रंग’ को सपोर्ट किया। उन्होंने एक आर्टिकल शेयर किया, जिसमें लिखा है कि मध्य प्रदेश में BJP सरकार शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण की ‘पठान’ की रिलीज पर रोक लगा सकती है, क्योंकि फिल्म के गाने में ‘एक मुस्लिम आदमी केसरिया रंग के कपड़े पहने लड़की को छू रहा है।’ इस आर्टिकल को शेयर करते हुए स्वरा ने लिखा, ‘मिलिए हमारे देश के सत्ताधारी राजनेताओं से.. एक्ट्रेसेस के कपड़ों को देखने से फुरसत मिलती तो क्या पता कुछ काम भी कर लेते??’
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बेशरम रंग की वजह से विरोध में फंसी है फिल्म
पठान का ‘बेशरम रंग…’ सॉन्ग जब से रिलीज हुआ है, तब से मुसीबत में फंसा हुआ है। इसमें शाहरुख खान और दीपिका पादुकोण ने बेहद बोल्ड सीन दिए हैं। इस गाने में दीपिका ने भगवा रंग की बोल्ड ड्रेस पहनी है, इसे लेकर फिल्म को विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इस सॉन्ग को देखने के बाद लोगों का कहना है कि इस सॉन्ग को सेंसर बोर्ड को पास ही नहीं करना चाहिए था।





