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हितानंद हो सकते हैं प्रदेश भाजपा के नए संगठन महामंत्री

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भोपाल। संघ की चल रही दो दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की आज शाम समाप्त होने वाली बैठक में नए सर कार्यवाह का फैसला होने का असर मप्र भाजपा की राजनीति पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।  इसका असर प्रदेश संगठन महामंत्री से लेकर संभागीय संगठन मंत्रियों के दायित्वों में फेरबदल के रूप में  सामने आ सकता है। माना जा रहा है कि मौजूदा संगठन महामंत्री सुहास भगत की जगह इस पद की जिम्मेदारी उनके सहयोगी हितानंद शर्मा को दी जा सकती है। दूसरी  ओर लंबे समय से संघ के सर कार्यवाह का दायित्व निभा रहे भैयाजी जोशी कई दिनों  से अपने स्वास्थ्य कारणों की वजह से इस पद से मुक्त किए जाने का आग्रह करते आ रहे हैं। माना जा रहा है कि आज चल रही बैठक में यह दायित्व
दत्तात्रेय होंसबोले को दिया जा सकता है। इसके अलावा कई अन्य दायित्वों में भी फेरबदल होना तय माना जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो उसका असर भाजपा संगठन पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। इसमें मप्र का भाजपा संगठन भी अछूता नहीं रहेगा। मप्र में फिलहाल सबसे बड़ा असर प्रदेश संगठन महामंत्री पर पड़ने  वाला माना जा रहा है। अभी इस पद पर बीते चार सालों से सुहास भगत काम कर रहे हैं। बीते साल ही उनके सहयोगी के रूप में संघ की ओर से सह संगठन महामंत्री के रूप में हितानंद शर्मा की नियुक्ति की गई थी।  दरअसल शर्मा के बेहतर संगठन के अलावा प्रदेश के भाजपा के लिए कठिन माने जाने वाले इलाकों में बेहद मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे निचले स्तर तक कार्यकर्ताओं से संवाद करने को महत्व देते हैं।
 उनकी नियुक्ति के साथ से ही प्रदेश में संगठन महामंत्री के फेरबदल की चर्चाएं शुरू हो गई थीं, जिसे अब पूरी तरह से बल मिलने लगा है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि संगठन के महत्वपूर्ण पद संभागीय संगठनमंत्रियों के प्रभारों में भी फेरबदल किया जाएगा। इसकी वजह है उनके कामकाज को लेकर आने वाली लगातार शिकायतें। बताया जाता है कि इस फेरबदल में कुछ को वापस संघ में लेकर उन्हें अन्य प्रकल्पों का कामकाज दिया जा सकता है। उनकी जगह कुछ नए चेहरों को संभागों में पदस्थ किया जा सकता है। दरअसल इसकी संभावना की वजह है संघ द्वारा दूसरे संगठन में भेजे गए प्रचारकों के कामकाज की समीक्षा की जाना। इस समीक्षा में जिनका कामकाज अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहता है उन्हें वापस बुला लिया जाएगा।
यह होती है जिम्मेदारी
भाजपा में संगठन मंत्रियों के रुप में काम करने वाले प्रचारकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इनके द्वारा ही मैदानी स्तर पर न केवल संगठन, बल्कि सरकार के कामकाज पर नजर रखी जाती है बल्कि संगठन से लेकर संघ को भी रिपोर्ट भेजी जाती है। इसी रिपोर्ट के आधार पर ही संगठन द्वारा आगे की रणनीति तैयार की जाती है। संघ भी इनकी रिपोर्ट के आधार पर ही राजनैतिक विषयों पर मंथन कर फैसला करता है।
नहीं बना सके हैं मजबूत पकड़
दरअसल मौजूदा संगठन महामंत्री सुहास भगत की सरकार व संगठन दोनों पर ही पकड़ को कमजोर माना जाता है। वे संगठन में बीते चार सालों से काम कर रहे हैं। उनके ही कार्यकाल में बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा को न केवल हार का सामना करना पड़ा, बल्कि पार्टी सरकार बनाने से भी वंचित रह गई थी। यही नहीं सरकार में भी कार्यकर्ताओं के अनुरूप निर्णय कराने में अब तक सफल होते नहीं दिखे हैं। यही वजह है कि पूर्व की सरकार की तरह ही अब तक प्रदेश में सरकार बने एक साल होने के बाद भी सत्ता में कार्यकर्ताओं की सहभागिता तक का काम  शुरू नहीं हो सका है।
प्रदेश भाजपा में भी होना है कई नियुक्तियां
माना जा रहा है कि नए संगठन महामंत्री के नाम का फैसला होने के बाद ही भाजपा में रिक्त पदों पर नियुक्तियां होने की संभावना जताई जा रही है। इनमें प्रदेश प्रवक्ताओं, मीडिया पैनलिस्ट से लेकर कार्यकारिणी सदस्य भी शामिल हैं। इसी तरह से कई सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों की भी नियुक्तियां की जानी हैं।

Ramswaroop Mantri

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