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माननीयों के आवास बनाना पड़ा आवास संघ को भारी

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सांसद विधायकों द्वारा किस्त जमा नहीं कराए जाने की वजह से आवास संघ को इसके निर्माण के लिए 70 फीसदी राशि का कर्ज लेना पड़ा है

भोपाल।
 जो मप्र आवास संघ आठ साल पहले उस दौर में भी मुनाफे में चल रहा था, जब अन्य निगम मंडल घाटे में थे, वहीं अब माननीयों के लिए निजी आवास बनाने की वजह से करोड़ों रुपए के न केवल घाटे में आ चुका है, बल्कि उसे अब अपने कर्मचारियों का वेतन बांटने के भी लाले पड़ने लगे हैं। दरअसल प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2012 में राज्य के सभी 320 विधायकों के लिए निजी आवास बनाने का काम सहकारी आवास संघ को दिया गया था। अधिकांश विधायकों ने उस समय इस प्रोजेक्ट में आवास बुकिंग के लिए टोकन मनी जमा कराई थी। जिसके बाद उसका निर्माण शुरू कर दिया गया था। यह बात अलग है कि आठ साल बाद भी इस रचना टावर का काम अधूरा है। इसकी वजह है माननीयों द्वारा बुकिंग के बाद भी राशि का भुगतान न करना। दरअसल अब माननीयों को इस टावर की लोकेशन पसंद नहीं आ रही है। इसके पीछे की वजह है इसका रेल लाइन और पास में सुभाष नगर विश्राम घाट का होना। यही नहीं नापसंदी की एक और वजह उसके लिए रास्ता झुग्गी बस्तियों के बीच से होना है। खास बात यह है कि जिन झुग्गियों की वजह से माननीयों को रास्ता पसंद नहीं आ रहा है उन्हें बसाने में राजनैतिज्ञों की ही पूरी भूमिका रहती है, जिनकी वजह से आम आदमी बेहद परेशान रहता है। माननीयों द्वारा राशि जमा नहीं कराई जाने की वजह से आवास संघ को इसके निर्माण के लिए 70 फीसदी राशि का कर्ज लेना पड़ा है। अब इनके निर्माण के बाद भी विधायकों द्वारा तय किस्तों का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है जिसकी वजह से आवास संघ को बड़ा आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। यह प्रोजेक्ट दो सौ करोड़ रुपए से अधिक का है। रचना टॉवर के निर्माण की शुरूआत वर्ष 2012 में की गई थी। जिसके तहत 320 एचआईजी, एमआईजी के साथ 48 ईडब्ल्यूएस बनाए जाने थे। इनके निर्माण के बाद अब तक महज 98 विधायकों व सांसदों ने ही रजिस्ट्री कराई है, जबकि 50 पूर्व, वर्तमान विधायकों ने बुकिंग राशि को अब वापस ले लिया है। इसके अलावा अब तक  आधा सैकड़ा से अधिक पूर्व विधायकों ने सिर्फ टोकन मनी के रुप में 10 हजार से लेकर 1 लाख रुपए तक ही जमा कराए हैं।

अब कर्मचारियों को देने की मजबूरी  
पूर्व और वर्तमान विधायकों, सांसदों द्वारा आवास नहीं लिए जाने की वजह से मजबूरी में आवास संघ इनको शासकीय कर्मचारियों को देने की तैयारी कर रहा है, जिससे कि निर्मित आवासों का विक्रय हो सके। इसके लिए आवास संघ द्वारा सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। जिसमें विस, मंत्रालय के साथ ही पूर्व विधायकों के परिवारों को शामिल करने का आग्रह किया गया है। फिलहाल टावर के आवासों में इंटीरियर, बिजली, सीवेज लाइन का काम होना ही रह गया है।

यह है आवासों की कीमत
रचना टावर में एचआईजी और सीनियर एमआईजी के 240, जूनियर एमआईजी के 80, एलआईजी 20 और ईडब्ल्यूएस के 28 फ्लैट बनाए गए हैं। जिसमें एचआईजी की कीमत 61.50 लाख, सीनियर एमआईजी की 47.50 से 58 लाख, जूनियर एमआईजी की 26.90 से 33.50 लाख, एलआईजी की 12.40 लाख से 17 लाख और ईडब्ल्यूएस की कीमत 6.85 लाख से 9.50 लाख रुपए तय की गई है। इसकी लांचिंग के समय 339 आवेदन प्राप्त हुए थे।

Ramswaroop Mantri

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