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थाने की बाथरूम में लगी नल की टोंटी से लटककर कोई आत्महत्या कैसे कर सकता है

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अजय असुर

कासगंज इलाके में 21 वर्षीय अल्ताफ एक घर में टाइल्स लगा रहा था, उस घर की लड़की लापता हो गयी और परिवार वालों का शक अल्ताफ पर गया। सोमवार को शाम 8 बजे पुलिस घर से अल्ताफ को पूछ-ताछ के लिए ले गयी और 24 घंटे बाद उसकी आत्महत्या की खबर आती है। पुलिस द्वारा दी गयी आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठने पर 5 पुलिस वालों को सस्पेंड कर दिया जाता है। 
न्यूज आजतक के अनुसार वॉशरूम के अंदर सिर्फ एक पानी का पाइप है, जो कि जमीन से करीब दो फीट की ऊंचाई पर है, उसी पाइप में एक टोटी लगी हुई है। इसके अलावा पूरे वॉशरूम में न कोई पाइप है और न ही कोई कुंडी। तो कोई 2 फिट की ऊंचाई पर से कैसे फांसी लगाकर आत्महत्या कर सकता है? क्या अल्ताफ आधा-एक फिट या डेढ़ फिट का था? और प्लास्टिक की टोटी कैसे किसी भी व्यक्ति का वजन सह सकती है? आप स्वयं टोटी और पाइप क़ो देखकर अंदाजा लगा लीजिए कि 15 लीटर की बाल्टी क़ो पानी भरकर यदि उस टोटी पर टांग दिया जाए तो टूट जाएगी। अल्ताफ तकरीबन साढ़े पांच फिट और पचास किलो का था और प्लास्टिक की जर्जर पाइप और टोटी 50 किलो का वजन झेल लेती है और रस्सी की जगहं जैकेट की हुड (टोपी) में लगा नारा से जो इतना छोटा होता है कि आत्महत्या तो नहीं हो सकती है। उस नारे से गर्दन में तो बंध जाएगा पर लटकने भर बड़ा नहीं होता है। लेकिन जनसेवक पुलिस यह अश्लील और मनगढन्त कहानी धड़ल्ले से सुना सकती है। गजब की कहानी गढ़ी है, बालीवुड ही नहीं हालीवुड को भी फेल कर दिया हामारी जनसेवक पुलिस ने। पर यह जनरक्षक पुलिस तो योगी बाबा की ठोंको और राम राज्य की पुलिस है। यहा सब कुछ संभव है। इस तरह की घटना सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, सभी प्रदेशों में आए दिन घटित होती है। उत्तर प्रदेश ही नहीं देश के सभी प्रदेशों में बंदूक और ठोंको नीति का सहारा लेकर अपराधियों को सबक सिखाने के नाम पर मेहनतकश जनता पर अंकुश लगाते हैं। इनकी इस नीति से ना अपराध कंट्रोल हुआ, न अपराधीयों को पुलिस का खौफ हुआ, उल्टा मेहनतकश जनता ही खौफ में है। 
कई केसों में देखा गया है कि आत्महत्या के मामले में अगर कहीं से भी पैर जमीन पर या किसी सतह पर छू जाने की गुंजाइश रहती है तो आत्महत्या की थ्योरी को नकार दिया जाता है क्योंकि जान निकलना आसान नहीं होता। आदमी छटपटाकर पैर जमीन पर रख देता है और पैर रखने पर व्यक्ति गले में लगी रस्सी से हवा में लटक नहीं सकता है जिससे गर्दन में खिचाव नहीं होगा और व्यक्ति आराम से सांस लेता रहेगा और व्यक्ति जीवित रहेगा। लेकिन हमारी जनसेवक पुलिस कुछ ऐसा दावा कर रही है कि आदमी ने बिस्तर पर सोते-सोते या जमीन पर बैठे-बैठे फांसी लगा कर मर जाता है। ये उतना ही सच है, जितना चुल्लू भर पानी में डूबकर मर जाना।
पिछले 3 सालों में उत्तर प्रदेश की पुलिस कस्टडी में 1318 लोग मरे हैं। (27 जुलाई को लोकसभा में पूछा गया कि देश में पुलिस और न्‍याय‍िक हिरासत में कितने लोगों की मौत हुई। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राष्‍ट्रीय मानवाध‍िकार आयोग के आंकड़ों के सहारे बताया कि हिरासत में मौत के मामलों में उत्‍तर प्रदेश पहले नंबर पर है।) यानी हर महीने तकरीबन 37 व्यक्ति पुलिस कस्टडी में मौते हुई हैं। यानी हरदिन एक से ज्यादा लोग मारे जा रहें हैं। क्या अभी भी आपको लगता है कि ये पुलिस आम जनता के लिए है? यदि ये पुलिस मेहनतकश जनता के लिए होती तो कस्टडी में यूं गरीब जनता नहीं मारी जाती!
कासगंज में अल्ताफ की गैरन्यायिक हत्या न पहली है, न आखिरी। कभी कासगंज, कभी आगरा, कभी गोरखपुर…. हर प्रदेश के हर शहर के हर थाने की यही कहानी है। आंकड़े भी गवाही देते हैं। अभी हाल ही में गोरखपुर में कारोबारी मनीष गुप्ता की पुलिस की पिटाई से होटल में मौत हो जाती है और कुछ दिन पहले आगरा में सफाई कर्मचारी अरुण वाल्मिकी की मौत भी पुलिस कस्टडी में हो जाती है और हल्ला मचने पर चन्द पुलिसवाले सस्पेंड! ज्यादा हुआ तो चन्द कागज का नोट बतौर मुआवजा परिवार वालों को दे दिया जाता है तो किसी की मौत और मौत के सौदागर को कुछ दिनों या महीने के लिए सस्पेंशन और सस्पेंशन के बाद फिर नए थाने में बहाली। यही है जनरक्षक पुलिस का जनभक्षक असली चेहरा। क्योंकि खुद पुलिस के पास कानूनन इतने पावर हैं की वो चाहे जो करें वो सब जायज है। इसीलिए प्रतिदिन एक से ज्यादा मौतें पुलिस कस्टडी में होती हैं। ये तो चन्द केसेज हैं जो सोशल मीडिया की वजह से वायरल हो जाती हैं और बलि का बकरा दो चार लोगों को बना कर सिस्टम को साफ-साफ बचा दिया जाता है। यदि सिस्टम में खोट ना होता तो इतनी हिम्मत कैसे आती इन पुलिसवालों को, मेहनतकश जनता को दमन और शोषण करने में? 
यह वही जेल, अदालत, पुलिस है जिसे 1947 में ब्रिटिश साम्राज्य ने अपने वारिसों को सौंपा था। ये वही जेल, अदालत, पुलिस है जिसने आजादी की लड़ाई लड़ रहे तमाम क्रान्तिकारियों का वध किया था। आज भी यह गरीबों, मजलूमों और उनकी आवाज उठाने वाले स्टेनस्वामी जैसे लोगों का वध कर रही है। जबकि यही पुलिस अजय मिश्रा टेनी और उसके बेटे और उसके पालतू गुण्डों को बचा रही है। लोगों को भ्रम है कि पुलिस जनता की सेवा करने, अपराध से निपटने और जनता को सुरक्षा देने के लिये होती है, मगर वह पुलिस खुद अपराधी की भूमिका में है, इससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस जनता की रक्षा नहीं करती है, यह सिर्फ अमीरों की रक्षा करती है। भले ही जनता से जबरन वसूले गये टैक्स के पैसे से उसे तनख्वाह मिलती है। 
पुलिस का भेदभावपूर्ण रवैया इस सिस्टम पर सवालिया निशान उठाता है। जहां पुलिस यौन हिंसा से पीड़ित किसी महिला को पेट्रोल डालकर जला सकती है, आधी रात को कमरे में घुसकर किसी को मार सकती है, हिरासत में किसी को प्रताड़ित कर उसकी जान ले सकती है। बगैर किसी कागजात और सर्च वारंट के घर में घुस सकती है, किसी महिला के साथ जबरन बलात्कार कर सकती है। बिना महिला पुलिस के महिला को गिरप्तार कर सकती है और थाने में लाकअप के अन्दर गैंग बलात्कार भी कर सकती है।…. शांतिपूर्ण अपने हक और शोषण के खिलाफ प्रोटेस्ट कर रहे किसानों, मजदूरों, नौजवानों, बुजुर्गों, छात्रो, आदिवासियो, महिलाओं को जबरन पीटती है, जबरन उठा लेजाकर जेल में डालकर झूठे मुकदमे लगा देती है। महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार करती है, उनके प्राइवेट पार्ट्स के साथ छेड़-छाड़ करती है। गावों-कस्बो में ज्यादा विरोध करने पर नक्सली कहकर गोली तक मार देते हैं और शहरों में अर्बन नक्सल बता कर ठोको की नीति अपनाते हैं…. पत्रकारों पर अंग्रेजों के रोलिंग एक्ट जैसा काला कानून UAPA लगाते हैं ताकी कोई सच ना कह पाए, लोग सच कहने में डरें।….
यहां मैं कासगंज सदर थाने के उस बाथरूम के विडियो भी शेयर कर रहा हूँ उत्तर प्रदेश की पुलिसजिसमें प्लास्टिक की पाइप में लगी प्लास्टिक की टोटी से लटककर अल्ताफ़ द्वारा आत्महत्या किए जाने की बात कह रही है। दुनिया में नाकारा सिस्टम के प्रशासन का इससे घटिया उदाहरण मौजूद नहीं है….
*कातिल की यह दलील भी मुंसिफ ने मान ली,**मकतूल खुद गिरा था चाकू की नोंक पर!*
ये सरासर हत्या है और ये कहने में डर लगना भी नहीं चाहिए। यंहा बात अल्ताफ़ के घरवालों को न्याय दिलाने तक नहीं है। किरदार बदलते देर नहीं लगती। कल आप और हम भी मनीष, अरुन, अल्ताफ…. बनाये जा सकते है यदि वक्त रहते नहीं चेते तो….
*अजय असुर**जनवादी किसान सभा*

Ramswaroop Mantri

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