पुष्पा गुप्ता
एक-एक करके तमाम संस्थानों को पूंजीवादियों के हाथों में देने यानी देश को बेचने के पीछे विक्रेता द्वारा प्रतिष्ठानों को नाकाम बताने संबंधी दलीलों का सच एक ताजी पहल भी बयां कर रही है :
_सरकार, CEL कम्पनी को निजी हांथो में बेच रही है जबकि यह कम्पनी एक लाभ कमाने वाली कम्पनी है। वहां र्मचारी संगठन ने आम जनता से इस कम्पनी के बारे में कुछ तथ्यों को रखते हुए सरकार के सम्पदा बेचो अभियान के खिलाफ जागरूक करने के लिये यह पर्चा छपवा कर बंटवाया है। लेकिन इस कार्पोरेटी लूट पर, न तो टीवी चैनल कुछ बोल रहे हैं, और न ही अखबार कुछ लिख रहे हैं। इसे पढ़े और तथ्यों को समझें।_■ संस्थान की ओर से की गई अपील :
साथियों!
भारत सरकार अपने जन-विरोधी कामों से हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और कहावत को लगातार सच साबित कर रही है। केन्द्र सरकार एक तरफ तो देश सेवा और आत्मनिर्भर भारत का नारा देती है दूसरी तरफ पिछली सरकारों द्वारा उठाये गये निजीकरण की योजनाओं को अंजाम देती है।
इसी के चलते सरकार बड़े-बड़े सार्वजनिक संस्थानों को अपने चहेते पूंजीपतियों को औने पौने दामों में बेच रही है। जिसकी ताजा मिसाल सरकार द्वारा सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सी०ई०एल०) का बेचा जाना है।
● सी०ई०एल० के बारे में :
सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (भारत सरकार का उद्यम) विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत अकेला सार्वजनिक संस्थान है जो 50 एकड़ जमीन के साथ 26 जून 1974 से साइट-4, औद्योगिक क्षेत्र, साहिबाबाद, गाजियाबाद में स्थित है।
सी०ई०एल० रक्षा के क्षेत्र में (रडार व मिसाइल तकनीक) सेना के लिए यंत्र बनाने वाला देश का एकमात्र संस्थान है। रेलवे ट्रैक-सेफ्टी से जुड़ी कार्य प्रणाली का विकास करने वाली देश की एक मात्र सरकारी क्षेत्र की कम्पनी है। इसके अलावा सौर ऊर्जा यंत्र बनाने वाला यह देश का पहला संस्थान है।
अपने शोध कार्य से सी०ई०एल० ने सुरक्षा निगरानी रेलवे और सौर ऊर्जा में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और तकनीकों को विकसित करने में अहम भूमिका निभाई है।
इसके अलावा रक्षा सम्बन्धी नये उत्पाद जिन पर सी०ई०एल० काम कर रही है जिनमें सी०जैड०टी० कॉम्पोनेन्ट (एस०एस०पी०एल० के लिए). सर्विलेंस सिस्टम (सुरक्षा के लिए), सिरॅमिक आर्मर बुलेट प्रूफ जैकेट, फेराइट सर्कुलेटर और आइसोलेटर, लेजर फैन्सिग, एल०एफ०एच०एफ० सर्किट फ्यूज, दिव्य नयन प्रोजेक्ट, दृष्टि प्रोजेक्ट पीजो बेस्ट सोनार सिस्टम इत्यादि हैं।
सी०ई०एल० आर्थिक रूप से भी एक मजबूत कम्पनी है। इस पर कोई बाहरी देनदारी नहीं है बल्कि इसके पास रु० 1592 करोड़ का आर्डर है और रु० 150 करोड़ बकाया धनराशि बाजार से प्राप्त करना अभी बाकी है। पिछले कई सालों से लाभ अर्जित कर रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में 296 करोड़ टर्न ओवर के साथ इसने रु० 23.65 करोड़ का नेट मुनाफा कमाया है।
नीति आयोग के परामर्श पर “निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) द्वारा सी०ई०एल० को जिसकी जमीन 202018 वर्ग मीटर है और जो औद्योगिक क्षेत्र, साहिबाबाद के सर्किल रेट के हिसाब से ही रु० 440 करोड़ की है एवं संपत्ति का एक स्वतंत्र मूल्यांकन रु० 957 करोड़ है। उसे मात्र रु० 210 करोड़ में बेचने का निर्णय कर लिया है। इतने कम दाम में सरकार द्वारा सी०ई०एल० का निजीकरण किया जाना घोटाले का संकेत है।
चौका देने वाली बात यह है कि कोई अन्य सरकारी संस्थान सी०ई०एल० को नहीं खरीद सकता, क्योंकि सरकार ने सरकारी संस्थानों को बोली लगाने से मना किया हुआ है। मोदी सरकार निजी व्यावसायिक घरानों के सामने घुटने टेक कर, राष्ट्रीय संपत्ति को मनमाने दामों पर अपने चहेते पूंजीपतियों को बेचकर लाभ पहुंचा रही है।
आम जनता को जाति, धर्म एवं भाषा के आधार पर बांट आपस में लड़वाकर यह सरकार हमारा ध्यान जनहित के गुर्डी के लगातार भटका रही है। इस सरकार की शा रणनीति रही कि जगतार्थों में उलझी रहे और बढ़ती महंगाई गरीबी व बेरोजगारी जैसे मुद्दो की हकीकत पर सवाल खड़ सके।
● केन्द्र सरकार की मंशा :
भारत सरकार के द्वारा लाभ अर्जित करने वाली सी०ई०एल० कम्पनी को शारदा टेक की एक सिस्टर कनसर्न कम्पनी नन्दल फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड को बहुत कम दामों में बेचना एक मंत्र का हिस्सा है। यह ऐसी फाइनेंस कम्पनी है जो सिर्फ कागजों में ही है, धरातल पर उसका कोई भी अस्तित्व नहीं है और न ही कम्पनी को चलाने का तकनीकी व औद्योगिक अनुभव है।
यह कम्पनी समापन (Wind Up) की प्रक्रिया में है और रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनी (ROC) ने नेशनल कम्पनी लॉ ट्रीबुनल (NCLAT) के पास केस लंबित है और बन्द करने की मांग की गई है जिसके कर्मचारियों का ब्यौरा तक मौजूद नहीं है. और कर्मचारियों का कुल वेतन सिर्फ रु० 60,000 वार्षिक दर्शाया गया है एवं कम्पनी में एक भी कर्मचारी ऐसा नहीं है जिसने कम्पनी में पूरे 05 साल तक कार्य किया हो।
कम्पनी के पास कोई भी भूमि, भवन, कंप्यूटर एवं लैपटॉप इत्यादि तक नहीं है जो कम्पनी और उसके व्यवसाय के लिए मूल रूप में उपयोग की जाने वाली आवश्यक सामग्री का अभाव है।
सी०ई०एल० के लिए बोली (आरक्षित मूल्य रु० 194 करोड़) में भाग लेने वाले मेसर्स नन्दल फाइनेंस एंड लीजिंग प्राइवेट लिमिटेड (रु० 210 करोड़ के साथ) एवं मेसर्स जे.पी.एम. इंडस्ट्रीज लिमिटेड (० 190 करोड़ के साथ) दोनों बोलीदाता अपनी मूल कम्पनी (मैसर्स शारदा टेक) के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़े होना मिलीभगत को दर्शाता है जिसमें दोनों ने आरक्षित मूल्य (रुo 194 करोड़) के आस-पास बोली लगाई है। यह सरकार द्वारा सी०ई०एल० के कर्मचारियों के साथ सरासर धोखा है।
सी०ई०एल० द्वारा किये गये शोध और सुरक्षा से सम्बन्धित उत्पादों को निजी हाथों में सौंपना देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है जो खतरे को आमंत्रित करना है। इससे यह साफ झलकता है कि सरकार का मकसद निजी कम्पनी को फायदा पहुंचना है न कि देश अथवा जनता को लाभ पहुंचाना।
भारत सरकार ने अपनी रिपोर्ट में सी०ई०एल० में 284 स्थाई कर्मचारी 52 कान्ट्रेक्चुअल कर्मचारी और 11 दैनिक कर्मचारी दिखाये हैं जबकि सी०ई०एल० में 284 स्थाई कर्मचारियों के साथ-साथ लगभग 750 दैनिक कर्मचारी ठेके पर काम कर रहे हैं। सरकार के इस अनैतिक व जनविरोधी कदम से लगभग 1100 कर्मचारियों के परिवारों तथा इससे जुड़े वेंडरों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। सी०ई०एल० के सभी कर्मचारियों की जीविका पर प्रश्न चिन्ह लग गया है।
सी०ई०एल० एम्प्लाइज यूनियन (सम्बद्ध-सी०आई०टी०यू०) एवं सी०ई०एल० एग्जीक्यूटिव एसोसिएशन आम जनता से देश हित में सार्वजनिक क्षेत्रों को बचाने के लिए एक बड़ा जन आन्दोलन चलाने की इस मुहिम में तन मन से पूर्ण सहयोग की अपील करती है। सी०ई०एल० जैसी कम्पनी को निजी हाथों में बेचना देश और कर्मचारियों के साथ धोखा है।
[संयुक्त कर्मचारी संगठन, सी०ई०एल० साहिबाबाद, गाजियाबाद
🔥चेतना विकास मिशन





